बिहार, 2 सितंबर 2026: बिहार राज्य संबद्ध डिग्री कॉलेज शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर फैक्टनेब मगध विश्वविद्यालय इकाई से जुड़े शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने बुधवार को मगध विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से इनके जल्द समाधान की मांग की।
धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार राज्य संबद्ध डिग्री कॉलेज शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ की मगध विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार मित्तू ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन गया जिला अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने किया।
वर्षों पुरानी मांगें पूरी नहीं होने पर नाराजगी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महासंघ के संरक्षक प्रो. नवल किशोर प्रसाद सिंह, डॉ. अनिल कुमार सिन्हा, प्रो. डॉ. अशोक कुमार सिंह, प्रो. शत्रुध्न प्रसाद, शशि रंजन कुमार, राम विलास सिंह, विकास कुमार, प्रो. सुनील कुमार, प्रो. रंजीत भारद्वाज, प्रो. श्रावण कुमार, प्रो. बृजेश शर्मा, नवल किशोर चक्रवर्ती, अनिल कुमार सिंह, कुमार चंद्रशेखर, प्रो. शोभा कुमारी, नंदनी कुमारी, प्रो. आशा कुमारी, निमिष भारद्वाज और अभिषेक कुमार समेत अन्य वक्ताओं ने अपनी बातें रखीं।
वक्ताओं ने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में छात्र संबद्ध अनुदानित डिग्री कॉलेजों के माध्यम से उच्च शिक्षा हासिल करते हैं। उनके मुताबिक, राज्य के करीब 65 प्रतिशत छात्रों को डिग्री शिक्षा उपलब्ध कराने में इन कॉलेजों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद इन संस्थानों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी लंबे समय से नियमित वेतनमान और पेंशन की मांग कर रहे हैं।

महासंघ के नेताओं का कहना था कि यह मांग करीब चार दशक पुरानी है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। उन्होंने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के साथ-साथ राज्य सरकार की ओर से पहले की गई घोषणाओं का भी हवाला दिया और कहा कि इनका अपेक्षित लाभ कर्मचारियों को नहीं मिल सका है।
बकाया अनुदान समेत कई मुद्दे उठाए
धरना-प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने संबद्ध डिग्री कॉलेजों से जुड़ी कई लंबित समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया।
महासंघ के नेताओं के अनुसार, इंटर और डिग्री के करीब आठ वर्षों का बकाया अनुदान अब तक नहीं मिलने से कॉलेजों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इसके अलावा सीनेट और सिंडिकेट चुनाव समय पर नहीं होने, संबद्ध कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में रिक्त पदों को नहीं भरे जाने और शिक्षक प्रतिनिधियों का चुनाव समय पर नहीं कराने जैसे मुद्दे भी उठाए गए।
वक्ताओं ने कॉपी मूल्यांकन के पारिश्रमिक का नियमित और समय पर भुगतान नहीं होने तथा पूर्व में कटौती की गई राशि का भुगतान लंबित रहने का भी आरोप लगाया। इन समस्याओं को लेकर शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ने की बात कही गई।
विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 को लेकर भी विरोध
धरने के दौरान विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया। महासंघ के नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था में बदलाव करते हुए राज्य के डिग्री कॉलेजों को कुलाधिपति सह राज्यपाल के अधीन व्यवस्था से राज्य सरकार के अधीन लाने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने इस व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग की। नेताओं का कहना था कि संबद्ध और अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी लगातार इस प्रावधान के विरोध में अपनी आवाज उठा रहे हैं।
9 सितंबर से पटना में आंदोलन की घोषणा
महासंघ ने मांगों के समाधान के लिए आगे भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। नेताओं के अनुसार, चरणबद्ध आंदोलन के तहत 9 सितंबर से पटना में मुख्यमंत्री के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना प्रस्तावित है।
महासंघ ने बताया कि इस कार्यक्रम में मगध विश्वविद्यालय से जुड़े संबद्ध अनुदानित कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। संगठन के अनुसार, 10 सितंबर को सैकड़ों कर्मचारी पटना पहुंचकर आंदोलन में भाग लेंगे।
कुलपति को सौंपा राज्यपाल के नाम ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन समाप्त होने के बाद पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मगध विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों और समस्याओं से संबंधित विस्तृत ज्ञापन कुलपति को सौंपा।
ज्ञापन महामहिम राज्यपाल के नाम दिया गया। महासंघ ने उम्मीद जताई कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों की लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाएगा।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
