भागकर शादी की बढ़ती प्रवृत्ति समाज और परिवार के लिए चिंता का विषय

Share this News

महताब अंसारी.

बिहार प्रदेश | 7 अगस्त 2026 : सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार महताब अंसारी ने कहा है कि आज के दौर में भागकर शादी करने की बढ़ती घटनाएं समाज और परिवार, दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। मीडिया से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रेम विवाह करना या अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनना हर बालिग युवक-युवती का अधिकार है, लेकिन बिना परिवार की जानकारी और सहमति के घर छोड़कर शादी करना कई गंभीर समस्याओं को जन्म देता है।

भागकर शादी का असर सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं रहता

महताब अंसारी ने कहा कि जब कोई युवक या युवती अचानक घर छोड़कर विवाह कर लेता है, तो उसका असर केवल उन दोनों की ज़िंदगी तक सीमित नहीं रहता। इसका सबसे अधिक प्रभाव उनके माता-पिता और पूरे परिवार पर पड़ता है। परिवार को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिसका असर लंबे समय तक बना रहता है।

माता-पिता के त्याग और भावनाओं का भी रखें ख़याल

उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को जन्म से लेकर युवावस्था तक बहुत प्यार, त्याग और मेहनत से पालते-पोसते हैं। उनकी पढ़ाई, भविष्य और खुशियों के लिए पूरी ज़िंदगी संघर्ष करते हैं। ऐसे में जब बेटा या बेटी अचानक घर छोड़कर भागकर शादी कर लेता है, तो माता-पिता को गहरा मानसिक आघात पहुंचता है। कई परिवार इस सदमे से वर्षों तक बाहर नहीं निकल पाते।

समाज में भी उठाने पड़ते हैं कई सवाल

महताब अंसारी ने कहा कि ऐसे मामलों में परिवार को रिश्तेदारों और समाज के कई सवालों का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आलोचना और सम्मान पर पड़ने वाले असर की वजह से कई माता-पिता तनाव में रहने लगते हैं। कई बार वे शर्म और मानसिक दबाव के कारण लोगों से मिलना-जुलना भी कम कर देते हैं।

संवाद और आपसी सहमति ही सबसे बेहतर रास्ता

उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि जीवन के इतने अहम फैसले लेते समय माता-पिता और परिवार की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। यदि दो बालिग विवाह करना चाहते हैं, तो उन्हें परिवार से खुलकर बातचीत करनी चाहिए और आपसी सहमति का रास्ता अपनाना चाहिए। परिवार को विश्वास में लेकर लिया गया फैसला रिश्तों को मजबूत बनाता है और भविष्य में होने वाले कई विवादों व परेशानियों से भी बचाता है।

मजबूत समाज की बुनियाद है विश्वास और सम्मान

महताब अंसारी ने कहा कि किसी भी समाज और परिवार की मजबूती आपसी विश्वास, संवाद और सम्मान पर टिकी होती है। इसलिए युवाओं को जल्दबाजी में ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे उनके माता-पिता और परिवार को जीवनभर मानसिक पीड़ा और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़े।

लेखक : महताब अंसारी.

प्रेषक : विश्वनाथ आनंद.

Share this News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *