गया के बिजहरा गांव में पेयजल संकट गहराया, खराब चापाकलों और बाउंड्री वॉल की कमी से ग्रामीण व बच्चे परेशान

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बिहार, 6 अगस्त 2026: गया जिले के कोंच प्रखंड की मंझियावा पंचायत स्थित बिजहरा गांव में पेयजल संकट और बुनियादी सुविधाओं की कमी अब ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। गांव में सरकारी स्तर पर लगाए गए अधिकांश चापाकल कई वर्षों से खराब पड़े हैं, लेकिन अब तक संबंधित विभाग की ओर से उनकी मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसका असर ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

वर्षों से खराब पड़े हैं सरकारी चापाकल

ग्रामीणों के अनुसार, पीएचईडी द्वारा लगाए गए कई सरकारी चापाकल करीब पांच साल से खराब हैं। इस संबंध में कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन न तो चापाकलों की मरम्मत कराई गई और न ही किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। ऐसे में लोगों को पीने के पानी के लिए दूसरे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

स्कूल के बच्चों को भी झेलनी पड़ रही परेशानी

मध्य विद्यालय में दोनों चापाकल बंद

बिजहरा मध्य विद्यालय की स्थिति और भी चिंताजनक है। स्कूल परिसर में लगे दोनों चापाकल खराब पड़े हैं। ऐसे में बच्चों को प्यास लगने पर स्कूल से बाहर जाकर पानी पीना पड़ता है। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।

बाउंड्री वॉल नहीं होने से बढ़ा खतरा

विद्यालय में बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है। स्कूल के पास ही एक सरकारी तालाब है, जो हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चे अनजाने में तालाब की ओर चले जाते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद अब तक सुरक्षा के लिहाज से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

बरसात में स्कूल पहुंचना बना मुश्किल

कीचड़ और जलजमाव से बढ़ी दिक्कत

विद्यालय तक जाने वाली सड़क भी ग्रामीणों और बच्चों की परेशानी बढ़ा रही है। बरसात के दिनों में कच्ची सड़क पर कीचड़ और जलजमाव हो जाता है। ऐसे में बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी कठिनाई होती है, वहीं शिक्षकों को भी आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

बिजली जाते ही ठप हो जाती है नल-जल योजना

ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना पर पूरी तरह निर्भर रहना संभव नहीं है, क्योंकि बिजली कटते ही जलापूर्ति बंद हो जाती है। ऐसे समय में चापाकल ही सबसे बड़ा सहारा होते हैं, लेकिन उनके भी खराब रहने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग

चापाकल, बाउंड्री वॉल और सड़क की समस्या दूर करने की अपील

ग्रामीणों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन समिति ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और पीएचईडी से मांग की है कि विद्यालय के दोनों खराब चापाकलों को जल्द से जल्द ठीक कराया जाए। साथ ही गांव के सभी बंद पड़े सरकारी चापाकलों की मरम्मत कराई जाए, विद्यालय में बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाए और सड़क की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और गांव की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस पर अब और देरी नहीं होनी चाहिए।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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