औरंगाबाद (बिहार) : डेहरी ऑन सोन (रोहतास) नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और औरंगाबाद नगर परिषद के पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी रहे स्वर्गीय विमल कुमार की हत्या के मामले में मगध प्रक्षेत्र के आईजी और रोहतास के पूर्व पुलिस अधीक्षक विकास वैभव का बयान सामने आया है। उन्होंने मामले की शुरुआती जांच और अब तक सामने आए तथ्यों की जानकारी मीडिया के साथ साझा की।
आईजी विकास वैभव के मुताबिक, कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार अपनी सरकारी गाड़ी से पटना जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि उनके ड्राइवर ने बताया है कि रास्ते में कुछ अज्ञात बदमाशों ने हमला किया, मारपीट की और अधिकारी को गंभीर रूप से घायल कर दिया। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
हालांकि, शुरुआती पूछताछ के दौरान ड्राइवर के बयान बार-बार बदलने लगे। पहले उसने कहा कि दो अपाचे मोटरसाइकिलों पर सवार लोग आए थे, फिर बाद में उसने बताया कि केवल एक अपाचे बाइक पर बदमाश थे। उसके बदलते बयानों से पुलिस को शक हुआ और पूछताछ का दायरा बढ़ाया गया।
पूछताछ सख्ती से होने पर ड्राइवर ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि हत्या उसी ने की है। उसने पुलिस को बताया कि लंबे समय से लगातार ड्यूटी की वजह से वह मानसिक तनाव में था। इसी कारण उसकी कार्यपालक पदाधिकारी से अक्सर बहस होती रहती थी। उसने यह भी कहा कि नगर परिषद के अन्य कर्मचारी भी इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि दोनों के बीच पहले भी कई बार विवाद हो चुका था।
ड्राइवर के अनुसार, घटना वाले दिन भी दोनों के बीच बहस हुई थी। रात में जब दोनों पटना की ओर जा रहे थे, तब रास्ते में उसने गाड़ी रोकने की बात कही क्योंकि उसे पेशाब जाना था। उसका आरोप है कि गाड़ी रोकने से मना कर दिया गया, जिससे दोनों के बीच फिर कहासुनी शुरू हो गई।
आईजी के मुताबिक, ड्राइवर ने बताया कि इसी दौरान उसने गाड़ी रोक दी और दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। इसके बाद गाड़ी में पीछे रखी लोहे की रॉड से उसने पहले वाहन के अंदर हमला किया। जब कार्यपालक पदाधिकारी गाड़ी से नीचे उतरे तो उसने उन पर कई बार रॉड से वार किए। पुलिस को घटनास्थल पर मिले खून के निशान भी इसी बयान के आधार पर जांच का हिस्सा बनाए गए हैं।
ड्राइवर ने यह भी बताया कि वारदात के बाद उसने इस्तेमाल की गई लोहे की रॉड पास की नहर में फेंक दी। इसके बाद खुद को बचाने के लिए उसने पूरी घटना को सड़क हादसा या बाहरी हमले का रूप देने की कोशिश की। पहले उसने गाड़ी को इस तरह खड़ा किया कि मामला दुर्घटना जैसा लगे। बाद में उसे लगा कि इस कहानी पर शक हो सकता है, इसलिए उसने अज्ञात हमलावरों की कहानी बनाकर अपने एक परिचित कर्मचारी को फोन किया, जिसके बाद पुलिस को घटना की सूचना मिली।
आईजी विकास वैभव ने कहा कि पुलिस इस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया है और पटना से विशेषज्ञों की मदद ली गई है। सभी वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों की जांच जारी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक जो बातें सामने आई हैं, उनका लगातार सत्यापन किया जा रहा है। अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच करेगी। इसलिए फिलहाल जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
