तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय (सी जोज़ेफ विजय) की अगुवाई वाली टीवीके सरकार ने अगस्त 2026 में विधानसभा में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ए.एम. शाहजहां द्वारा एक बड़ा पैकेज घोषित किया था, जिसमें मुस्लिम महिला छात्राओं के लिए अंडरग्रेजुएट ट्यूशन फीस पूरी तरह सरकार द्वारा उठाने का ऐलान शामिल था। ये घोषणा 27–28 अगस्त 2026 के आसपास हुई और द हिंदू, इंडिया टुडे, न्यू इंडियन एक्सप्रेस, मध्यमम जैसे भरोसेमंद मीडिया आउटलेट्स ने इसे कवर किया।
योजना का पूरा विवरण: कौन, क्या, कितना?
किन छात्राओं को फायदा?
मुस्लिम महिला छात्राएँ जो सरकारी कोटे (government quota) के तहत अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेती हैं।
ये सुविधा सरकारी कॉलेज, सरकारी सहायता प्राप्त (aided) कॉलेज और सेल्फ-फाइनेंसिंग संस्थानों—तीनों तरह के कॉलेजों में लागू होगी।
किन कोर्सेज को कवर किया गया?
आर्ट्स, साइंस, इंजीनियरिंग, मेडिसिन, एग्रीकल्चर और लॉ—यानी कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि और कानून की पढ़ाई।
बजट और शुरुआती आवंटन
इस योजना के लिए पहले साल ₹20 करोड़ का आवंटन किया गया है।
स्कूल स्तर पर भी बड़ी राहत: स्कॉलरशिप का विस्तार
सरकार ने सिर्फ कॉलेज ही नहीं, स्कूल स्तर पर भी मुस्लिम लड़कियों के लिए स्कॉलरशिप बढ़ाई है।
पहले तमिलनाडु वक़्फ बोर्ड की स्कॉलरशिप कक्षा 1 से 8 तक की मुस्लिम छात्राओं को मिलती थी (₹1,000 प्रति वर्ष)।
अब इसे कक्षा 9 और 10 तक बढ़ा दिया गया है, और इन कक्षाओं में पढ़ने वाली छात्राओं को ₹2,000 प्रति वर्ष की सहायता मिलेगी।
इस विस्तार से लगभग 41,384 छात्राएँ फायदा उठाएंगी, और इसके लिए ₹8.28 करोड़ का बजट रखा गया है।
चेन्नई में नया महिला कॉलेज: अल्पसंख्यक लड़कियों के लिए समर्पित संस्थान
उच्च शिक्षा में अल्पसंख्यक महिलाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए तमिलनाडु वक़्फ बोर्ड के ज़रिए चेन्नई में एक नया ‘माइनॉरिटीज़ वीमेंस आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज’ खोला जाएगा।
इस कॉलेज के लिए शुरुआती ग्रांट ₹2.45 करोड़ दिया गया है।
ये कदम खास तौर पर उन लड़कियों के लिए है जो धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों से आती हैं और उच्च शिक्षा जारी रखना चाहती हैं।
समुदायिक संपत्तियों के लिए ब्याज-मुक्त फंड: आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा
सिर्फ शिक्षा ही नहीं, सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों की आर्थिक मज़बूती के लिए भी बड़ा कदम उठाया है।
₹100 करोड़ का एक रिवॉल्विंग फंड बनाया गया है, जो मुस्लिम वक़्फ और ईसाई धार्मिक संस्थानों की ज़मीन पर आय-सृजन करने वाली संपत्तियाँ (जैसे कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, मैरिज हॉल) बनाने के लिए ब्याज-मुक्त लोन देगा।
मकसद साफ़ है: समुदायिक संस्थान अपनी ज़मीन का बेहतर इस्तेमाल करके लगातार आमदनी पैदा करें और आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनें।
युवाओं के लिए स्किल ट्रेनिंग: रोज़गार की नई राहें
तमिलनाडु स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के ज़रिए अल्पसंख्यक युवाओं के लिए आधुनिक, बाज़ार-अनुकूल स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी।
चार साल में कुल 10,000 युवाओं को ट्रेनिंग मिलेगी (हर साल 2,500)।
ट्रेनिंग मॉड्यूल्स में शामिल हैं: आईटी, ऑटोमोबाइल, अपैरल डिज़ाइनिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, एम्ब्रॉयडरी और एग्रीकल्चर।
ये ट्रेनिंग सभी ज़िलों में दी जाएगी, ताकि युवा या तो नौकरी पा सकें या खुद का छोटा-मोटा काम शुरू कर सकें।
ये घोषणाएँ कब और कैसे हुईं?
ये सभी घोषणाएँ अगस्त 2026 में तमिलनाडु विधानसभा में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के ‘डिमांड फॉर ग्रांट्स’ पर बहस के दौरान मंत्री ए.एम. शाहजहां ने कीं।
तारीख़ें: 27–28 अगस्त 2026 के आसपास की खबरें मीडिया में आईं।
ये पैकेज थलपति विजय की टीवीके सरकार का पहला बजट/वित्तीय योजना दौर है, जिसमें अल्पसंख्यक कल्याण पर खास ज़ोर दिया गया।
क्यों मायने रखता है ये कदम?
शिक्षा के ज़रिए सामाजिक न्याय: मुस्लिम लड़कियों की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ाना एक बड़ा सामाजिक निवेश है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता: ब्याज-मुक्त फंड और स्किल ट्रेनिंग से समुदायिक संस्थान और युवा दोनों आर्थिक तौर पर मज़बूत होंगे।
दीर्घकालिक असर: जब लड़कियाँ पढ़ेंगी, तो पूरे परिवार और समुदाय के जीवन स्तर में सुधार होगा—ये तथ्य कई शोधों में साबित हो चुका है।
एक ठोस, ज़मीनी कदम
तमिलनाडु की विजय सरकार का ये पैकेज सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि एक ठोस रोडमैप है—जिसमें शिक्षा, स्कॉलरशिप, इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय सहायता और स्किल डेवलपमेंट सब शामिल है। शुरुआती ₹20 करोड़ का आवंटन, ₹100 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड, और 10,000 युवाओं की ट्रेनिंग—ये सब मिलकर एक व्यापक तस्वीर पेश करते हैं।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
