औरंगाबाद, बिहार: बिहार में सुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को लेकर सरकार लगातार अपनी प्रतिबद्धता जताती रही है। लेकिन औरंगाबाद जिले के रफीगंज नगर पंचायत में भारी वाहनों से कथित तौर पर सेवा शुल्क, चुंगी या मार्ग कर के नाम पर वसूली किए जाने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत क्षेत्र में कई जगहों पर वाहनों से प्रतिदिन शुल्क लिया जा रहा है। खास बात यह है कि नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से नगर निकाय क्षेत्रों में मार्ग कर, प्रवेश शुल्क या चुंगी जैसी वसूली को लेकर प्रतिबंध की बात कही गई है। ऐसे में रफीगंज में कथित वसूली को लेकर आम लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
विभागीय निर्देशों के बावजूद वसूली का आरोप
नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा की ओर से दिए गए बयान के मुताबिक, संबंधित नियमावली के अस्तित्व में आने तक नगर निकाय क्षेत्र में किसी भी नाम, स्वरूप या माध्यम से मार्ग कर की वसूली प्रतिबंधित है।
विभागीय निर्देशों की अवहेलना कर यदि इस तरह की वसूली की जाती है, तो संबंधित नगर आयुक्त या नगर कार्यपालक पदाधिकारी की जवाबदेही तय किए जाने और उनके विरुद्ध कार्रवाई की बात भी कही गई है।
इसी वजह से रफीगंज नगर पंचायत क्षेत्र में कथित तौर पर जारी शुल्क वसूली को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
कई जगहों पर शुल्क लिए जाने का दावा
स्थानीय लोगों के अनुसार रफीगंज नगर पंचायत क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर वाहनों से सेवा शुल्क के नाम पर राशि वसूले जाने की बात सामने आ रही है।
बताए गए प्रमुख स्थानों में धावा नदी पुल के पास, कासमा बस स्टैंड, रफीगंज मुख्य बस स्टैंड, प्रखंड कार्यालय के निकट बने पुल के पास, भदवा बस स्टैंड, बराही-पौथू रोड स्थित अंडरब्रिज के पास और तिवारी बिगहा शामिल हैं।
इसके अलावा डाकबंगला के पास जिला परिषद की जमीन पर भी सेवा शुल्क के नाम पर प्रतिदिन राशि वसूले जाने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि संबंधित मार्ग कर या प्रवेश शुल्क की वसूली पर रोक है, तो इन स्थानों पर किस प्रावधान के तहत राशि ली जा रही है?
‘वसूली का पैसा कहां जा रहा है?’
रफीगंज के आम नागरिक अब इस पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि बिहार सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई नई नियमावली लागू नहीं की गई है और तब तक इस तरह की वसूली प्रतिबंधित है, तो नगर पंचायत क्षेत्र में प्रतिदिन लिया जा रहा पैसा किस मद में जमा किया जा रहा है?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि कथित शुल्क वसूली की अनुमति किस आधार पर दी गई है और इससे संबंधित राशि का हिसाब-किताब क्या है।
हालांकि, इन आरोपों और सवालों पर नगर पंचायत रफीगंज की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना अभी बाकी है।

कार्यपालक पदाधिकारी से फोन पर हुई बातचीत
मामले में नगर पंचायत रफीगंज की कार्यपालक पदाधिकारी मैमून निशा का पक्ष जानने के लिए संवाददाता ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को शाम 5:52 बजे से पहले उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया। उस समय उनका मोबाइल व्यस्त था, जिसके कारण बातचीत नहीं हो सकी।
बाद में कार्यपालक पदाधिकारी की ओर से संवाददाता के मोबाइल पर फोन किया गया। बातचीत के दौरान उनसे रफीगंज नगर पंचायत क्षेत्र में मार्ग कर, प्रवेश सेवा शुल्क या चुंगी के नाम पर भारी वाहनों से कथित वसूली को लेकर सवाल किया गया।
संवाददाता ने विभागीय निर्देशों और नगर निकाय क्षेत्रों में इस प्रकार की वसूली पर प्रतिबंध से संबंधित सवाल रखते हुए पूछा कि रफीगंज में यदि ऐसी वसूली हो रही है, तो उसका आधार क्या है।
इस पर कार्यपालक पदाधिकारी मैमून निशा ने मोबाइल पर सवालों का विस्तृत जवाब देने के बजाय संवाददाता को कार्यालय आने और आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की बात कही।
संवाददाता ने लगातार बारिश और समय की कमी का हवाला देते हुए फोन पर ही इस मामले में जानकारी देने का अनुरोध किया, लेकिन कार्यपालक पदाधिकारी ने फिर कार्यालय आकर बातचीत करने की बात दोहराई।
इसके बाद फोन पर इस मुद्दे पर कोई विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी।
अब जवाब का इंतजार
रफीगंज नगर पंचायत क्षेत्र में कथित सेवा शुल्क या कर वसूली को लेकर स्थानीय लोगों के सवाल अब संबंधित विभाग और नगर पंचायत प्रशासन के जवाब पर टिके हैं।
सबसे अहम सवाल यही है कि यदि विभागीय निर्देशों के अनुसार नियमावली बनने तक मार्ग कर, प्रवेश शुल्क या चुंगी की वसूली प्रतिबंधित है, तो रफीगंज में कथित तौर पर हो रही वसूली किस नियम या आदेश के तहत की जा रही है?
इस मामले में नगर पंचायत प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय / अनिल कुमार विश्वकर्मा.
