गया जी, बिहार | 29 अगस्त 2026 — राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की कर्नाटक प्रदेश समिति की ओर से सावन और हरियाली को समर्पित मासिक काव्यगोष्ठी ‘मनभावन सावन’ का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में देश के अलग-अलग प्रदेशों से जुड़े रचनाकारों ने सावन, बारिश, बादल, प्रकृति, हरियाली, झूला और रक्षाबंधन जैसे विषयों पर अपनी रचनाएँ पेश कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत शब्दवीणा की कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनीता सैनी गुड्डी की सुमधुर सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने शब्दवीणा गीत प्रस्तुत किया। काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता शब्दवीणा कर्नाटक प्रदेश के उपाध्यक्ष विजयेंद्र सैनी ने की।
काव्यपाठ के दौरान अरुण अपेक्षित, दीपक कुमार, अनिल कुमार, जैनेंद्र कुमार मालवीय, रमेश चंद्र, अजय कुमार, सरोज कुमार, निगम राज, विनीता लावणिया, डॉ. सुनीता सैनी, डॉ. विजयेंद्र सैनी और डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी सहित कई रचनाकारों ने अपनी रचनाएँ सुनाईं। गीत, ग़ज़ल, दोहे और मुक्तकों के जरिए रचनाकारों ने सावन की खूबसूरती के साथ-साथ रिश्तों और सामाजिक सरोकारों को भी शब्द दिए।
सरोज कुमार की रचना “बागों में कूके काली-काली कोयलिया जी” ने सावन की प्राकृतिक छटा को सामने रखा। वहीं निगम राज ने रक्षाबंधन और भाई-बहन के रिश्ते को अपनी रचना के माध्यम से भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।
दीपक कुमार की रचना “तुम नदिया बन आन मिलो प्रिय, मैं सागर बन भुज फैलाए” को भी खूब सराहना मिली। रमेश चंद्र की पंक्तियों “तोड़ जंजीरें दीवारों की, अब तो जरा हुंकार भरो। पतवारों की आदत छोड़ो, तैर के दरिया पार करो” ने श्रोताओं में जोश भर दिया। वहीं अनिल कुमार की रचना “सकल सृष्टि के दाता शंकर” को भी श्रोताओं ने पसंद किया।
अरुण अपेक्षित, अजय कुमार, जैनेंद्र कुमार मालवीय, डॉ. सुनीता सैनी और विनीता लावणिया की प्रस्तुतियों पर भी खूब तालियाँ बजीं। डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी के सावन गीत “सुनो सहेली सावन आया, मनमोहक मनभावन आया” ने पूरे माहौल को सावन की भावनाओं से भर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विजयेंद्र सैनी ने प्रस्तुत की गई रचनाओं की सारगर्भित समीक्षा की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनीता सैनी ने किया।
काव्यगोष्ठी का सीधा प्रसारण शब्दवीणा के केंद्रीय पेज के माध्यम से भी किया गया। ऑनलाइन प्रसारण के जरिए पुरुषोत्तम तिवारी, महावीर सिंह वीर, सुरेश विद्यार्थी, प्यारचंद कुमार मोहन, बबन बदिया, सुनील कुमार उपाध्याय, डॉ. विजय शंकर, अनुराग सैनी मुकुंद, डॉ. रवि प्रकाश, ललित शंकर, पंकज मिश्र, रजनी गुप्ता, सुषमा सिंह, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, कुमार मनीष, श्रवण सहस्त्रांशु और संतोष कुमार जयंत समेत बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने कार्यक्रम का आनंद लिया।
साहित्य प्रेमियों ने अपनी प्रतिक्रियाओं और टिप्पणियों के जरिए रचनाकारों का उत्साह बढ़ाया। अंत में शांति पाठ के साथ ‘मनभावन सावन’ काव्यगोष्ठी का समापन हुआ।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
