औरंगाबाद, बिहार, 8 सितंबर 2026: राष्ट्रीय लोक अदालत को कामयाब और ज्यादा असरदार बनाने के लिए औरंगाबाद में तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। आगामी 12 सितंबर 2026 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने मंगलवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में मीडिया के साथ संवाद किया।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों, चिह्नित मामलों, पक्षकारों को भेजे गए नोटिस, गठित की जाने वाली पीठों और आम लोगों के बीच चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की जानकारी साझा की।
3,200 लंबित मामलों को किया गया चिह्नित
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि न्यायालयों में लंबित करीब 3,200 मामलों की पहचान राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए की गई है। संबंधित पक्षकारों को इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर देने के लिए 6,000 से अधिक नोटिस जारी किए गए हैं।
चिह्नित लंबित मामलों में से लगभग 500 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए न्यायिक पदाधिकारियों और संबंधित पक्षों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मामलों को समझौते के आधार पर निपटाया जा सके।
प्री-लिटिगेशन मामलों पर भी रहेगा जोर
राष्ट्रीय लोक अदालत में सिर्फ अदालतों में चल रहे मुकदमों पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि ऐसे विवादों को भी समाधान का मौका दिया जा रहा है जो अभी अदालत तक नहीं पहुंचे हैं।
इस श्रेणी में करीब 5,000 प्री-लिटिगेशन मामलों को चिह्नित किया गया है। संबंधित पक्षकारों को जानकारी देने और आपसी समझौते के जरिए विवाद सुलझाने का अवसर देने के लिए लगभग 4,970 नोटिस जारी किए गए हैं।
इन मामलों में से करीब 1,500 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य तय किया गया है। संबंधित विभागों, संस्थानों और अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर इनके निस्तारण की कोशिश की जा रही है।
ट्रैफिक चालान के लिए बनेगी विशेष पीठ
राष्ट्रीय लोक अदालत में यातायात चालान से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष पीठ का गठन किया गया है। इसका मकसद ऐसे मामलों के पक्षकारों को सरल और जल्द समाधान की सुविधा देना है।
लोक अदालत में समझौते के जरिए मामले का निस्तारण होने से पक्षकारों को लंबी अदालती प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, हर मामले का निस्तारण उसकी कानूनी प्रकृति और लागू नियमों के मुताबिक ही किया जाएगा।
तैयारियों को लेकर लगातार हो रही बैठकें
राजीव रंजन कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर अलग-अलग स्तर पर संबंधित अधिकारियों और हितधारकों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं।
इन बैठकों में समझौते की संभावना वाले मामलों की पहचान, पक्षकारों तक समय पर नोटिस पहुंचाने, संबंधित विभागों के साथ तालमेल और लोक अदालत के दिन मामलों की सुनवाई को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने जैसे मुद्दों पर जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन को प्रभावी बनाने के लिए न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ संबंधित सरकारी विभागों, बैंकिंग संस्थानों और अन्य पक्षों का सहयोग भी जरूरी है।
जागरूकता के लिए सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक उद्घोषणा तक
राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया के साथ-साथ दूसरे संचार माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
आम नागरिकों तक सीधे जानकारी पहुंचाने के लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का भी सहारा लिया जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार और न्यायिक प्रशासन की कोशिश है कि संबंधित पक्षकारों को समय रहते लोक अदालत की प्रक्रिया और इसके फायदे की जानकारी मिल सके।
त्वरित और सुलभ न्याय का जरिया है लोक अदालत
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने कहा कि लोक अदालत विवादों को आपसी सहमति और समझौते के जरिए सुलझाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इससे पक्षकारों के समय और खर्च में कमी आ सकती है और अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी घटाने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत का मकसद केवल लंबित मामलों की संख्या कम करना नहीं है, बल्कि पक्षकारों के बीच विवाद का सौहार्दपूर्ण और स्वीकार्य समाधान तलाशना भी है।
उन्होंने संबंधित पक्षकारों से अपील की कि वे 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में शामिल होकर आपसी सहमति से अपने मामलों का समाधान कराने का अवसर हासिल करें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार भी कर रहा लगातार प्रयास
प्रेस वार्ता के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की सचिव तान्या पटेल भी मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत की कामयाबी के लिए प्राधिकार की ओर से लगातार जरूरी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को लोक अदालत की प्रक्रिया और इससे मिलने वाले लाभ की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। संबंधित पक्षकारों तक नोटिस पहुंचाने के साथ उन्हें लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने विवादों का समाधान कराने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
तान्या पटेल ने बताया कि विभिन्न विभागों और संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाया जा रहा है, ताकि समझौते योग्य मामलों का जल्द और शांतिपूर्ण तरीके से निस्तारण किया जा सके।
मीडिया से भी सहयोग की अपील
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने मीडिया प्रतिनिधियों से राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार-प्रसार में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि मीडिया के जरिए जिले के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाई जा सकती है और इससे पात्र पक्षकार इस अवसर का फायदा उठा सकेंगे।
उन्होंने आम नागरिकों और संबंधित पक्षकारों से 12 सितंबर 2026 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि आपसी सहमति से विवादों का समाधान न सिर्फ पक्षकारों को जल्द राहत दिला सकता है, बल्कि समाज में आपसी भरोसे और सौहार्द को मजबूत करने में भी मददगार हो सकता है।
राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर औरंगाबाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार और न्यायिक प्रशासन की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन मामलों के निस्तारण के लिए भी संबंधित विभागों और अधिकारियों के बीच समन्वित प्रयास जारी हैं।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
