बिहार, 11 सितंबर 2026। गया जिले में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ मसाला फसलों की ओर बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को मां तारा नगरी केसपा स्थित पंचायत भवन में किसान जागरूकता अभियान सह किसान कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम का आयोजन बिहार सरकार के उद्यान विभाग और प्रगतिशील एग्री फेड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता प्रखंड उद्यान पदाधिकारी शुभम कुमारी ने की, जबकि संचालन एग्री फेड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के मनीष कुमार ने किया।
कार्यशाला में किसानों को संबोधित करते हुए शुभम कुमारी ने कहा कि सरकार किसानों को मसाला फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसका मकसद खेती में विविधता लाने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते तैयार करना है।
उन्होंने बताया कि गया जिले में फिलहाल किसानों को धनिया की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत एक एकड़ भूमि पर खेती करने वाले किसानों को कुल आठ हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। इसमें दो हजार रुपये के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि छह हजार रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
प्रखंड उद्यान पदाधिकारी ने धनिया को नगदी फसल बताते हुए किसानों से सरकारी योजना का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई फसलों को अपनाकर किसान अपनी खेती को ज्यादा लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
एग्री फेड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के मनीष कुमार ने बताया कि लाव पंचायत के किसानों ने इस योजना का लाभ लेने में रुचि दिखाई है। कई किसानों ने धनिया की खेती के लिए अपना पंजीकरण भी कराया है।
हालांकि, कार्यशाला के दौरान किसानों ने योजना को लेकर अपनी कुछ चिंताएं भी सामने रखीं। ग्रामीण हिमांशु शेखर ने कहा कि पहले कई मौकों पर किसानों को निम्न गुणवत्ता के बीज मिलने से सरकारी योजनाओं के प्रति उनका भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने सुझाव दिया कि शुरुआत में छोटे स्तर पर धनिया की खेती को बढ़ावा दिया जाए, ताकि किसान कम जोखिम के साथ योजना को समझ और उसका अनुभव हासिल कर सकें।
हिमांशु शेखर ने यह भी कहा कि एक साथ 25 एकड़ भूमि में धनिया की खेती का लक्ष्य छोटे किसानों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। उनके मुताबिक छोटे किसानों की क्षमता और संसाधनों को ध्यान में रखकर योजना को आगे बढ़ाना अधिक व्यावहारिक होगा।
ग्रामीण राजीव शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पहले पपीते की खेती की थी, लेकिन फसल खराब होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि नई फसलों की खेती में किसानों को उचित मार्गदर्शन और भरोसेमंद सहायता मिलना जरूरी है।
वहीं किसान रविंद्र शर्मा ने कहा कि किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बदलते समय के साथ उन्हें नई और लाभकारी फसलों की ओर भी कदम बढ़ाना चाहिए।
श्याम कृष्णा उर्फ रिंटू ने कहा कि इलाके के ज्यादातर किसानों के पास सीमित जमीन है। ऐसे में अगर सरकार छोटे किसानों को आर्थिक सहायता के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराए, तो वे कम भूमि पर भी धनिया की खेती शुरू करने के लिए तैयार हैं।
कार्यशाला के दौरान किसानों को धनिया की खेती की प्रक्रिया, सरकारी सहायता, योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी पंजीकरण और इससे जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी दी गई। किसानों ने भी खेती से जुड़ी अपनी समस्याएं और सुझाव अधिकारियों के सामने रखे।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
