औरंगाबाद (बिहार)। व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद ने एक मामले में गवाह को अदालत के सामने पेश नहीं किए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। प्रधान न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार के न्यायालय ने रफीगंज थाना कांड संख्या 366/22 से जुड़े सेशन ट्रायल संख्या 594/25 की सुनवाई के दौरान रफीगंज थाना प्रभारी का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है।
अधिवक्ता के मुताबिक, मामले में गवाही पेश नहीं किए जाने को लेकर न्यायालय की ओर से 31 जुलाई 2026 को थाना प्रभारी से शोकॉज किया गया था। इसके बावजूद अब तक अदालत में गवाह को पेश नहीं किया गया। इस स्थिति को न्यायालय ने अपने आदेश की अवहेलना माना और तत्काल प्रभाव से थाना प्रभारी का वेतन रोकने का आदेश जारी किया।
बताया गया कि रफीगंज थाना प्रभारी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई पहले भी दो अन्य सेशन ट्रायल मामलों में की जा चुकी है। उन मामलों में भी न्यायालय के निर्देश के बावजूद आवश्यक गवाही पेश नहीं होने पर वेतन रोकने का आदेश दिया गया था।
अधिवक्ता ने बताया कि औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय की ओर से इससे पहले रिसियप, मुफ्फसिल और हसपुरा थाना प्रभारियों के खिलाफ भी सेशन ट्रायल की सुनवाई के दौरान गवाही पेश नहीं किए जाने के मामले में वेतन रोकने के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
इसी क्रम में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान तीन अन्य मामलों में भी संबंधित थाना प्रभारियों से जवाब-तलब किया गया। इनमें मदनपुर थाना कांड संख्या 138/20, ओबरा थाना कांड संख्या 75/19 और हसपुरा थाना कांड संख्या 301/22 शामिल हैं।
इन मामलों में गवाहों को अदालत में पेश नहीं किए जाने पर संबंधित थाना प्रभारियों को शोकॉज जारी किया गया है। न्यायालय ने शोकॉज का जवाब दाखिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय भी दिया है।
अदालत के इन आदेशों से साफ है कि सेशन ट्रायल से जुड़े मामलों में गवाही समय पर पेश नहीं करने और न्यायिक निर्देशों का पालन नहीं करने को लेकर न्यायालय अब सख्ती बरत रहा है। इसका मकसद लंबित मामलों की सुनवाई को आगे बढ़ाना और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को रोकना है। रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
