झारखंड, 7 सितंबर 2026। झारखंड की राजनीति ने सुदिव्य कुमार सोनू के असमय निधन के साथ एक ऐसे जनप्रतिनिधि और राजनीतिक कार्यकर्ता को खो दिया, जिनकी पहचान सिर्फ विधायक या मंत्री के तौर पर नहीं थी। संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, कार्यकर्ताओं से सहज संवाद और आम लोगों से जुड़ाव ने उन्हें राजनीतिक जीवन में अलग पहचान दिलाई।
सुदिव्य कुमार सोनू उन नेताओं में गिने जाते रहे जिन्होंने राजनीति को केवल चुनाव और सत्ता तक सीमित नहीं माना। संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं की बात सुनना और लोगों की समस्याओं को समझना उनकी राजनीतिक कार्यशैली का अहम हिस्सा रहा। वर्ष 2019 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कम समय में अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई।
उनकी खासियत यह रही कि पद मिलने के बाद भी कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ उनके संवाद में दूरी नहीं आई। राजनीतिक जीवन में मतभेद और असहमति को वह स्वाभाविक मानते थे और ऐसे मामलों में बातचीत के जरिए रास्ता निकालने पर जोर देते थे।
झारखंड की राजनीति में सुदिव्य सोनू की भूमिका संगठन और सरकार के बीच संपर्क के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रही। वह कार्यकर्ताओं के बीच आसानी से उपलब्ध रहने वाले नेताओं में शामिल थे। उनकी राजनीतिक शैली में संवाद और लोगों से सीधे जुड़े रहने को विशेष महत्व मिला।
आज के राजनीतिक माहौल में जहां पद और राजनीतिक प्रभाव को अक्सर सफलता का पैमाना माना जाता है, सुदिव्य सोनू की यात्रा यह दिखाती है कि लंबे समय तक लोगों के बीच बने रहने के लिए जनविश्वास और कार्यकर्ताओं का भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सत्ता और पद बदलते रहते हैं, लेकिन जनता के साथ कायम संबंध राजनीतिक जीवन की स्थायी पहचान बन सकते हैं।
उनका निधन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है। लंबे समय तक साथ काम करने वाले राजनीतिक सहयोगी का अचानक चले जाना केवल एक व्यक्ति को खोना नहीं होता, बल्कि उसके साथ जुड़े वर्षों के अनुभव, संवाद और राजनीतिक रिश्तों का भी अंत होता है।
सुदिव्य कुमार सोनू की याद उनके परिवार तक सीमित नहीं रहेगी। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं, समर्थकों और उन लोगों के बीच भी उनकी स्मृतियां बनी रहेंगी, जिनसे उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के दौरान आत्मीय संबंध बनाए।
उनकी सहजता, मिलनसारिता और संगठन के प्रति समर्पण आने वाले समय में भी याद किया जाएगा। उनके निधन के बाद उनके जनसरोकारों और कार्यकर्ताओं के साथ उनके संबंधों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर भले ही असमय रुक गया, लेकिन सार्वजनिक जीवन में उनके काम और लोगों से जुड़े उनके रिश्तों की स्मृति लंबे समय तक बनी रह सकती है।
दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू को विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार, साथियों तथा शुभचिंतकों को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति दें।
लेखक : हृदयानंद मिश्र, अधिवक्ता.
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
