गया, बिहार | 1 अगस्त 2026 : गया ज़िले के कोंच प्रखंड के नेहोरा गांव के रहने वाले मौलाना अफजल रज़ा मिस्बाही ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम पूरी इंसानियत के लिए अमन, मोहब्बत, भाईचारे और इंसाफ का पैगाम लेकर आया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम की तालीम इंसान को सच्चाई, ईमानदारी, सब्र, बर्दाश्त और इंसानियत की ख़िदमत का रास्ता दिखाती है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में समाज को सबसे ज़्यादा ज़रूरत अच्छे अख़लाक, आपसी मेल-मोहब्बत और एकता की है। अगर लोग कुरआन और हदीस की तालीम पर अमल करें, तो समाज में फैली कई बुराइयों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मौलाना अफजल रज़ा मिस्बाही ने नौजवानों से अपील करते हुए कहा कि दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी ज़रूर हासिल करें और अपनी ज़िंदगी में अच्छे संस्कार और बेहतरीन किरदार अपनाएं। यही चीज़ें उन्हें एक बेहतर इंसान और समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाती हैं।
उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि आज बड़ी तादाद में लोग नमाज़ और दीन की बुनियादी तालीम से दूर होते जा रहे हैं। इसका असर समाज में बढ़ती बुराइयों, तनाव और दूसरी कई परेशानियों के रूप में साफ़ दिखाई देता है। उनका कहना था कि अगर लोग पाबंदी के साथ नमाज़ अदा करें, अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलें और दीन-ए-इस्लाम की तालीम को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लें, तो बुराइयों में कमी आएगी, परेशानियां कम होंगी और समाज में अमन, सुकून और भाईचारे का माहौल और मज़बूत होगा।
मौलाना मिस्बाही ने कहा कि इस्लाम किसी भी तरह की नफ़रत, हिंसा या भेदभाव की तालीम नहीं देता। बल्कि यह हर इंसान के साथ इज़्ज़त, मोहब्बत और भाईचारे से पेश आने का पैगाम देता है। उन्होंने कहा कि समाज में शांति, सौहार्द और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना हम सभी की साझा ज़िम्मेदारी है।
आख़िर में मौलाना अफजल रज़ा मिस्बाही ने लोगों से अपील की कि वे आपसी मतभेदों को भुलाकर एकता को मज़बूत करें और समाज में अमन-चैन और भाईचारे का माहौल कायम रखने में अपना सकारात्मक योगदान दें। उनके विचारों की मौजूद लोगों ने सराहना की।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
