आईआईएम बोधगया में ज्ञानोदया 6.0 का आयोजन, एआई के दौर में नेतृत्व और प्रतिभा पर मंथन

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बोधगया, बिहार | 19 सितंबर 2026: भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बोधगया में शनिवार को वार्षिक प्रबंधन सम्मेलन ‘ज्ञानोदया 6.0’ के छठे संस्करण का आयोजन किया गया। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “कार्य की नई परिकल्पना: एआई संचालित दुनिया में प्रतिभा, नेतृत्व और प्रदर्शन” रहा।

सम्मेलन के दौरान चार पैनल चर्चाएं हुईं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव, मानव संसाधन प्रबंधन, प्रतिभा और नेतृत्व से जुड़े फैसलों में मानवीय भूमिका तथा समावेशी नेतृत्व जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में उद्योग जगत, मानव संसाधन और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ एक मंच पर आए और बदलते कार्यक्षेत्र का संगठनों तथा कर्मचारियों पर पड़ने वाले प्रभावों पर अपने विचार साझा किए।

ज्ञान और अनुशासन को बताया विकास का आधार

सम्मेलन की शुरुआत करते हुए आईआईएम बोधगया की निदेशक डॉ. विनिता एस. सहाय ने अनुशासन, निरंतर सीखने और ज्ञान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति और संगठन की प्रगति केवल तत्काल सफलता से नहीं होती, बल्कि लगातार सीखने, अपनी क्षमताओं को विकसित करने और समझ को बेहतर बनाने की प्रक्रिया से होती है।

उन्होंने कहा कि बदलते समय में निरंतर सीखना और अपने कौशल को मजबूत करना भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तैयारी का आधार बन सकता है।

एआई के साथ मानवीय गुण भी जरूरी

उद्घाटन पैनल में डॉ. विनिता एस. सहाय के साथ इंस्पायर इन्फोसोल की संस्थापक एवं सीईओ सरिता रामनाथ, यूनिलीवर की डेटा साइंस एवं एआई लीडर अलका पांडेय और बंधन बैंक में हेड-बिजनेस-एचआर शिवेश सिंह शामिल हुए।

चर्चा में कहा गया कि नेतृत्व केवल काम को दिशा देने तक सीमित नहीं है। लोगों को समझना, उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना भी नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पैनल में एआई के बढ़ते उपयोग पर चर्चा करते हुए कहा गया कि तकनीक को समझना जरूरी है, लेकिन केवल एआई का ज्ञान किसी व्यक्ति को प्रभावी नेता बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। आलोचनात्मक सोच, निर्णय लेने की क्षमता, सहानुभूति, साहस और सीखते रहने की प्रवृत्ति भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

रोजगार के लिए केवल डिग्री पर्याप्त नहीं

दूसरे सत्र का विषय “आधुनिक युग में मानव संसाधन” रहा। इसमें टेलीपरफॉर्मेंस के सीनियर डायरेक्टर, रिक्रूटमेंट एवं कैंपस सेल अतुल कुमार शर्मा, आर्काडिस की एचआर डायरेक्टर शेवथा नायक और क्रेडिट सैज़न इंडिया की हेड, टैलेंट एक्विजिशन एंड कैंपस हायरिंग अर्पिता पमनानी ने हिस्सा लिया।

चर्चा में कहा गया कि आज रोजगार-योग्यता केवल शैक्षणिक प्रदर्शन या सीजीपीए तक सीमित नहीं रह गई है। कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को भी महत्व देती हैं, जो अपनी बात स्पष्ट तरीके से रख सकें, अपनी उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकें और वास्तविक अनुभवों से हासिल कौशल का इस्तेमाल कर सकें।

इसके अलावा परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने, रचनात्मक सोच, टीम के साथ काम करने और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

एआई आधारित कारोबार में समझ और जिज्ञासा जरूरी

तीसरे सत्र में “एआई-संचालित व्यवसाय: रणनीति, डिजिटल परिवर्तन और डेटा-संचालित निर्णय” विषय पर चर्चा हुई। इसमें सैमसंग आरएंडडी इंस्टीट्यूट इंडिया की लर्निंग एंड ऑर्गनाइजेशनल डेवलपमेंट प्रमुख मानवि पाठक, एक्सेंचर में सप्लाई चेन एंड ऑपरेशंस के प्रबंध निदेशक/पार्टनर हर्षित निगम, इंस्पायर इन्फोसोल के मुख्य सूचना अधिकारी एवं मुख्य परिचालन अधिकारी सूरज सिंह और जीएम सी.के. बिड़ला हेल्थकेयर के एआई एवं डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रमुख अभय भदानी शामिल हुए।

पैनल में एआई के कारण कार्यक्षेत्र में आ रहे बदलावों और भविष्य के लिए जरूरी क्षमताओं पर विचार किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि केवल नए एआई उपकरणों को अपनाना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि किसी तकनीक का इस्तेमाल किस क्षेत्र में और किस तरीके से किया जाए, ताकि उसका वास्तविक व्यावसायिक लाभ मिल सके।

मजबूत बुनियादी समझ, निरंतर सीखने की इच्छा, जिज्ञासा और मानवीय निर्णय क्षमता को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

प्रतिभा और नेतृत्व के फैसलों में इंसानी भूमिका

समापन सत्र का विषय “डेटा और निर्णय क्षमता का मेल: प्रतिभा एवं नेतृत्व संबंधी निर्णयों में मानवीय भूमिका” रहा।

इस सत्र में नोकिया के विश्वविद्यालय संबंध प्रमुख वरुण जी, थॉमसन रॉयटर्स के मानव संसाधन निदेशक, जनशक्ति प्रमुख एवं सलाहकार रवि रंगराजू, कैपिटलमाइंड फाइनेंशियल सर्विसेज के मानव संसाधन समूह प्रमुख सुरोभीत भौमिक और हुंडई मोटर्स इंडिया लिमिटेड के प्रतिभा अधिग्रहण एवं रणनीति के सहायक महाप्रबंधक अक्षय रक्षित ने हिस्सा लिया।

चर्चा में कहा गया कि एआई आधारित कार्यक्षेत्र का भविष्य केवल तकनीकी उपकरणों को अपनाने पर निर्भर नहीं होगा। यह भी समझना जरूरी होगा कि तकनीक किस जगह वास्तविक मूल्य पैदा कर सकती है और किन फैसलों में मानवीय समझ की जरूरत बनी रहेगी।

विशेषज्ञों ने बदलती परिस्थितियों के बीच मजबूत बुनियादी समझ, लगातार सीखने की आदत, जिज्ञासा और मानवीय निर्णय क्षमता को महत्वपूर्ण बताया।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में एमबीए-डिजिटल बिजनेस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चेयरपर्सन डॉ. मोल्ला रामिज़ुर रहमान ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

‘ज्ञानोदया 6.0’ के दौरान एआई, नेतृत्व, प्रतिभा प्रबंधन और भविष्य के कार्यक्षेत्र से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए गए। सम्मेलन का मुख्य संदेश यह रहा कि एआई काम करने के तरीके में बदलाव ला सकता है, लेकिन बदलती दुनिया में प्रभावी नेतृत्व और प्रदर्शन के लिए सीखने, मानवीय समझ और परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता भी जरूरी बनी रहेगी।

आईआईएम बोधगया की ओर से सम्मेलन के माध्यम से ऐसे प्रबंधकों को तैयार करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई, जो तकनीकी बदलावों को समझने के साथ भविष्य की कार्यस्थलीय चुनौतियों के लिए भी तैयार हों।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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