पलामू के दो महान स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को सम्मान दिलाने की पहल तेज

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झारखंड, 3 सितंबर 2026: पलामू के दो महान स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान सभा के सदस्यों यदुवंश सहाय उर्फ ‘यदु बाबू’ तथा अमिय कुमार घोष उर्फ ‘गोपा बाबू’ की ऐतिहासिक विरासत को सार्वजनिक जीवन में उचित सम्मान दिलाने की कोशिश अब आगे बढ़ती नजर आ रही है। इस पहल को झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री केशव महतो कमलेश ने सराहा है।

इसी सिलसिले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से 1 सितंबर 2026 को जारी आभार-पत्र पलामू प्रमंडल की आयुक्त कुमुद सहाय, भा.प्र.से. को उनके कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से सौंपा गया। प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर हृदयानंद मिश्र ने यह पत्र बंद लिफाफे में आयुक्त को दिया।

स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को सार्वजनिक पहचान देने की मांग

यह पहल हृदयानंद मिश्र के नेतृत्व में किए गए उस प्रयास का हिस्सा है, जिसमें पलामू के स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवशाली विरासत से जुड़े यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष को सार्वजनिक रूप से सम्मान देने की मांग की गई थी।

शिष्टमंडल ने दोनों महान विभूतियों की प्रतिमाएं किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर स्थापित करने के साथ-साथ प्रमुख सार्वजनिक मार्गों या सरकारी संस्थानों का नाम उनके नाम पर रखने का आग्रह किया था।

इस मांग को लेकर पलामू की आयुक्त ने गंभीरता दिखाई है। बताया गया है कि उन्होंने मेदिनीनगर नगर आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसकी प्रतिलिपि पलामू के उपायुक्त को भी भेजी गई है।

आयुक्त ने बताया समाज और शासन का दायित्व

पत्र प्राप्त करने के दौरान आयुक्त कुमुद सहाय ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति योगदान को सम्मान देना समाज और शासन, दोनों की जिम्मेदारी है।

उनके इस रुख से इस मांग को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने की उम्मीद जगी है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पहल की सराहना की

अपने आभार-पत्र में केशव महतो कमलेश ने हृदयानंद मिश्र की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और देश के लिए उनके योगदान को सम्मान देना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि ऐसे महान लोगों की स्मृतियों को सार्वजनिक जीवन में स्थायी स्थान देना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होने के साथ-साथ नई पीढ़ी को उनके संघर्ष और राष्ट्रभक्ति से परिचित कराने का भी जरिया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष केवल स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि संविधान सभा के महत्वपूर्ण सदस्य भी रहे। ऐसे में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को व्यापक स्तर पर सामने लाना जरूरी है।

फोन पर भी दी थी बधाई

इससे पहले केशव महतो कमलेश ने हृदयानंद मिश्र से फोन पर बातचीत कर उन्हें इस पहल के लिए बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि पलामू से जुड़े इन महान स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान सभा के सदस्यों की विरासत को सामने लाने के लिए जिस सजगता और प्रतिबद्धता के साथ काम किया जा रहा है, वह सराहनीय है।

‘यह केवल पलामू नहीं, पूरे झारखंड की विरासत है’

हृदयानंद मिश्र ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष सिर्फ पलामू की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की राष्ट्रीय विरासत हैं।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों, महत्वपूर्ण मार्गों और सरकारी संस्थानों के जरिए इन दोनों विभूतियों की स्मृति को जीवंत रखना आने वाली पीढ़ियों के प्रति ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।

मिश्र ने साफ किया कि दोनों महान व्यक्तित्वों के योगदान को व्यापक स्तर पर सामने लाने की कोशिश आगे भी जारी रहेगी।

कई कांग्रेस पदाधिकारी रहे मौजूद

आयुक्त को आभार-पत्र सौंपे जाने के मौके पर हृदयानंद मिश्र के साथ झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के शिक्षा विभाग के चेयरमैन श्याम नारायण सिंह, पलामू जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष दया शंकर तिवारी उर्फ घुरा तिवारी, पलामू जिला कांग्रेस विधि विभाग के चेयरमैन एवं अधिवक्ता अमित पांडेय, पलामू जिला कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष औरंगजेब खान, राजीव गांधी विचार समिति की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो. स्वाति सहाय, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शैलेश चंद्रवंशी, श्रीकांत जी, पलामू जिला कांग्रेस महासचिव जतरू उरांव, राजीव गांधी विचार समिति के स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष संजीव कुमार मिश्रा और महिला कांग्रेस नेत्री सुमन तिर्की मौजूद रहीं।

विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश

पलामू के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इन दोनों प्रमुख व्यक्तित्वों की स्मृति को सार्वजनिक स्थलों और संस्थानों से जोड़ने की मांग अब प्रशासन के समक्ष पहुंच चुकी है। यदि इस दिशा में आगे ठोस कदम उठते हैं, तो इससे यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष के योगदान को स्थानीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भी उनके इतिहास से परिचित कराने में मदद मिल सकती है।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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