पैसे कमाने से ज़्यादा ज़रूरी है पैसे बचाना—अपने नहीं, सरकार के!
यह लेख सरकारी धन को जनता की सामूहिक तिजोरी मानने और सार्वजनिक खर्च पर नागरिकों की सजगता व निगरानी की जरूरत पर सवाल उठाता है। RTI, कर व्यवस्था और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के जरिए लेखक सी. एम. जैन बताते हैं कि जनता को अपने पैसे के इस्तेमाल का हिसाब मांगना क्यों जरूरी है।
