गया, 8 सितंबर 2026: बिहार के गया में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले को अंतरराष्ट्रीय मेला का दर्जा देने की मांग एक बार फिर उठी है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन तथा गया नगर निगम से मेले की तैयारियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करने और तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि गया जी धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में विशेष पहचान रखता है। पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों की मोक्ष कामना के लिए यहां पहुंचते हैं और पिंडदान व श्राद्ध कर्म करते हैं।
विजय कुमार मिट्ठू के मुताबिक, वर्षों से पितृपक्ष मेले को अंतरराष्ट्रीय मेले का दर्जा देने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इसे राज्य स्तरीय मेले तक सीमित रखना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस पहल करने की मांग की।
54 वेदियों को विकसित करने की मांग
कांग्रेस नेता ने गया में मौजूद सभी 54 वेदियों को बेहतर तरीके से विकसित करने और वहां श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। ऐसे में परिवहन, आवास, साफ-सफाई, पेयजल और सुरक्षा समेत तमाम व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
उन्होंने गया को रेल, सड़क और हवाई मार्ग से बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया।
तीर्थयात्री भवन का काम पूरा नहीं होने पर सवाल
विजय कुमार मिट्ठू ने गया संक्रमण अस्पताल परिसर में 265 कमरों वाले तीर्थयात्री भवन के निर्माण में देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए आवास की पर्याप्त व्यवस्था बेहद जरूरी है।
उन्होंने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से तीर्थयात्रियों के लिए जल्द समुचित इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि पितृपक्ष मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कांग्रेस की ओर से कहा गया कि गया जी की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए पितृपक्ष मेले को केवल एक राज्य स्तरीय आयोजन के तौर पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आयोजन के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
