कॉकरोच जनता पार्टी: जब युवाओं ने व्यवस्था से सवाल पूछे

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डिअर फ्रेंड्स,  महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक आवाज़ उठी है जो आजकल काफी चर्चा में है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वहाँ खड़े होकर साफ कहा – “हमें चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करनी होगी।” 

ये कोई मामूली बात नहीं। दीपके बोले कि आज देश में संस्थागत जवाबदेही खतरनाक हालत में पहुँच गई है। लोकतंत्र के लिए ये खतरे की घंटी है। पहले जनता सरकार चुनती थी, अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि सरकार तय कर रही है कौन वोट देगा और कौन नहीं। 

कैसे शुरू हुई ये कहानी

मई 2026 में सब कुछ शुरू हुआ। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी वायरल हुई जिसमें बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की गई। बाद में उन्होंने साफ किया कि बात नकली डिग्री वालों की थी, लेकिन नुकसान हो चुका था। 

अभिजीत दीपके, जो महाराष्ट्र के ही रहने वाले हैं और बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़कर आए थे, ने उसी दिन व्यंग्य में “कॉकरोच जनता पार्टी” बना दी। शुरू में ये मजाक था। लेकिन कुछ ही दिनों में हजारों युवा जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोअर्स हो गए। बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों ने इसे असली आंदोलन बना दिया। 

युवाओं का गुस्सा और माँगें

सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबा प्रदर्शन किया। नीट पेपर लीक और परीक्षाओं की गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज़ उठाई। नतीजा ये निकला कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। ये युवाओं की बड़ी जीत मानी गई। 

अब दीपके चुनाव आयोग पर फोकस कर रहे हैं। वो कहते हैं कि जब तक आयोग की जवाबदेही तय नहीं होगी, चुनावों में हेराफेरी जारी रहेगी। समर्थक कहते हैं कि ये युवा-नेतृत्व वाला आंदोलन है जो नौकरियों, शिक्षा और शासन में पारदर्शिता माँग रहा है। आलोचक कहते हैं कि सबूत के बिना संवैधानिक संस्थाओं पर हमला हो रहा है। 

आगे क्या?

अभिजीत दीपके की पार्टी अभी चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड नहीं है। वो खुद कहते हैं कि ये दबाव समूह है, पार्टी नहीं। लेकिन युवाओं का गुस्सा साफ दिख रहा है। छत्रपति संभाजीनगर वाली बैठक में भी उन्होंने न्यायपालिका, मीडिया और राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। 

देखो भाई, लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब संस्थाएँ जवाबदेह हों। अभिजीत दीपके और उनके साथी यही बात दोहरा रहे हैं। चाहे कोई इसे व्यंग्य कहे या आंदोलन, बात तो सोचने लायक है। 

क्या चुनाव आयोग वाकई जवाबदेह है? ये सवाल अब सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बहुत सारे युवाओं का बन चुका है।

रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.

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