एक सदी पुरानी पहचान का अंत
दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित दिल्ली रेस क्लब, जो करीब 100 साल से घुड़दौड़ का केंद्र रहा है, अब इतिहास बन गया है. गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार ने क्लब की 53.242 एकड़ जमीन पर औपचारिक कब्जा ले लिया और तुरंत बाद बुलडोजर से पुराने ढांचों को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी.
यह कार्रवाई तब हुई जब पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार, 25 अगस्त को क्लब की अंतरिम स्टे याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने 11 अगस्त को संपदा अधिकारी द्वारा जारी बेदखली आदेश को चुनौती दी थी.
कोर्ट का फैसला: “प्राइमा फेसी केस नहीं बना”
प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज पितांबर दत्त ने अपने आदेश में कहा कि क्लब “प्राइमा फेसी केस” बनाने में विफल रहा, इसलिए 11 अगस्त 2026 के बेदखली आदेश पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है. मामला “Union of India vs Delhi Race Club (1940) Ltd.” के तहत चला, और कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्लब को पर्याप्त अवसर दिए गए थे, लेकिन वह अपनी बात साबित नहीं कर सका.
क्लब की लीज 1994 से रिन्यू नहीं हुई थी, जिसके बाद लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने साइट को CPWD को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई. अगली सुनवाई 26 सितंबर 2026 को तय हुई है, लेकिन तब तक कब्जा और तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी रही.
बुलडोजर चला: अस्तबल, बुकमेकर रिंग, विनिंग पोस्ट सब ढहा
गुरुवार सुबह क्लब परिसर में बुलडोजर पहुंचे और कई ऐतिहासिक ढांचों को गिरा दिया गया. इनमें शामिल थे: घोड़ों के अस्तबल, जहां दशकों से सैकड़ों घोड़े रखे जाते थे.
बुकमेकर रिंग और विनिंग पोस्ट, जो घुड़दौड़ के दौरान सट्टेबाजी और रेस के परिणाम घोषित करने का केंद्र हुआ करता था.
फोटोफिनिश कैमरा और सैडलिंग एनक्लोजर, जो रेस की तकनीकी और लॉजिस्टिक व्यवस्था का हिस्सा थे.
क्लब के एक अधिकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई के बाद घुड़दौड़ की सभी गतिविधियां प्रभावी रूप से बंद हो गईं, और क्लब से जुड़े लोगों में गहरी निराशा है.
53 एकड़ जमीन अब किसके पास?
केंद्र सरकार ने लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित इस 53.242 एकड़ जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है, जो प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बहुत करीब स्थित है. लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO), जो केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आता है, ने इस जमीन को “as is where is” आधार पर सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) को सौंप दिया है.
परिसर में लगाए गए नोटिस में भी इस कब्जे और हस्तांतरण की जानकारी दी गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अब यह संपत्ति केंद्र के नियंत्रण में है.
आगे क्या होगा? अभी कुछ साफ नहीं
जमीन पर कब्जा और ढांचों के विध्वंस के बाद अब यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्राइम लोकेशन पर आगे क्या निर्माण या विकास कार्य होगा. CPWD को देखरेख और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन भविष्य की योजनाओं पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया.
रेस क्लब से जुड़े लोगों के लिए यह दिन बड़े बदलाव का प्रतीक रहा. एक सदी पुरानी इस संस्था की धरोहर अब बुलडोजर की चपेट में आकर खत्म हो गई, और दिल्ली की घुड़दौड़ की पुरानी पहचान को एक गहरा झटका लगा.
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
