औरंगाबाद, बिहार: जनता दल यूनाइटेड (JDU) औरंगाबाद की नई जिला कमेटी को प्रदेश नेतृत्व से मंजूरी मिलने के बाद शनिवार, 5 सितंबर 2026 को सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। पार्टी के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह उर्फ गुड्डू सिंह ने पदाधिकारियों के साथ मीडिया से बातचीत करते हुए नई कमेटी की जानकारी दी और कई राजनीतिक तथा सामाजिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखा।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि औरंगाबाद जिला JDU की ओर से भेजी गई कमेटी को प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अनुमोदित कर दिया है। उन्होंने इसके लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार जताया।
उन्होंने कहा कि इस बार जिला कमेटी में कुल 128 पदाधिकारी शामिल किए गए हैं। इनमें 29 उपाध्यक्ष, 41 महासचिव, 54 सचिव, एक प्रवक्ता, एक कोषाध्यक्ष और एक मीडिया प्रभारी शामिल हैं। रवि कुमार सिंह को प्रवक्ता, राजीव गुप्ता को कोषाध्यक्ष और सुधीर शर्मा को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
धर्मेंद्र कुमार सिंह ने उम्मीद जताई कि नई कमेटी में शामिल सभी पदाधिकारी पार्टी की जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाएंगे और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
‘JDU में सब कुछ ठीक है’, संगठन को लेकर जिलाध्यक्ष का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या औरंगाबाद में JDU के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, तो जिलाध्यक्ष ने इस बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में स्थिति ठीक है और जिले में JDU के दो विधायक हैं। उनके मुताबिक पार्टी संगठन मजबूती से काम कर रहा है।
इसी दौरान पत्रकार आलोक कुमार ने सोशल मीडिया पर संजय वर्मा की ओर से किए जा रहे कथित पोस्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया। आरोप है कि वर्मा लगातार यह बात उठा रहे हैं कि फॉरवर्ड क्लास के नेताओं ने JDU को अपने कब्जे में ले लिया है और इसी वजह से आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी में बाधा आ रही है।
इस सवाल पर धर्मेंद्र कुमार सिंह ने पलटकर कहा कि क्या कोई यह मान सकता है कि नीतीश कुमार जैसे नेता को कोई ‘हाईजैक’ कर सकता है। उनके इस जवाब के जरिए उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर उठ रहे सवालों को खारिज करने की कोशिश की।
अपराध के सवाल पर बोले
पत्रकारों ने जिले में अपराध की स्थिति को लेकर भी जिलाध्यक्ष से सवाल किए। शहर में शव मिलने, चोरी की घटनाओं और महिलाओं तथा नाबालिगों के खिलाफ अपराध का जिक्र करते हुए पूछा गया कि क्या ऐसी घटनाएं पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती नहीं हैं।
कुटुंबा प्रखंड में नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म के हालिया मामले का भी सवाल में उल्लेख किया गया।
जवाब में जिलाध्यक्ष ने कहा कि ऐसी घटनाओं को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन उनका कहना है कि ये छिटपुट घटनाएं हैं और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की व्यवस्था का असर इस बात से समझा जा सकता है कि अपराध करने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है और लोगों को न्याय मिल रहा है।
शराबबंदी पर बोले- सिर्फ सरकार नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी
बिहार में शराबबंदी को लेकर भी पत्रकारों ने जिलाध्यक्ष से सवाल किया। उनसे पूछा गया कि शराबबंदी के बावजूद दूसरे राज्यों से शराब बिहार में पहुंचने की खबरें सामने आती रहती हैं। सवाल यह भी था कि क्या अंतरराज्यीय सीमाओं पर बने चेक पोस्ट और पुलिस गश्त इस मामले में प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं।
ओबरा और दाउदनगर के रास्ते शराब की खेप पटना तक पहुंचने के दावों को लेकर भी उनसे जवाब मांगा गया।
धर्मेंद्र कुमार सिंह ने शराबबंदी के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामाजिक बदलाव के उद्देश्य से यह फैसला लिया था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में विदेशी शराब को लेकर निर्णय लिया गया था, लेकिन बाद में महिलाओं की मांग और व्यापक सामाजिक चिंता को देखते हुए देसी और विदेशी दोनों तरह की शराब पर रोक लागू की गई।
जिलाध्यक्ष ने माना कि शराबबंदी को सफल बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार या पुलिस की नहीं है। उनके मुताबिक समाज के हर व्यक्ति को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने गांव, मोहल्ले और आसपास शराब के कारोबार में शामिल लोगों को पहले समझाने का प्रयास किया जाए। उनका कहना था कि यदि समाज मिलकर लोगों को शराब के नुकसान के बारे में समझाएगा, तो शराबबंदी को प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने नीतीश कुमार के शराबबंदी के फैसले को साहसिक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने इसके लिए राजनीतिक और सामाजिक नुकसान भी झेला है, इसलिए समाज के लोगों को इस पहल को सफल बनाने में सहयोग करना चाहिए।
UGC, आरक्षण और SC/ST एक्ट पर भी जिलाध्यक्ष ने दिया जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में पत्रकारों ने UGC, आरक्षण और SC/ST एक्ट से जुड़े मुद्दों पर देश में चल रही बहस और विवाद को लेकर भी सवाल किया।
इस पर जिलाध्यक्ष ने कहा कि आज हर मुद्दे पर तत्काल प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर बोलने से पहले देश और समाज की सुरक्षा तथा सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखना जरूरी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में आकर ऐसे बयान न दें, जिससे समाज में आपसी विद्वेष बढ़े। उनका कहना था कि जिन मामलों पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है, उन्हें उचित मंच पर उठाया जाना चाहिए।
धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यदि किसी विषय पर हस्तक्षेप या कार्रवाई की जरूरत है, तो उसके लिए संवैधानिक और उचित माध्यम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि हर जगह विवाद खड़ा किया जाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जिलाध्यक्ष ने कुल मिलाकर संगठन को मजबूत करने, सरकार की नीतियों का बचाव करने और सामाजिक मुद्दों पर संयमित तरीके से बात रखने पर जोर दिया।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
