देव मेडिकल कॉलेज के PPP मॉडल पर सवाल, भाजपा नेता प्रवीण कुमार सिंह ने जताया विरोध; विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने दिया भरोसा

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औरंगाबाद (बिहार): भगवान भास्कर की नगरी देव में पातालगंगा मठ की जमीन पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को लेकर अब निर्माण के मॉडल पर बहस शुरू हो गई है। पातालगंगा मठ की 12.41 एकड़ जमीन बिहार के राज्यपाल के नाम निःशुल्क निबंधित करने की प्रक्रिया को मंजूरी मिलने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब जमीन सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए उपलब्ध कराई गई है, तो फिर अस्पताल का निर्माण और संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर क्यों किया जा सकता है?

इसी मुद्दे पर औरंगाबाद सदर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह और भाजपा नेता एवं समाजसेवी प्रवीण कुमार सिंह की राय सामने आई है। प्रवीण कुमार सिंह ने PPP मॉडल में मेडिकल कॉलेज बनाए जाने पर विरोध जताया है। दूसरी ओर, विधायक ने भरोसा दिलाया है कि क्षेत्र की जनता पर इलाज का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा और मेडिकल कॉलेज अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप काम करेगा।

प्रवीण कुमार सिंह ने PPP मॉडल पर उठाए सवाल

संवाददाता अजय कुमार पाण्डेय ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 की शाम प्रवीण कुमार सिंह से मोबाइल पर संपर्क कर मेडिकल कॉलेज के निर्माण को लेकर सवाल पूछे। उस समय उन्होंने बताया कि वह पटना में हैं और औरंगाबाद लौटने के बाद सोमवार को इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत करेंगे।

हालांकि, फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रगति यात्रा के दौरान देव में पातालगंगा मठ की जमीन का निरीक्षण करने के बाद यहां सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल बनाने की घोषणा की थी, तो फिर अब PPP मॉडल की चर्चा क्यों हो रही है?

प्रवीण कुमार सिंह के मुताबिक, जब परियोजना सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के रूप में घोषित की गई थी, तो इसके निर्माण और संचालन की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि जमीन सरकार के लिए उपलब्ध कराई गई है, तो फिर निजी भागीदारी की जरूरत क्यों पड़ रही है?

उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण में सरकार, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की भूमिका अहम है। ऐसे में जनता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि PPP मॉडल क्या है, इसके तहत अस्पताल का संचालन किस तरह होगा और मरीजों को किस दर पर इलाज मिलेगा।

प्रवीण कुमार सिंह ने इस मामले में अपनी असहमति जाहिर करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण सरकारी अस्पताल की तरह होना चाहिए, जहां मरीजों को महज पांच रुपये का पर्चा कटवाकर इलाज की सुविधा मिले।

PPP मॉडल पर क्या बोले भाजपा विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह?

इसी मुद्दे पर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को औरंगाबाद जिला मुख्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाता ने सदर विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह से भी सवाल किया। उनसे पूछा गया कि जब पातालगंगा मठ की जमीन सरकार के लिए दी गई है, तो फिर मेडिकल कॉलेज के लिए PPP मॉडल की जरूरत क्यों पड़ रही है?

इस पर विधायक ने कहा कि उन्हें प्रवीण कुमार सिंह की पूरी बातों की जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जमीन का निबंधन औरंगाबाद के सिविल सर्जन के नाम पर हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि PPP मॉडल कोई नई व्यवस्था नहीं है और बिहार में पहले भी इस तरह की व्यवस्था को लेकर निर्णय लिए गए हैं।

विधायक ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गरीबों और जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पात्र लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।

त्रिविक्रम नारायण सिंह ने भरोसा दिलाया कि मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के निर्माण में किसी तरह का समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए और अस्पताल का निर्माण अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना को जमीन पर उतारना उनकी जिम्मेदारी है और इस दिशा में संबंधित विभागों के साथ बातचीत की जा रही है।

विधायक बोले- जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने देंगे

मेडिकल कॉलेज के PPP मॉडल को लेकर उठ रही आशंकाओं पर विधायक ने कहा कि अभी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और कई बातें स्पष्ट होना बाकी हैं। उनके अनुसार, इस व्यवस्था को लेकर संबंधित विभाग से बातचीत की गई है, ताकि क्षेत्र के मरीजों पर इलाज का अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

उन्होंने कहा कि देव में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

हालांकि, PPP मॉडल के तहत इलाज की दरें क्या होंगी, अस्पताल का संचालन किस प्रकार किया जाएगा और गरीब मरीजों के लिए क्या विशेष व्यवस्था होगी, इन सवालों पर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं मिलने की शिकायत पर भी उठा सवाल

बातचीत के दौरान संवाददाता ने विधायक से आयुष्मान भारत योजना को लेकर भी सवाल किया। उनसे पूछा गया कि कई मरीजों की शिकायत रहती है कि कुछ अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज कराने में परेशानी होती है। कुछ मामलों में मरीजों को टालमटोल का सामना करना पड़ता है, जबकि कई जगह कार्ड के माध्यम से इलाज की सुविधा सीमित होने की शिकायत भी सामने आती है।

इस पर त्रिविक्रम नारायण सिंह ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था और शिकायतों के निपटारे के लिए संबंधित प्रणाली मौजूद है। यदि किसी अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो उसकी जांच की जा सकती है और अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जरूरतमंद लोगों को सुविधा देना सरकार की प्राथमिकता है। उनके मुताबिक, अनियमितता करने वाले संस्थानों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करती रही है और आगे भी करती रहेगी।

प्रवीण कुमार सिंह ने साफ किया- PPP मॉडल हुआ तो करेंगे विरोध

समाचार प्रेषण से पहले संवाददाता की दोबारा प्रवीण कुमार सिंह से बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि पातालगंगा मठ की जमीन पर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण PPP मॉडल के तहत किया जाता है, तो वह इसका विरोध करेंगे।

उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि मठ की जमीन पर बनने वाला अस्पताल सरकारी व्यवस्था के तहत संचालित हो और सभी लोगों को सुलभ दर पर इलाज मिले। उन्होंने यह भी कहा कि इलाज की सुविधा केवल आयुष्मान कार्डधारकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर जरूरतमंद व्यक्ति को सरकारी अस्पताल की तरह उपचार मिलना चाहिए।

प्रवीण कुमार सिंह ने जोर देकर कहा कि देव में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण PPP मॉडल पर नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, आम लोगों को कम खर्च में इलाज उपलब्ध कराना इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल: मेडिकल कॉलेज का संचालन कैसे होगा?

देव में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के लिए 20 एकड़ जमीन से संबंधित प्रमुख प्रक्रियाओं को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं। सरकारी भूमि के निःशुल्क हस्तांतरण और पातालगंगा न्यास की जमीन के निःशुल्क निबंधन की प्रक्रिया ने निर्माण का रास्ता आगे बढ़ाया है।

लेकिन अब चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि अस्पताल का निर्माण और संचालन किस मॉडल पर होगा। क्या यह पूरी तरह सरकारी व्यवस्था के तहत चलेगा या PPP मॉडल में निजी भागीदारी होगी? गरीब मरीजों के लिए इलाज की दरें क्या होंगी? आयुष्मान कार्ड के अलावा दूसरे मरीजों को किस तरह की सुविधा मिलेगी?

इन सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आने से जनता की आशंकाएं दूर हो सकती हैं।

फिलहाल, भाजपा नेता प्रवीण कुमार सिंह ने PPP मॉडल के खिलाफ अपना विरोध जाहिर किया है, जबकि विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने देने का भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि बिहार सरकार और संबंधित विभाग इस परियोजना के निर्माण एवं संचालन को लेकर क्या अंतिम निर्णय लेते हैं।

रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय.

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