पटना की सियासत इन दिनों समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर एक बार फिर गर्म हो उठी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में मुंबई में साफ कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी इक्कीस राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। इस बयान के ठीक अगले दिन जदयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने पटना में मीडिया से बात करते हुए पार्टी का पुराना रुख दोहरा दिया।
अमित शाह का बयान और जदयू की प्रतिक्रिया
श्याम रजक ने कहा कि जब संसद में यूसीसी से जुड़ा विधेयक आया था, तब जदयू ने उसका समर्थन जरूर किया था। लेकिन उसी वक्त पार्टी के नेता नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया था कि बिहार में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी आज भी उसी स्टैंड पर कायम है। बिहार में यूसीसी लागू होने का सवाल ही नहीं उठता।
रजक के मुताबिक नीतीश कुमार की उस समय की बात उनके लिए अभी भी मायने रखती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जदयू ने संसद में समर्थन देते समय राज्य स्तर पर अपनी शर्त साफ रख दी थी।
बिहार सरकार भाजपा की अकेली नहीं, गठबंधन की है
बिहार में भाजपा के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी होने का जिक्र आने पर श्याम रजक ने साफ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में सिर्फ भाजपा की सरकार नहीं चल रही। यह एनडीए गठबंधन की सरकार है। इसमें जदयू के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे दल शामिल हैं।
रजक के शब्दों में इसे भाजपा की स्वतंत्र सरकार नहीं माना जा सकता। ऐसे में किसी भी बड़े फैसले पर गठबंधन के सभी दलों के रुख को ध्यान में रखना जरूरी है। यूसीसी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी यही बात लागू होती है।
एनडीए के अंदर अलग-अलग सुर
अमित शाह के बयान के बाद बिहार एनडीए के भीतर मतभेद साफ दिखने लगे हैं। जदयू का रुख सख्त है तो हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता और मंत्री संतोष सुमन ने थोड़ा अलग स्वर अपनाया। उन्होंने कहा कि अगर गृह मंत्री ने कुछ कहा है तो उसमें अच्छाई हो सकती है। गठबंधन के नेताओं से बातचीत करके आगे बढ़ना चाहिए।
लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास की ओर से भी प्रारूप आने के बाद अपना रुख तय करने की बात कही गई है। विपक्षी राजद ने इसे नफरत की राजनीति करार दिया है और मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा का वादा किया है।
यूसीसी का मौजूदा सफर
देश में उत्तराखंड पहले राज्य के रूप में जनवरी 2025 में यूसीसी लागू कर चुका है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने विधेयक पारित कर दिए हैं, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना का इंतजार है। बिहार जैसे बड़े राज्य में जनसंख्या की विविधता और मुस्लिम समुदाय की करीब सत्रह फीसदी हिस्सेदारी को देखते हुए यह मुद्दा खास तौर पर संवेदनशील माना जाता है।
जदयू नेता संजय झा ने भी कहा है कि पार्टी जल्द ही अमित शाह से इस मुद्दे पर मुलाकात करेगी। श्याम रजक के बयान से साफ है कि जदयू अपने पुराने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही।
यह पूरा मामला गठबंधन की राजनीति की जटिलताओं को फिर से सामने लाता है। जहां एक तरफ केंद्र स्तर पर यूसीसी को आगे बढ़ाने की कोशिश है, वहीं राज्य स्तर पर सहयोगी दल अपनी शर्तें और सीमाएं तय कर रहे हैं। बिहार की सियासत में अब देखना यह होगा कि गठबंधन के दूसरे दल किस तरफ झुकते हैं और बातचीत का नतीजा क्या निकलता है।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
