औरंगाबाद (बिहार) : मंगलवार, 23 जून 2026 को व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद में एक अहम मामले की सुनवाई हुई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवम ने एस.टी.आर. संख्या 557/23, जी.आर. संख्या 227/23 और दाउदनगर थाना कांड संख्या 299/23 में फैसला सुनाते हुए दो अभियुक्तों को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने किन अभियुक्तों को दोषी माना?
इस मामले की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक (ए.पी.पी.) राजाराम चौधरी ने बताया कि काराधीन शिवम् कुमार और रंजीत चंद्रवंशी, निवासी चौरम, दाउदनगर को भारतीय दंड विधान की धारा 302/34 के तहत दोषी पाया गया है।
सुनवाई के बाद अदालत ने रंजीत चंद्रवंशी का बंध-पत्र विखंडित करते हुए उसे भी काराधीन शिवम् कुमार के साथ जेल भेजने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए छह गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह गवाह पेश किए गए। इनमें सूचक नीरज कुमार, लाल मुनी देवी और रिंकी देवी के बयान महत्वपूर्ण रहे। इन सभी ने अभियोजन पक्ष का समर्थन किया और घटना से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखा।
क्या था पूरा मामला?
मामले से जुड़े अधिवक्ता के अनुसार, चौरम निवासी नीरज कुमार ने 20 मई 2023 को दाउदनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
प्राथमिकी में बताया गया था कि उनकी चाची संजू कुंवर 20 मई 2023 की सुबह करीब 5:30 बजे शौच से लौट रही थीं। इसी दौरान रास्ते में किसी बात को लेकर शिवम् कुमार से उनकी बहस हो गई।
बहस के बाद हुआ हमला
आरोप के अनुसार, बहस के दौरान शिवम् कुमार ने चाकू से हमला किया, जबकि उसके पिता ने लाठी से मारपीट की। इस हमले में संजू कुंवर गंभीर रूप से घायल हो गईं।
घटना के बाद ग्रामीणों की मदद से उन्हें पहले दाउदनगर अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें सदर अस्पताल, औरंगाबाद रेफर किया गया।
इलाज के दौरान हुई मौत
इलाज के क्रम में 22 मई 2023 को संजू कुंवर की मौत हो गई। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में धारदार हथियार से लगी चोटों की पुष्टि हुई थी, जिसे मामले में अहम साक्ष्य माना गया।
घटना के बाद हुई थी गिरफ्तारी
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने शिवम् कुमार और रंजीत चंद्रवंशी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद मामला न्यायालय में चला, जहां गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया।
अदालत में मौजूद था मृतका का नाबालिग बेटा
सुनवाई के दौरान मृतका का नाबालिग पुत्र विकी कुमार, जो वर्तमान में आठवीं कक्षा का छात्र है, भी अदालत में मौजूद था।
उसने भावुक होकर कहा कि पहले उसके पिता का निधन हुआ और इस घटना के बाद उसने अपनी मां को भी खो दिया। उसने कहा कि उसे न्यायालय पर पूरा भरोसा था और वह न्याय मिलने का इंतजार कर रहा था।
अब सज़ा के फैसले का इंतजार
मामले में दोषसिद्धि के बाद अब सभी की निगाहें सज़ा के फैसले पर टिकी हैं। अदालत ने सज़ा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 7 जुलाई 2026 की तारीख तय की है।
किन धाराओं में लिया गया था संज्ञान?
इस मामले में न्यायालय ने भारतीय दंड विधान की धारा 341, 323, 326, 307, 302 और 34 के तहत संज्ञान लिया था। अब दोषसिद्धि के बाद अगली सुनवाई में सज़ा पर अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
