कुर्था, अरवल, बिहार, 11 सितंबर 2026। जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे को लेकर राष्ट्रीय क्षत्रिय महासभा के अरवल जिला अध्यक्ष रणजीत सिंह ने प्रभारी मंत्री और बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री के दौरे पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात के दौरान जातीय पक्षपात नजर आया और प्रभारी मंत्री ने मुख्य रूप से अपने समाज के लोगों से ही मुलाकात की।
रणजीत सिंह ने कहा कि हाल के दिनों में पुनपुन समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण कुर्था प्रखंड के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ी, जबकि कुछ लोगों की जान भी चली गई।
उन्होंने कहा कि ऐसी मुश्किल घड़ी में जनप्रतिनिधियों और प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी होती है कि वे प्रभावित इलाकों में पहुंचें, पीड़ित परिवारों का हाल जानें और उनकी समस्याओं को समझें। उनके मुताबिक राहत और संवेदना का आधार जाति या राजनीतिक दल नहीं होना चाहिए।
सभी बाढ़ प्रभावित परिवारों तक पहुंचने की मांग
रणजीत सिंह का कहना है कि प्रभारी मंत्री को किसी एक जाति या समुदाय तक सीमित रहने के बजाय सभी बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच जाना चाहिए था। उन्होंने विशेष रूप से उन परिवारों का जिक्र किया, जिन्होंने बाढ़ के दौरान अपने परिजनों को खोया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों के घर पहुंचकर उन्हें सांत्वना देना केवल एक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का भी हिस्सा है। उनके अनुसार कई प्रभावित परिवारों से मुलाकात नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
जाति और दल से ऊपर उठकर राहत की मांग
राष्ट्रीय क्षत्रिय महासभा के जिला अध्यक्ष ने राज्य सरकार से मांग की कि बाढ़ पीड़ितों को जाति और राजनीतिक दल के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी जरूरत के आधार पर राहत और सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने प्रशासन से सभी प्रभावित गांवों का निष्पक्ष तरीके से जायजा लेने और जिन परिवारों को नुकसान हुआ है, उन तक सरकारी मदद पहुंचाने की अपील की। रणजीत सिंह ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय हर प्रभावित व्यक्ति के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और राहत व्यवस्था में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
