औरंगाबाद, बिहार। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद के तत्वावधान में शनिवार, 12 सितंबर 2026 को वर्ष 2026 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद परिसर के साथ-साथ अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, दाउदनगर में भी आयोजित हुआ। लोक अदालत में अलग-अलग श्रेणी के कुल 2,594 मामलों का निस्तारण किया गया और लगभग 3 करोड़ रुपये के समझौते कराए गए।
राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्घाटन समारोह औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय परिसर में हुआ। प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार की अध्यक्ष आनंदिता सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अरुण कुमार, जिला पदाधिकारी की प्रतिनिधि सह उप विकास आयुक्त अनुपम सिंह, पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि बिनोद सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल, जिला विधि संघ के अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय और अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, बैंक एवं बीमा कंपनियों के अधिकारी, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में वादकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन उप मुख्य विधिक बचाव अधिवक्ता अभिनंदन कुमार ने किया।
लोक अदालत को बताया त्वरित और सुलभ न्याय का माध्यम
स्वागत भाषण में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोक अदालत केवल लंबित मुकदमों के निस्तारण का माध्यम नहीं है, बल्कि आपसी सहमति और संवाद के जरिए विवादों का समाधान करने का प्रभावी मंच भी है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यक्रम संविधान की ‘सबके लिए न्याय’ की भावना को मजबूत करता है। लोक अदालत के जरिए पक्षकार बिना लंबे न्यायिक संघर्ष के अपनी सहमति से विवाद का समाधान कर सकते हैं।
सभी पक्षों की सहमति को बताया लोक अदालत की ताकत
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आपसी सौहार्द को बढ़ाने का अवसर देती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि छोटे और सुलह योग्य विवादों के निस्तारण के लिए इस व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
विधि संघ के अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय ने भी लोक अदालत की सफलता में अधिवक्ताओं और अन्य सहयोगियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अपने अधिवक्ता साथियों से इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने की अपील की।
पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि बिनोद सिंह ने लोक अदालत को मामलों के त्वरित निस्तारण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए लोगों से इसका लाभ उठाने की अपील की।
वहीं उप विकास आयुक्त अनुपम सिंह ने कहा कि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका अपने-अपने दायित्वों के माध्यम से जनहित में काम करती हैं। उन्होंने मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि आम लोगों को उनके अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए आम नागरिक अपने विवादों को सुलह और समझौते के माध्यम से सरल तथा सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त कर सकते हैं। इसका व्यापक उद्देश्य समाज में न्याय, शांति और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करना है।
अध्यक्षीय संबोधन में आपसी सहमति पर जोर
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार की अध्यक्ष आनंदिता सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यक्रमों में विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य केवल मुकदमों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि लोगों को सरल, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां विवाद का समाधान जीत और हार के आधार पर नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से होता है।
उनके अनुसार, जब किसी विवाद का समाधान आपसी बातचीत और समझदारी से होता है तो इससे केवल मुकदमा ही समाप्त नहीं होता, बल्कि पक्षकारों के बीच बनी कटुता भी कम होती है। पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में विश्वास बहाल करने में भी ऐसे समझौते अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन विवादों को भी आपसी सुलह के जरिए समाप्त कराने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएं।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लाल बिहारी पासवान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी और आयोजन में कई दिनों से जुटे न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों के प्रयासों की सराहना की।
पारिवारिक मामलों में औरंगाबाद ने बनाया नया रिकॉर्ड
इस बार की राष्ट्रीय लोक अदालत में पारिवारिक एवं वैवाहिक मामलों के निस्तारण में औरंगाबाद ने अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान बनाया। कुल 50 पारिवारिक विवादों का निस्तारण आपसी सुलह और समझौते के जरिए किया गया।
इससे लंबे समय से विवाद और मुकदमेबाजी झेल रहे कई परिवारों को राहत मिली। लोक अदालत में हुए समझौतों से आपसी मतभेद दूर करने और रिश्तों में दोबारा विश्वास कायम करने का रास्ता भी खुला।
इस उपलब्धि को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, मध्यस्थों और संबंधित पक्षों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया गया।

685 ट्रैफिक मामलों का भी हुआ निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान यातायात चालानों के निपटारे के लिए विशेष कैंप भी लगाया गया। अलग-अलग बेंच के माध्यम से लंबित यातायात चालानों से जुड़े मामलों का निस्तारण किया गया।
एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना-2026 के तहत 685 मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल 11 लाख 52 हजार 422 रुपये की राशि वसूल की गई। योजना का उद्देश्य लंबे समय से लंबित ई-चालानों का शीघ्र निस्तारण करना और अदालतों पर मामलों का बोझ कम करना बताया गया।
चिकित्सा जांच शिविर में भी लोगों को मिली सुविधा
राष्ट्रीय लोक अदालत परिसर में चिकित्सा जांच शिविर का भी आयोजन किया गया। इसमें शुगर, ब्लड प्रेशर और हीमोग्लोबिन की जांच की गई। जरूरत के अनुसार दवाओं का वितरण भी किया गया।
शिविर में वादकारियों के अलावा न्यायालय के कर्मचारियों और अधिवक्ताओं की भी स्वास्थ्य जांच की गई।
अलग-अलग मामलों में हुआ समझौता
राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना से जुड़े 2 मामलों में 5.25 लाख रुपये का समझौता कराया गया। पारिवारिक मामलों में 50 और आपराधिक सुलहनीय मामलों में 532 मामलों का निस्तारण हुआ।
चेक बाउंस से जुड़े 11 मामलों में 50 लाख रुपये का समझौता कराया गया। अनुमंडल पदाधिकारी के न्यायालय से संबंधित 695 मामलों का भी निपटारा किया गया।
टेलीफोन से संबंधित 19 मामलों में 6,701 रुपये का समझौता हुआ। बैंक ऋण से जुड़े 600 मामलों का निस्तारण करते हुए कुल 2 करोड़ 35 लाख 96 हजार 56 रुपये की राहत पक्षकारों को दी गई।
इसके अतिरिक्त यातायात से जुड़े 685 मामलों में 11 लाख 52 हजार 422 रुपये का समझौता कराया गया। इन सभी मामलों को मिलाकर राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 2,594 मामलों का निस्तारण हुआ और करीब 3 करोड़ रुपये के समझौते कराए गए।
आयोजन में इन लोगों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में उप मुख्य विधिक रक्षा परामर्श प्रणाली के अभिनंदन कुमार, सहायक विधिक रक्षा परामर्श प्रणाली के अधिवक्ता चंदन कुमार मिश्रा, सुनील कुमार सिंह, परशुराम कुमार सिंह, संजय कुमार, तकनीकी सहयोगी अर्पणा सहाय, सुनील कुमार सिन्हा, मोहम्मद अंजारुल हक समेत नवरतन कुमार, बिरजा प्रजापत, गीता कुमारी, कुंदन कुमार, राजीव नयन कुमार और मनोज कुमार सहित सभी अर्ध-विधिक स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
