इस्राएली मंत्री बेन ग्विर के “टारगेट किलिंग” वाले बयान पर यूरोपीय राजनीति में उबाल

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एक ऐसा बयान जिसने हिला दी दुनिया

अगस्त 2026 की एक सुबह, जब इस्राएल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर ने एक पॉडकास्ट में कहा कि “गाजा में हर रात 30 या 40 लोगों को निशाना बनाकर खत्म किया जाना चाहिए,” तो पूरी दुनिया में सनसनी फैल गई। यह कोई साधारण बयान नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन था, जिसने यूरोपीय देशों, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों को एकजुट कर दिया।

बेन ग्विर का विवादित बयान: क्या कहा ग्विर ने?

इतमार बेन ग्विर, जो इस्राएल की धुर दक्षिणपंथी सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री हैं, ने हमास की कैद से छूटे पूर्व इस्राएली बंधक रोम ब्रास्लाव्स्की के साथ एक पॉडकास्ट के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने साफ-साफ कहा: “मुझे लगता है कि गाजा में टारगेटेड किलिंग (लक्षित हत्याएं) होनी चाहिए, हर रात 30 से 40 लोगों को खत्म किया जाए।”

ध्यान देने वाली बात यह है कि बेन ग्विर ने सिर्फ आतंकवादियों या सैन्य खतरों की बात नहीं की, बल्कि कहा कि “वहाँ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो जीवन के योग्य नहीं हैं।” यह बयान न सिर्फ अमानवीय था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के स्पष्ट उल्लंघन के दायरे में आता था।

यूरोपीय देशों की आक्रामक प्रतिक्रिया

जर्मनी का सख्त रूख

जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिख मर्त्ज़ (Friedrich Merz) ने इस बयान की कड़ी निंदा की। जर्मन सरकार के प्रवक्ता सेबास्टियन हिले (Sebastian Hille) ने बुधवार को एक प्रेस बयान में कहा: “चांसलर मंत्री बेन ग्विर के अमानवीय बयानों की कड़ी निंदा करते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं। ये बयान पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।”

जर्मनी ने न सिर्फ निंदा की, बल्कि यूरोपीय संघ के स्तर पर बेन ग्विर पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी उठाई।

फ्रांस की आवाज

फ्रांस के विदेश मंत्री ज़ां-नोएल बारो (Jean-Noël Barrot) ने भी इस बयान को “असहनीय और अमानवीय” करार दिया। बारो ने एक स्थानीय अखबार ला मोंताग्न (La Montagne) को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस तरह के बयान पश्चिमी लोकतंत्रों के मूल्यों के खिलाफ हैं।

दिलचस्प बात यह है कि फ्रांस ने मई 2026 में भी बेन ग्विर पर देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था, जब उन्होंने गाजा के लिए राहत सामग्री ले जा रहे एक्टिविस्टों का मजाक उड़ाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था।

संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टेफ़न डुजारिक (Stephane Dujarric) ने कहा: “ये बयान भयानक, घृणित, मानवताविरोधी और खतरनाक हैं। हम इनकी बिना किसी हिचकिचाहट के निंदा करते हैं।”

यहूदी समुदाय की भी निंदा

जर्मनी की केंद्रीय यहूदी काउंसिल (Central Council of Jews in Germany) के अध्यक्ष योसेफ शुस्टर (Josef Schuster) ने बेन ग्विर के बयान को “बेहद शर्मनाक और गैरजिम्मेदाराना” बताया। मंगलवार को दिए गए एक बयान में शुस्टर ने कहा: “बेन ग्विर का व्यवहार यह दिखाता है कि धुर दक्षिणपंथी ताकतें किस तरह का खतरा पेश करती हैं।”

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यहूदी समुदाय की ओर से इस्राएली अधिकारियों की आलोचना कम ही देखी जाती है, लेकिन बेन ग्विर के बयान ने उन्हें भी बोलने पर मजबूर कर दिया।

गाजा संघर्ष का भयानक सच

मौतों का आंकड़ा

7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकवादियों ने इस्राएल में घुसकर बड़े हमले किए, जिसमें 1,200 से ज्यादा इस्राएलियों की हत्या हुई और 200 से अधिक को बंधक बना लिया गया। इसके जवाब में इस्राएल ने 8 अक्टूबर 2023 को गाजा में सैन्य अभियान शुरू कर दिया।

ब्राउन यूनिवर्सिटी के ‘कॉस्ट्स ऑफ वॉर’ प्रोजेक्ट के अनुसार, 3 अक्टूबर 2025 तक गाजा में 67,075 लोग मारे जा चुके थे और करीब 1.70 लाख लोग घायल हुए थे। लेकिन यह आंकड़ा अब और बढ़ चुका है। अगस्त 2026 तक गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 73,438 लोग शहीद हो चुके हैं और 174,447 से अधिक घायल हुए हैं।

युद्धविराम के बाद भी मौतें

11 अक्टूबर 2025 को युद्धविराम लागू होने के बाद भी, 1,300 से अधिक फलीस्तीनी मारे जा चुके हैं, जो बताता है कि संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

पश्चिमी तट पर इस्राएली बस्तियों का मुद्दा

जर्मन सरकार के प्रवक्ता हिले ने एक और महत्वपूर्ण बात कही: “हमारा संदेश साफ है: पश्चिमी तट को अलग करने की दिशा में कोई और कदम नहीं उठना चाहिए।”

समस्या यह है कि 1967 के बाद से इस्राएली सरकारों ने पश्चिमी तट पर अपनी बस्तियों का विस्तार किया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गैरकानूनी है।

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, पूर्वी येरूशलम को छोड़कर भी पांच लाख से ज्यादा इस्राएली अब पश्चिमी तट पर बस चुके हैं, जबकि वहाँ फलीस्तीनियों की आबादी करीब 30 लाख है।

ये बस्तियां फलीस्तीनी बाशिंदों के लिए लगातार परेशानी का सबब बनी हुई हैं, और कई बार तो इनका उद्देश्य फलीस्तीनियों की संपत्ति पर कब्जा करना होता है।

बेन ग्विर पर यूरोपीय प्रतिबंधों की मांग

कई यूरोपीय देशों में अब बेन ग्विर पर यूरोपीय संघ-व्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। जर्मनी के एक वरिष्ठ सांसद ने यूरोपीय संघ से आग्रह किया है कि बेन ग्विर जैसे अतिवादी राजनेताओं पर प्रतिबंध लगाया जाए।

याद रहे, मई 2026 में बेन ग्विर ने एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें वह गाजा के लिए राहत सामग्री ले जा रहे एक्टिविस्टों की हिरासत का मजाक उड़ा रहे थे। इस वीडियो में वे इस्राएली झंडा लहराते हुए दिखाई दिए, जबकि एक्टिविस्ट हथकड़ी लगाए जमीन पर बैठे थे। इस घटना के बाद फ्रांस ने बेन ग्विर पर देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।

क्या ऐसे लोगों के रहते दुनिया में शांति संभव है?

यह सवाल हर विवेकशील इंसान के मन में उठना चाहिए। जब एक देश का मंत्री सार्वजनिक मंच पर यह कहे कि “हर रात 30-40 लोगों को मारना चाहिए,” तो यह न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा है।

दुनिया भर के नेताओं, संगठनों और आम नागरिकों को ऐसे बयानों की कड़ी निंदा करनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।

आगे क्या?

बेन ग्विर का बयान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस विचारधारा का प्रतिबिंब है जो शांति और मानवाधिकारों के खिलाफ है। यूरोपीय देशों, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब ठोस कदम उठाने होंगे, चाहे वह आर्थिक प्रतिबंध हों या राजनयिक दबाव।

शांति, विकास और उन्नति की कल्पना तभी की जा सकती है जब ऐसे अमानवीय विचारों को दुनिया भर में न सिर्फ नकारा जाए, बल्कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाए।

रिपोर्ट : मोहम्मद इस्माइल.

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