फरक्का जल संधि को लेकर औरंगाबाद में JDU की प्रेस कॉन्फ्रेंस

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औरंगाबाद, बिहार। रफीगंज विधानसभा क्षेत्र संख्या-224 के जदयू विधायक और समाजसेवी प्रमोद कुमार सिंह के आवास पर शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को फरक्का जल संधि को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। कार्यक्रम में जनता दल यूनाइटेड के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह उर्फ गुड्डू सिंह, जिला प्रवक्ता रवि कुमार सिंह और बारुण प्रखंड अध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह मौजूद रहे।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जदयू जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पार्टी का यह अभियान बिहार के हित और उसके जल संसाधनों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि का दोबारा नवीनीकरण बिहार के हित में नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि जदयू ने इस मुद्दे को लेकर जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा तथा बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने 4 सितंबर 2026 को बक्सर से इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में लोगों को इस मुद्दे की जानकारी देने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

बिहार को हो रहा है नुकसान

धर्मेंद्र कुमार सिंह ने दावा किया कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार को लंबे समय से नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनके मुताबिक गंगा में बढ़ती गाद की समस्या, बाढ़ और सुखाड़ की स्थिति को इस पूरे मामले से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

उन्होंने कहा कि बिहार के पास पर्याप्त जल संसाधन होने के बावजूद राज्य पानी का प्रभावी संचय नहीं कर पाता। दूसरी ओर, कई इलाकों में बाढ़ के बाद पानी की कमी और सुखाड़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। जदयू जिलाध्यक्ष ने फरक्का समझौते को बिहार के लिए नुकसानदेह बताते हुए कहा कि राज्य को अपने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर जल संसाधनों पर फैसला लेने का अधिकार मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पेयजल, सिंचाई और उद्योगों के लिए आने वाले वर्षों में बिहार की पानी की जरूरत काफी बढ़ने वाली है। इसलिए किसी भी नए समझौते में राज्य की मौजूदा और भविष्य की जरूरतों को प्रमुखता दी जानी चाहिए।

औरंगाबाद की जल समस्या पर भी उठा सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान औरंगाबाद में पेयजल संकट का मुद्दा भी सामने आया। इस दौरान संवाददाता ने जदयू जिलाध्यक्ष से कहा कि जिले में पानी की समस्या कोई भविष्य की आशंका नहीं, बल्कि कई वर्षों से चली आ रही गंभीर समस्या है और इस मुद्दे पर पहले भी प्रमुखता से खबरें प्रकाशित होती रही हैं।

संवाददाता की ओर से यह भी कहा गया कि औरंगाबाद में जल संकट के पीछे स्थानीय स्तर पर पानी के अत्यधिक दोहन के साथ श्री सीमेंट प्लांट और बिना पंजीकरण चल रहे कुछ आरओ प्लांटों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं।

हालांकि, जदयू जिलाध्यक्ष ने स्थानीय जल संकट पर विस्तार से प्रतिक्रिया देने के बजाय फरक्का जल संधि के मुद्दे पर ही अपनी बात केंद्रित रखी। उन्होंने कहा कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में भी पेयजल की परेशानी बढ़ रही है और इसी वजह से फरक्का जल संधि के नवीनीकरण को लेकर बिहार के हितों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार से नवीनीकरण रोकने की मांग

धर्मेंद्र कुमार सिंह ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि बिहार के हित, सम्मान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फरक्का जल संधि का नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर किसी परिस्थिति में समझौते को आगे बढ़ाना जरूरी हो, तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। इसमें पेयजल, सिंचाई और उद्योग-धंधों के लिए आवश्यक पानी की उपलब्धता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से इस मामले में बिहार के हितों को ध्यान में रखने की अपील की। साथ ही कहा कि 1996 में जब यह समझौता हुआ था, उस समय बिहार की भविष्य की जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका आरोप था कि इसका खामियाजा आज राज्य को भुगतना पड़ रहा है।

बाढ़ और सुखाड़ को बताया पूरे बिहार की समस्या

जदयू जिलाध्यक्ष ने कहा कि बिहार में बाढ़ का असर केवल बाढ़ प्रभावित जिलों तक सीमित नहीं रहता। बाढ़ की स्थिति में राज्य के संसाधनों का बड़ा हिस्सा राहत और बचाव कार्यों में खर्च होता है। उनका कहना था कि इससे पूरे बिहार की अर्थव्यवस्था और विकास प्रभावित होता है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ राज्य बाढ़ से जूझता है, तो दूसरी तरफ कई क्षेत्रों में पानी की कमी और सुखाड़ की स्थिति भी पैदा होती है। ऐसे में जल संसाधनों को लेकर दीर्घकालिक नीति बनाना जरूरी है।

धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बिहार को आने वाले दशकों में विकसित राज्य बनाने के लिए पानी की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने वर्ष 2040 और उसके बाद की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए रोडमैप की जरूरत पर भी जोर दिया।

यह राजनीतिक नहीं, जन सरोकार का मुद्दा

जदयू जिलाध्यक्ष ने कहा कि फरक्का जल संधि का मुद्दा किसी चुनावी राजनीति से जुड़ा हुआ नहीं है। उनके मुताबिक फिलहाल चुनाव नहीं है और पार्टी आम लोगों के हित से जुड़े विषय को उठा रही है।

उन्होंने बिहार के लोगों से इस जन-जागरूकता अभियान में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि राज्य के जल संसाधनों और भविष्य की जरूरतों को लेकर लोगों को अपनी आवाज मजबूती से उठानी चाहिए।

विपक्ष के सवाल पर जवाब देने से किया इनकार

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संवाददाता आलोक कुमार ने बिहार में बाढ़ से प्रभावित बड़ी आबादी और विपक्ष की ओर से राहत कार्यों को लेकर सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों का सवाल भी उठाया। इस पर जदयू जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रेस वार्ता का विषय फरक्का जल संधि है, इसलिए सवाल इसी मुद्दे तक सीमित रखा जाए।

इसके बाद उनसे सवाल किया गया कि जब जदयू नेता नीतीश कुमार लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं और केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को भी काफी समय हो चुका है, तो अब तक समाधान क्यों नहीं हुआ। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या मौजूदा समय में यह मुद्दा राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।

धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि 1996 में हुई संधि 30 वर्षों के लिए थी और अब उसके समाप्त होने का समय आ गया है। उनके मुताबिक यही वजह है कि मौजूदा समय में बिहार के हितों को लेकर आवाज उठाना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

पहले बिहार की आवाज मजबूत करें

जब उनसे पूछा गया कि अगर केंद्र सरकार ने फरक्का जल संधि को लेकर जदयू की मांग नहीं मानी तो क्या पार्टी सरकार से अलग होने पर विचार करेगी, तो उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि अभी से किसी नतीजे पर पहुंचना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि पहले बिहार की मांग को मजबूती से केंद्र के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विदेश मंत्री की ओर से पत्र भेजकर आश्वासन दिया गया है।

धर्मेंद्र कुमार सिंह ने यह भी कहा कि जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने संसद के मॉनसून सत्र में फरक्का बांध और जल संधि से जुड़े विषय को विस्तार से उठाया है। उन्होंने गंगा में बढ़ती गाद की समस्या का भी सदन में उल्लेख किए जाने की बात कही।

जदयू जिलाध्यक्ष ने अंत में कहा कि बिहार के जल संसाधनों से जुड़े इस मुद्दे पर अब व्यापक जन-जागरूकता की जरूरत है, ताकि राज्य की मौजूदा और आने वाली पीढ़ियों की पानी संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर कोई फैसला लिया जा सके।

रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.

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