प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत नगर भवन में आयोजित हुआ कार्यक्रम
बिहार के औरंगाबाद जिले में शनिवार, 18 जुलाई 2026 को स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में समाहरणालय स्थित नगर भवन में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत न्यूट्रीशन किट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत सिविल सर्जन द्वारा जिला पदाधिकारी को पौधा भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। इसके बाद मंच पर मौजूद अन्य अतिथियों का भी पौधा देकर स्वागत किया गया।
टीबी अब पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी: सिविल सर्जन
अपने संबोधन में सिविल सर्जन ने कहा कि यह कार्यक्रम जिला पदाधिकारी के विशेष प्रयास और लगातार मॉनिटरिंग का परिणाम है। उन्होंने बताया कि टीबी, जिसे पहले क्षय रोग कहा जाता था, कभी लाइलाज मानी जाती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है।
उन्होंने कहा कि समय पर जांच, छह महीने तक नियमित दवा और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निभा रही हैं अहम भूमिका
सिविल सर्जन ने बताया कि आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविकाएं संभावित मरीजों की पहचान कर उनकी जांच करवाती हैं। टीबी की पुष्टि होते ही मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई मरीज इलाज के दौरान किसी दूसरे स्थान पर चला जाए, तब भी उसे दवा नियमित रूप से लेनी चाहिए, क्योंकि यह दवा देश के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध है।
उन्होंने टीबी के लक्षण, बचाव, पौष्टिक भोजन और नियमित दवा लेने के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी तथा मरीजों से बीच में इलाज नहीं छोड़ने की अपील की।
केवल दवा नहीं, पोषण और सामाजिक सहयोग भी जरूरी: डीएम
जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता, संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी का अभियान है।
उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य सिर्फ दवा से पूरा नहीं होगा। इसके लिए मरीजों को पर्याप्त पोषण, सामाजिक सहयोग और लगातार प्रोत्साहन भी जरूरी है।
इसी उद्देश्य से निक्षय मित्रों और विभिन्न संस्थानों के सहयोग से टीबी मरीजों को हर महीने न्यूट्रीशन किट उपलब्ध कराई जा रही है।
एक महीने में 15 हजार से बढ़कर 2.90 लाख पहुंची स्क्रीनिंग
जिला पदाधिकारी ने बताया कि जब अभियान की समीक्षा शुरू की गई थी, तब जिले में टीबी स्क्रीनिंग की संख्या करीब 15 हजार थी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम, सभी प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारियों, चिकित्सकों, जिला स्तरीय अधिकारियों, सिविल सर्जन, डीपीएम स्वास्थ्य और अन्य अधिकारियों के समन्वित प्रयासों से मात्र एक महीने में स्क्रीनिंग बढ़कर लगभग 2 लाख 90 हजार तक पहुंच गई।
इस उपलब्धि के कारण औरंगाबाद राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल हुआ और इसकी सराहना राज्य स्तर पर भी की गई।
जल्द मिलेंगे हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरण
डीएम ने बताया कि अधिक से अधिक स्क्रीनिंग के जरिए संभावित मरीजों की पहचान कर समय पर एक्स-रे और इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्क्रीनिंग के साथ लगभग 15 से 17 प्रतिशत मरीजों का एक्स-रे कराया जा रहा है। जल्द ही जिले को हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनकी मदद से अस्पताल के बाहर भी कैंप लगाकर दूर-दराज के इलाकों में जांच की जा सकेगी।
1,951 मरीज हुए नोटिफाई, छह महीने तक मिलेगा पोषण किट
जिला पदाधिकारी ने बताया कि जिले में अब तक 1,951 टीबी मरीजों को नोटिफाई किया जा चुका है। स्क्रीनिंग अभियान जारी रहने के कारण यह संख्या आगे भी बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य लगभग 2,000 मरीजों को लगातार छह महीने तक हर महीने न्यूट्रीशन किट उपलब्ध कराना है।
न्यूट्रीशन किट में शामिल हैं प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री
डीएम ने बताया कि विशेषज्ञों की सलाह के बाद न्यूट्रीशन किट की सामग्री में बदलाव किया गया है, ताकि मरीजों को अधिक प्रोटीन और ऊर्जा मिल सके।
किट में चना दाल, सोया चंक्स, मूंगफली, मिल्क पाउडर, आटा सहित अन्य उच्च प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री शामिल की गई है।
निक्षय मित्र योजना के तहत मिलेगा लगातार सहयोग
उन्होंने बताया कि निक्षय मित्र पहल के तहत सीएसआर और विभिन्न संस्थानों के सहयोग से टीबी मरीजों को गोद लेने की व्यवस्था की गई है।
इलाज की पूरी अवधि यानी छह महीने तक हर मरीज को प्रत्येक महीने न्यूट्रीशन किट उपलब्ध कराई जाएगी।
आज आयोजित कार्यक्रम में 300 मरीजों को न्यूट्रीशन किट दी गई, जबकि बाकी मरीजों को प्रखंड स्तर पर आयोजित शिविरों के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से किट वितरित की जाएगी, ताकि भीड़ न लगे और संक्रमण फैलने का खतरा भी कम रहे।
टीबी की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान
जिला पदाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन टीबी प्रिवेंटिव केयर पर भी विशेष रूप से काम कर रहा है।
यदि किसी परिवार में टीबी का मरीज मिलता है, तो उसके संपर्क में आए सभी लोगों की जांच कर जरूरत पड़ने पर निवारक दवा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि समय पर जांच, नियमित दवा, पौष्टिक भोजन और जनभागीदारी के माध्यम से टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकता है।
300 मरीजों को वितरित की गई न्यूट्रीशन किट
कार्यक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी ने 300 टीबी मरीजों को न्यूट्रीशन किट वितरित की और सभी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
उन्होंने अभियान से जुड़े अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों और सहयोगी संस्थाओं को भी उनके योगदान के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त कुमारी अनुपम सिंह, सिविल सर्जन, जिला पंचायती राज पदाधिकारी इफ्तेखार अहमद, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीमती श्वेता प्रियदर्शी, जिला योजना पदाधिकारी अविनाश प्रकाश, डीपीएम स्वास्थ्य मोहम्मद अनवर आलम, स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविकाएं और बड़ी संख्या में टीबी मरीज मौजूद रहे।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
