औरंगाबाद (बिहार): आगामी 12 सितंबर 2026 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को कामयाब और असरदार बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी सिलसिले में माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद राजीव रंजन कुमार की अध्यक्षता में अभियोजन पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिला अभियोजन पदाधिकारी दीपक कुमार सिन्हा, सहायक अभियोजन पदाधिकारी संजय सिंह सहित अन्य अभियोजन पदाधिकारी मौजूद रहे। इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की सचिव श्रीमती तान्या पटेल की भी महत्वपूर्ण मौजूदगी रही।
बैठक में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में ज्यादा से ज्यादा सुलहनीय और समझौते योग्य मामलों के जल्द निपटारे को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी मामलों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान की जाए, जिनका कानून के प्रावधानों के तहत सुलह या समझौते के जरिए निपटारा किया जा सकता है।
उन्होंने खास तौर पर निर्देश दिया कि सुलहनीय प्रकृति के जिन मामलों में अभी तक आरोप-पत्र दाखिल नहीं किया गया है, उनमें किसी तरह की गैरजरूरी देरी न की जाए। संबंधित अनुसंधान पदाधिकारियों से तालमेल स्थापित कर जल्द से जल्द आरोप-पत्र दाखिल कराया जाए, ताकि ऐसे मामलों को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में सूचीबद्ध कर कानून के मुताबिक उनका त्वरित निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन पदाधिकारियों से यह भी कहा कि वे अपने-अपने स्तर पर लंबित सुलहनीय मामलों की समीक्षा करें और ऐसे मामलों की सूची तैयार करें। इसके बाद संबंधित न्यायालयों और अनुसंधान पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव श्रीमती तान्या पटेल ने राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत को कामयाब बनाने के लिए सिर्फ ज्यादा से ज्यादा मामलों की पहचान करना ही काफी नहीं है। इसके लिए पक्षकारों तक पहुंच बनाना, उन्हें सुलह और समझौते के फायदे बताना और संबंधित विभागों तथा न्यायालयों के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए न्यायिक पदाधिकारियों, अभियोजन पदाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों, संबंधित विभागों और दूसरे हितधारकों के साथ लगातार बैठकें और समन्वय किया जा रहा है।
अधिक से अधिक सुलहनीय मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के सामने लाने के लिए जरूरी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही पक्षकारों को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर विधिक जागरूकता और प्रचार-प्रसार अभियान भी चलाया जा रहा है।
सचिव श्रीमती तान्या पटेल ने सभी संबंधित पदाधिकारियों से अपील की कि वे अपने स्तर पर लंबित सुलहनीय मामलों की पहचान करें और राष्ट्रीय लोक अदालत की निर्धारित तारीख से पहले सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कराना सुनिश्चित करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा मामलों का निपटारा हो सके।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए ज्यादा से ज्यादा मामलों के निपटारे से अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही पक्षकारों को जल्द न्याय दिलाने में भी राष्ट्रीय लोक अदालत की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
अंत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सभी अभियोजन पदाधिकारियों से राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए सक्रिय सहयोग और प्रभावी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने सुलहनीय मामलों की पहचान, आरोप-पत्र जल्द दाखिल कराने और संबंधित पक्षकारों के साथ समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक मामलों के निपटारे के लिए जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
