औरंगाबाद, बिहार: बिहार कांग्रेस में संगठन को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। 8 सितंबर 2026 को बिहार के सभी 38 जिलों से पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन के सामने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ राजेश राम और बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अलावरू के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी आलाकमान से दोनों नेताओं को उनके पदों से हटाने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप था कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पार्टी के टिकट वितरण में जमीनी स्तर पर लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि टिकट देने में कथित तौर पर मनमानी की गई और पैसे के लेन-देन के आरोप भी सामने आए। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ा और कांग्रेस को केवल छह सीटों पर जीत मिली, जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 29 सीटें जीती थीं।
कुटुंबा सीट को लेकर भी उठाए सवाल
कार्यकर्ताओं ने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ राजेश राम के राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि राजेश राम कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र संख्या-222 की सुरक्षित सीट से 2015 और 2020 में महागठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर लगातार दो बार चुनाव जीत चुके थे और करीब 10 वर्षों तक विधायक रहे।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अपनी ही सीट पर हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली और संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
सदस्यता और संगठन में पदों को लेकर भी आरोप
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर सदस्यता अभियान और संगठन में पद दिए जाने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि नए सदस्यों के नाम पर प्रति सदस्य 50 रुपये शुल्क लिया गया। इसके अलावा प्रदेश संगठन में अलग-अलग पदों के लिए भी कथित तौर पर रकम तय किए जाने का आरोप लगाया गया।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, प्रदेश उपाध्यक्ष के पद के लिए 1.5 लाख रुपये और प्रदेश महासचिव के पद के लिए एक लाख रुपये प्रति व्यक्ति लिए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में प्रदेश अध्यक्ष के करीबी लोगों के माध्यम से भी कथित वसूली कराई गई।
हालांकि, ये सभी आरोप प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेताओं का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
आलाकमान से कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से बिहार संगठन में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना था कि पार्टी को बिहार में मजबूत करना है तो लंबे समय से जमीन पर काम कर रहे पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को संगठन में उचित सम्मान और जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दूसरे दलों से आने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी हो रही है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को चेतावनी दी कि अगर मौजूदा प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो बिहार में कांग्रेस का संगठन और कमजोर हो सकता है।
पार्टी के संगठनात्मक प्रभारी ने लिया ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस आलाकमान की ओर से संगठनात्मक प्रभारी मनीष चैत्र रथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं से बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, मनीष चैत्र रथ ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी बात पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई जाएगी और उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद बिहार कांग्रेस के प्रदर्शनकारी नेताओं ने अपना ज्ञापन उन्हें सौंप दिया और धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस कार्यक्रम के आयोजन में नागेंद्र विकल, नागेंद्र पासवान विकल और जमाल अहमद भल्लू की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बिहार कांग्रेस के भीतर सामने आया यह विरोध आने वाले दिनों में पार्टी संगठन के लिए अहम मुद्दा बन सकता है। अब निगाहें कांग्रेस आलाकमान पर हैं कि वह प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं की शिकायतों और प्रदेश नेतृत्व पर लगाए गए आरोपों को किस तरह देखता है और इस मामले में क्या कदम उठाता है।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
