गया में स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय को भावभीनी श्रद्धांजलि, डॉ. विवेकानंद मिश्रा बोले- मानवता की सेवा को समर्पित था उनका जीवन

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गया : गया जिले के स्थानीय डॉक्टर विवेकानंद पथ स्थित गोलबगीचा में दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन की आदरणीय निदेशिका, प्रख्यात समाजसेविका, शिक्षाविद् एवं मानवता की सच्ची साधिका स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय के असामयिक निधन पर भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा, कौटिल्य मंच और भारतीय जन क्रांति दल की ओर से एक गरिमामय शोकसभा का आयोजन किया गया।

शोकसभा में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वरिष्ठ शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, धर्माचार्यों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने हिस्सा लेकर स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

सभा का माहौल बेहद ग़मगीन और भावुक रहा। कार्यक्रम की शुरुआत दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने ईश्वर से उनकी आत्मा की मग़फ़िरत और शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी में सब्र और हिम्मत देने की दुआ की।

शोकसभा की अध्यक्षता करते हुए भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्रा ने कहा कि स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय का असामयिक निधन केवल उनके परिवार या दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि सुनीता जी ने अपना पूरा जीवन समाज सेवा, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण तथा मानवता की निःस्वार्थ सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनका सरल, सहज और स्नेहपूर्ण व्यक्तित्व हर किसी के दिल को छू जाता था।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि किसी भी महान व्यक्तित्व की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए उसके कार्यों से होती है। स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय ने कम समय में ही सेवा और समर्पण का ऐसा उदाहरण पेश किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

आचार्य सच्चिदानंद मिश्र (नैकी) ने कहा कि इंसान का जीवन तभी कामयाब माना जाता है, जब वह दूसरों की भलाई के लिए जिए। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय ने अपने जीवन में सेवा, त्याग, करुणा और संस्कारों को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने कभी अपने सुख की चिंता नहीं की, बल्कि समाज के ग़रीब, पीड़ित और ज़रूरतमंद लोगों की मदद को अपना सबसे बड़ा धर्म माना।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सेवा, दया और परोपकार का संदेश देती है और सुनीता जी ने इन आदर्शों को अपने जीवन में पूरी ईमानदारी के साथ अपनाया। उनका असामयिक निधन सभी के लिए बेहद दुखद है, लेकिन उनके सेवा कार्य समाज को हमेशा राह दिखाते रहेंगे।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गजाधर लाल कटरियार एवं गुलधार लाल पाठक ने कहा कि स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि सेवा, शिक्षा, संस्कार और इंसानियत का जीवंत संदेश था।

कौटिल्य मंच की वरिष्ठ पदाधिकारी शारदा साहिबा और हरिद्वार मिश्रा ने कहा कि समाज का विकास केवल भाषणों से नहीं, बल्कि निःस्वार्थ सेवा और कर्म से होता है। सुनीता जी ने अपने जीवन के हर कार्य से इस बात को साबित किया। उनका जीवन भारतीय संस्कृति, करुणा, संवेदना और कर्तव्यनिष्ठा का अनोखा संगम था।
महासभा एवं मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी राजीव नयन पांडे ने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्व समय के साथ भुलाए नहीं जाते, बल्कि अपने आदर्शों और कार्यों के कारण हमेशा लोगों के दिलों में ज़िंदा रहते हैं।

आचार्य महेश मिश्रा, अशोक सिंह, आचार्य अभय जी और सुनील पाठक ने कहा कि स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय के सेवा कार्य आने वाली पीढ़ियों को मानवता और समाज सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे। उनका निधन समाज के लिए एक गहरी क्षति है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

महासभा के संरक्षक आचार्य वल्लभ जी महाराज ने कहा कि स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय का जीवन निःस्वार्थ सेवा का पर्याय था। शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक उत्थान और मानव कल्याण के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

मगध विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बी. एन. पांडे ने कहा कि उनका व्यक्तित्व बेहद विनम्र, संवेदनशील और प्रेरणादायक था। वह समाज के हर वर्ग के लोगों के सुख-दुख में बराबर की सहभागी बनती थीं और हर ज़रूरतमंद की मदद को अपना नैतिक दायित्व समझती थीं।

प्रसिद्ध समाजसेवी एवं व्यवसायी श्रीचरण बाबू डालमिया ने कहा कि स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय जैसी हस्तियां अपने पीछे सेवा, समर्पण और सद्भावना की ऐसी विरासत छोड़ जाती हैं, जो कभी समाप्त नहीं होती। वरिष्ठ अधिवक्ता मुहम्मद याहिया ने कहा कि यदि समाज उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले, तो वही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

पंडित बालमुकुंद मिश्रा और आचार्य अरुण मिश्रा ‘मधुप’ ने कहा कि मृत्यु जीवन का शाश्वत सत्य है, लेकिन कुछ लोग अपने श्रेष्ठ कर्मों के कारण हमेशा अमर हो जाते हैं। स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय उन्हीं महान आत्माओं में से एक थीं।

प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. मृदुल मिश्रा और प्रोफेसर डॉ. गीता ने कहा कि सुनीता पाण्डेय ने अपने जीवन में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, सेवा, करुणा और मानवीय संवेदनाओं को सर्वोच्च स्थान दिया। उनका जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि समाज के एक उज्ज्वल अध्याय का अंत है।

समाजसेवी हरि नारायण त्रिपाठी, डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज और डिंपल कुमारी ने कहा कि उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा लोगों को प्रेरित करते रहेंगे और समाज उन्हें लंबे समय तक श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करता रहेगा।

सभा में डॉ. जितेंद्र कुमार मिश्रा, अशोक सिंह, अनिल कुमार, संजय सुमन, देवी रंजना पांडे, रूबी देवी, विश्वजीत चक्रवर्ती, पुष्पा गुप्ता, पुष्पा राज, अरुण ओझा, अखिलेश पांडे, नुसरत परवीन, गणेश मिश्रा, सत्येंद्र दुबे, फूल कुमारी, रंजीत पाठक, डॉ. सुरेंद्र विश्वकर्मा, डॉ. अकेला, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. प्रेमा प्रसाद, पवन मिश्रा, सुनील कुमार, दिलीप कुमार सिंह, शिवजी सिंह, नीलम कुमारी, राम केवल सिंह, गौरव कुमार सिंह, राजकिशोर सिंह, दीपक पाठक, मनीष कुमार, मुन्ना जी, उत्तम पाठक, पुष्पलता चौबे, नीरज वर्मा, शंभू गिरी, अभिषेक बनर्जी, कविता, अशोक दुबे, जितेंद्र मिश्रा, शोभा देवी, मुन्नी देवी, रमाशंकर मिश्रा, चंद्रभूषण मिश्रा, सुनीता देवी, पुष्पा, ममता देवी, ताज परवीन, बबलू गोस्वामी, सुरेश पासवान, रवि कुमार दास, अजय प्रियांशु, जावेद राजा, शमी अहमद, नुसरत प्रवीण और तस्लीम नाज समेत कई लोगों ने स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार रखते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय का जीवन समाज सेवा, शिक्षा, संस्कार, महिला उत्थान और मानवता के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण था। उन्होंने अपने जीवन से साबित कर दिया कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उनके आदर्शों और मूल्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

शोकसभा के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। साथ ही यह संकल्प भी लिया गया कि स्वर्गीय सुनीता पाण्डेय द्वारा समाज सेवा, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण और मानवता के क्षेत्र में किए गए कार्यों को सदैव याद रखा जाएगा तथा उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए समाजहित के कार्य लगातार आगे बढ़ाए जाएंगे। सभा का समापन गहरी संवेदना, श्रद्धा और मौन श्रद्धांजलि के साथ हुआ।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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