गया जी (बिहार) : देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ ने एक अनोखे ऑनलाइन काव्यानुष्ठान का आयोजन किया। “बरखा रानी तू आ जा रे” शीर्षक से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े रचनाकारों ने गीत, ग़ज़ल, दोहे, मुक्तक और छंदों के माध्यम से मेघों और बारिश का स्वागत किया तथा प्रकृति से राहत की कामना की।
इस काव्यानुष्ठान का संयोजन शब्दवीणा की कर्नाटक प्रदेश समिति ने किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा के केंद्रीय मंच से लगातार तीन घंटे तक किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली के वरिष्ठ कवि इंदु कांत अंगीरस ने की, जबकि संचालन कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनीता सैनी गुड्डी और प्रदेश उपाध्यक्ष विजयेन्द्र सैनी ने संयुक्त रूप से संभाला। विशिष्ट अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश समिति के सचिव कर्नल गोपाल अश्क मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सुनीता सैनी द्वारा प्रस्तुत माँ शारदे की वंदना से हुई। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने शब्दवीणा गीत प्रस्तुत किया। इस साहित्यिक आयोजन में बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से जुड़े रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बादल, बारिश, बिजली, मिट्टी की सोंधी खुशबू, तपती गर्मी, किसानों की परेशानियों और बाढ़-सूखे जैसी स्थितियों को बेहद खूबसूरती से शब्दों में पिरोया।
डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने अपने गीत “बहुत सह चुके गर्मी, री बरखा रानी तू आ जा रे” के जरिए तपती धरती की व्यथा को स्वर दिया। जैनेन्द्र कुमार मालवीय ने सूरज की तीखी तपिश पर आधारित रचना प्रस्तुत की, जबकि आनंद दधीचि ने बादल और बरखा के मधुर संवाद को काव्य रूप में पेश किया। मनोरमा श्रीवास्तव की रचना में धरती की उम्मीदें झलकती नजर आईं और निगम राज ने प्यासे पक्षियों की पीड़ा को मार्मिक ढंग से व्यक्त किया।
नन्हे बाल कवि सत्कृत त्रिपाठी ने अपनी मधुर आवाज़ में गायत्री मंत्र और संस्कृत श्लोक सुनाकर सभी का मन मोह लिया। दीपक कुमार, कर्नल गोपाल अश्क, डॉ. विजय शंकर और रचना झा की प्रस्तुतियों को भी खूब सराहना मिली। उनकी रचनाओं में बारिश की प्रतीक्षा, प्रकृति की सुंदरता और जीवन की आशा का सुंदर चित्रण देखने को मिला।
सरोज कुमार, रूबी कुमारी, संध्या निगम और पूनम शर्मा ने सावन, बारिश और प्रेम की भावनाओं से जुड़े गीत सुनाकर कार्यक्रम को और भी रंगीन बना दिया। वहीं राम नाथ बेख़बर की ग़ज़ल में मिट्टी की सोंधी खुशबू और काले बादलों की छटा का सुंदर वर्णन था। विजयेन्द्र सैनी और रमेश चंद्र की रचनाओं ने भी श्रोताओं को भावुक कर दिया।
इंदु कांत अंगीरस और अजय कुमार वैद्य की प्रस्तुतियों को भी मंच पर विशेष सराहना मिली। कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुनीता सैनी ने गर्मी ऋतु पर आधारित एक रोचक गीत भी सुनाया, जिसमें उन्होंने गर्मी और आम के मौसम को अलग अंदाज़ में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष इंदु कांत अंगीरस ने सभी कवियों की प्रस्तुतियों पर सारगर्भित और उत्साहवर्धक टिप्पणियाँ दीं। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस ऑनलाइन काव्यानुष्ठान को देशभर के अनेक साहित्य प्रेमियों और श्रोताओं ने शब्दवीणा के केंद्रीय मंच से जुड़कर देखा और सराहा। भीषण गर्मी के दौर में बारिश और सावन को समर्पित यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और प्रकृति प्रेम का सुंदर संगम बनकर सामने आया।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
