औरंगाबाद, बिहार | 18 सितंबर 2026: विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर औरंगाबाद शहर के महाराजगंज रोड में कमल हॉस्पिटल की शुरुआत की गई। अस्पताल की शुरुआत आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. सुशील कमल ने की है। उद्घाटन के मौके पर उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे।
अस्पताल शुरू करने के पीछे की वजह बताते हुए डॉ. सुशील कमल ने कहा कि औरंगाबाद उनका गृह जिला है और पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2023 में वापस आने पर उन्होंने यहीं काम करने का फैसला किया था। इससे पहले उन्होंने नागा बिगहा रोड में औरंगाबाद फ्रैक्चर क्लीनिक के नाम से अपनी क्लीनिक शुरू की थी। अब उसी सेवा को बड़े परिसर में कमल हॉस्पिटल के रूप में आगे बढ़ाया गया है।
डॉ. सुशील कमल ने बताया कि वह इससे पहले रोहतास जिले के जमुहार स्थित नारायण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत थे। वहां से अलग होने के बाद अब उन्होंने औरंगाबाद में पूर्णकालिक रूप से काम करने का निर्णय लिया है।
फ्रैक्चर और आर्थोपेडिक सर्जरी की सुविधाओं का दावा
नए अस्पताल में ओपीडी, भर्ती मरीजों की सुविधा और विभिन्न आर्थोपेडिक सर्जरी की व्यवस्था उपलब्ध होने की बात डॉ. सुशील कमल ने कही। उन्होंने बताया कि अस्पताल में फ्रैक्चर से संबंधित ऑपरेशन, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट और आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह है कि जिन मरीजों को आर्थोपेडिक इलाज या सर्जरी के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, उन्हें यथासंभव जरूरी परामर्श और उपचार की सुविधा औरंगाबाद में ही मिल सके।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मरीज को आर्थोपेडिक समस्या के अलावा किसी अन्य विशेषज्ञ की जरूरत होने पर उसे आगे रेफर किया जा सकता है।
कम खर्च में इलाज पर जोर देने की बात
औरंगाबाद में पहले से मौजूद दूसरे आर्थोपेडिक अस्पतालों से अलग उनकी कार्यशैली क्या होगी, इस सवाल पर डॉ. सुशील कमल ने कहा कि उनका मुख्य जोर मरीज की जरूरत के अनुसार कम से कम अनावश्यक जांच और खर्च में उचित इलाज उपलब्ध कराने पर रहेगा।
उन्होंने कहा कि सही क्लीनिकल मूल्यांकन होने पर कई मामलों में अनावश्यक जांच और दवाओं पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को ध्यान में रखते हुए सर्जरी, प्लास्टर और अस्पताल से जुड़ी अन्य सेवाओं की लागत को यथासंभव कम रखने का प्रयास करने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने कहा कि कोशिश होगी कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी निर्धारित मानकों के अनुरूप इलाज की सुविधा मिल सके।
ऑर्थोपेडिक इमरजेंसी 24 घंटे उपलब्ध कराने की बात
क्रिटिकल मरीजों को रेफर किए जाने की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर डॉ. सुशील कमल ने कहा कि ऑर्थोपेडिक मामलों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं के उपचार की व्यवस्था अस्पताल में रखने की योजना है।
उन्होंने बताया कि विभिन्न प्रकार के फ्रैक्चर, स्पाइन से जुड़ी चोटों और डिसलोकेशन जैसी आर्थोपेडिक समस्याओं के लिए सर्जरी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। वहीं, सिर की गंभीर चोट या किसी अन्य विशेषज्ञ की आवश्यकता वाले मामलों में मरीज को दूसरे अस्पताल या विशेषज्ञ के पास भेजने की जरूरत पड़ सकती है।
डॉ. सुशील कमल के अनुसार, अस्पताल में 24 घंटे ऑर्थोपेडिक इमरजेंसी, एक्स-रे, ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

विश्वकर्मा पूजा पर ही क्यों शुरू किया अस्पताल?
विश्वकर्मा पूजा के दिन अस्पताल शुरू करने के सवाल पर डॉ. सुशील कमल ने कहा कि उन्हें इसी महीने अस्पताल की शुरुआत करनी थी और विश्वकर्मा पूजा का दिन उन्हें इसके लिए उपयुक्त लगा। उन्होंने कहा कि आर्थोपेडिक चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और तकनीकी संसाधनों को देखते हुए विश्वकर्मा पूजा के दिन शुरुआत करना उन्हें अच्छा लगा।
उन्होंने बताया कि नया परिसर पुराने क्लीनिक की तुलना में बड़ा है। यहां अधिक बेड, वार्ड और अलग कमरे की व्यवस्था की गई है। आने वाले समय में अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं भी शुरू करने की योजना है। उन्होंने बताया कि डॉ. शालिनी सर की ओपीडी और ऑपरेशन से संबंधित सेवाएं भी भविष्य में यहां शुरू किए जाने की योजना है।
कोलकाता से दिल्ली तक हुई पढ़ाई
अपने करियर और शिक्षा के बारे में डॉ. सुशील कमल ने बताया कि उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई कोलकाता से की। इसके बाद दिल्ली से एमएस और आर्थोपेडिक्स की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने विभिन्न फेलोशिप भी कीं और दिल्ली सरकार के अस्पताल में करीब तीन वर्ष तक सीनियर रेजिडेंट के रूप में काम किया।
उन्होंने कहा कि बाहर रहकर पढ़ाई और काम करने के बाद उन्हें लगा कि अपने गृह शहर में रहकर लोगों को चिकित्सा सेवा देना अधिक जरूरी है। उनके मुताबिक, स्थानीय लोगों को अक्सर बेहतर इलाज के लिए पटना, बनारस या दिल्ली जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। उनका प्रयास है कि आर्थोपेडिक क्षेत्र में उपलब्ध उनके अनुभव और प्रशिक्षण का लाभ स्थानीय लोगों को औरंगाबाद में मिल सके।
जिले के लोगों से विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेने की अपील
अंत में जिलेवासियों के लिए संदेश देते हुए डॉ. सुशील कमल ने लोगों से स्वस्थ रहने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेने की अपील की।
उन्होंने कहा कि औरंगाबाद में अब अलग-अलग चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं, इसलिए लोगों को अपनी समस्या के अनुसार संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
कमल हॉस्पिटल के उद्घाटन समारोह में डॉ. सुशील कमल के परिवार के सदस्यों के अलावा अन्य लोग भी मौजूद रहे।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
