औरंगाबाद, बिहार। बिहार कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक विवाद अब अनुशासनात्मक कार्रवाई तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। 8 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के इंदिरा भवन में बिहार के अलग-अलग जिलों से पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ किए गए धरना-प्रदर्शन के बाद 29 कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि इन कार्यकर्ताओं में औरंगाबाद जिले के भी कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं। यह धरना बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ राजेश राम और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अलावरू के खिलाफ किया गया था।
29 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नोटिस, संगठन में बढ़ी हलचल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति, पटना की ओर से पत्रांक-18 के माध्यम से 9 सितंबर 2026 को संबंधित कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा गया। नोटिस में उनसे प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब बिहार कांग्रेस संगठन को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग स्तर पर असंतोष की आवाजें उठ रही हैं। दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका मकसद पार्टी के खिलाफ जाना नहीं, बल्कि शीर्ष नेतृत्व तक बिहार संगठन से जुड़ी अपनी शिकायतें पहुंचाना था।
मृत्युंजय कुमार सिंह ने अनुशासन समिति को भेजा जवाब
औरंगाबाद जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव मृत्युंजय कुमार सिंह ने भी अनुशासन समिति को अपना जवाब तैयार कर दिया है। उन्होंने अपना स्पष्टीकरण बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिल देव प्रसाद यादव के नाम संबोधित किया है।
अपने जवाब में मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि वह 8 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वह पार्टी मुख्यालय को अपना घर मानते हैं और वहां अपने राजनीतिक अभिभावकों से अपनी बात रखने के उद्देश्य से गए थे।
उनके मुताबिक, इस दौरान अभिभावक के प्रतिनिधि मनीष चतरथ से बातचीत हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यकर्ताओं की बात पार्टी के आलाकमान तक पहुंचाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर उनकी मुलाकात शीर्ष नेतृत्व से भी कराई जाएगी।
प्रदर्शन को अनुशासनहीनता मानने से इनकार
मृत्युंजय कुमार सिंह ने अपने जवाब में कहा है कि दिल्ली में किया गया कार्यक्रम शांतिपूर्ण था और इसे पार्टी विरोधी गतिविधि या अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल लोग कांग्रेस के संविधान और पार्टी की व्यवस्था के तहत अपनी बात रखने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। उनका कहना है कि वह और उनके साथ मौजूद कई कार्यकर्ता लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकर्ताओं का उद्देश्य पार्टी को कमजोर करना नहीं, बल्कि बिहार में कांग्रेस संगठन को मजबूत करना है।
राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का लक्ष्य बताया
मृत्युंजय कुमार सिंह ने अपने जवाब में कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं का लक्ष्य कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता लंबे समय से पार्टी के लिए जमीन पर काम करते रहे हैं और उनकी शिकायतों को भी नेतृत्व तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए।
संवाददाता से बातचीत के दौरान उन्होंने कारण बताओ नोटिस पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका आरोप है कि नोटिस हताशा में जारी किया गया है। उन्होंने दोहराया कि प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने पार्टी के खिलाफ कोई असंवैधानिक गतिविधि नहीं की।
बिहार कांग्रेस में सुधार की मांग
मृत्युंजय कुमार सिंह का कहना है कि दिल्ली में प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य बिहार प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक कार्यकर्ताओं की समस्याएं पहुंचाना था। उनका दावा है कि बिहार के संगठन में सुधार की जरूरत है और लंबे समय से जमीन पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान और जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।
अब देखना यह है कि अनुशासन समिति इन कार्यकर्ताओं के जवाब पर क्या फैसला लेती है। कारण बताओ नोटिस और उसके बाद होने वाली कार्रवाई बिहार कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक मतभेदों को किस दिशा में ले जाती है, इस पर पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर बनी हुई है।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
