बिहार प्रदेश, 31 अगस्त 2026। आईआईएम बोधगया ने अपनी स्थापना के 11 वर्ष पूरे होने के मौके पर सोमवार को स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर संस्थान में कार्यकारी पीएचडी कार्यक्रम के पहले बैच की शुरुआत की गई, जबकि इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (IPM) के छठे बैच के विद्यार्थियों का ओरिएंटेशन कार्यक्रम के जरिए स्वागत किया गया।
इस साल आईआईएम बोधगया में कुल 207 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इनमें 137 छात्र और 70 छात्राएं शामिल हैं। वहीं, कार्यकारी पीएचडी कार्यक्रम के पहले बैच में 14 शोधार्थियों ने दाखिला लिया है, जिनमें 12 पुरुष और 2 महिला शोधार्थी हैं।
दीप प्रज्वलन के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत
ओरिएंटेशन कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद पीएचडी कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. अविरल कुमार तिवारी ने कार्यकारी पीएचडी कार्यक्रम की जानकारी दी। वहीं, आईपीएम कार्यक्रम की अध्यक्ष प्रो. अर्चना पात्रो ने नए विद्यार्थियों को कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया।
संस्थान की निदेशक प्रो. विनिता एस. सहाय ने IPM के नए बैच के विद्यार्थियों का स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने की दी सलाह
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रो. विनिता एस. सहाय ने बोधगया की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत यहां की आबादी और मानव संसाधन है। ऐसे में प्रतिभाशाली युवाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन देना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा नवाचार और सकारात्मक बदलाव की बड़ी ताकत है। विद्यार्थियों को केवल धीमी और पारंपरिक प्रगति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बड़े लक्ष्य तय कर उन्हें हासिल करने के लिए साहसिक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने युवाओं को ‘लीपफ्रॉग’ की भावना के साथ नए अवसरों का लाभ उठाकर क्षेत्र के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
बिहार के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर बोले मंत्री
समारोह में बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री नितीश मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने बिहार में तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप माहौल का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार अब तक 1,700 से अधिक स्टार्टअप्स को मंजूरी और वित्तीय सहायता दे चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य का व्यापक स्टार्टअप इकोसिस्टम करीब 5,000 स्टार्टअप्स तक पहुंच चुका है।
मंत्री ने आईआईएम बोधगया को बिहार में उच्च शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में बताया। उन्होंने बिहार में हो रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य अब अपने भविष्य को खुद आकार दे रहा है, नए कारोबार और उद्यम खड़े हो रहे हैं और विकास के लिए नए संसाधन तैयार किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में इंडिगो की उपाध्यक्ष (मानव संसाधन) डॉ. रुचि धवन शर्मा का विशेष सत्र भी हुआ। इसके बाद ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), गया के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल संदीप सिंह, एवीएसएम ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।
उन्होंने भारतीय मूल्यों और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की अहमियत पर जोर दिया। साथ ही हिंदी भाषा को जानने और उसका सम्मान करने की जरूरत भी बताई।
साइबर अपराध पर हुआ संवादात्मक सत्र
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराध को लेकर भी एक ज्ञानवर्धक और संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को बदलते डिजिटल माहौल में साइबर अपराध से जुड़े खतरों और जागरूकता के महत्व से अवगत कराया गया।
इसके बाद जेएम फाइनेंशियल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ मोहंती ने मुख्य संबोधन दिया। गूगल के स्ट्रैटेजिक एंड इमर्जिंग पार्टनरशिप्स एवं डिस्ट्रीब्यूशन इकोसिस्टम से जुड़े सत्येंद्र खरे ने भी विद्यार्थियों के साथ अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अगले सत्र में सिमेन्स टेक्नोलॉजी एंड सर्विसेज के हेड ऑफ ट्रेनिंग पिंटू कुमार जैन ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ स्थापना दिवस का समापन
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के बाद आईआईएम बोधगया का स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। इसमें पारंपरिक केक कटिंग के साथ संस्थान के विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश कीं। इन प्रस्तुतियों के जरिए विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और उत्साह देखने को मिला।
समारोह के दौरान राष्ट्रीय खेल दिवस के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। विजेता विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन, दृढ़ता और खेल भावना की सराहना करते हुए उन्हें सम्मान प्रदान किया गया।
इस तरह आईआईएम बोधगया का 11वां स्थापना दिवस समारोह नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत, युवाओं के उत्साह और संस्थान की उपलब्धियों के साथ संपन्न हुआ।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
