UGC, SC/ST एक्ट और आरक्षण पर प्रवीण कुमार सिंह ने रखी राय, देव मेडिकल कॉलेज के PPP मॉडल का किया विरोध

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औरंगाबाद (बिहार), 12 अक्टूबर 2026: औरंगाबाद जिला मुख्यालय में सोमवार को भाजपा नेता एवं समाजसेवी प्रवीण कुमार सिंह ने UGC, SC/ST एक्ट, आरक्षण और देव स्थित पातालगंगा मठ की जमीन पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के निर्माण को लेकर अपनी राय रखी। संवाददाता अजय कुमार पाण्डेय से बातचीत के दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। खास तौर पर देव मेडिकल कॉलेज को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बनाए जाने को लेकर उन्होंने कड़ा विरोध जताया और सरकारी अस्पताल की तर्ज पर निर्माण एवं संचालन की मांग की।

UGC को लेकर क्या बोले प्रवीण कुमार सिंह?

बातचीत के दौरान जब प्रवीण कुमार सिंह से UGC से जुड़े विवाद और विरोध के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने शुरुआत से ही विरोध दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि संबंधित प्रावधान समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं और एक वर्ग पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें उम्मीद है कि संबंधित प्रावधान लागू नहीं होंगे।

हालांकि, UGC से संबंधित किसी नियम या प्रावधान की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उसके आधिकारिक दस्तावेजों और न्यायालय के आदेशों को देखना जरूरी है। इस बातचीत में प्रवीण कुमार सिंह ने अपनी राजनीतिक और व्यक्तिगत राय रखी।

SC/ST एक्ट पर कार्रवाई और गलत मुकदमों की शिकायतों का मुद्दा उठाया

SC/ST एक्ट के बारे में पूछे जाने पर प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि वह इस कानून के कुछ प्रावधानों और इसके कथित दुरुपयोग का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन मामलों पर चिंता जताई, जिनमें उनके मुताबिक निर्दोष लोगों को मुकदमों में फंसाया जाता है।

उन्होंने मांग की कि यदि किसी मामले में जांच के बाद आरोप गलत साबित होते हैं और किसी व्यक्ति को जानबूझकर झूठे मुकदमे में फंसाने की बात सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आर्थिक मुआवजे या प्रोत्साहन राशि के कथित दुरुपयोग की स्थिति में वसूली का प्रावधान बनाने की भी वकालत की।

प्रवीण कुमार सिंह का कहना था कि किसी निर्दोष व्यक्ति को वर्षों तक मुकदमा लड़ना पड़े या जेल में रहना पड़े, तो इसका असर उसके परिवार, बच्चों, रोजगार और भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में प्रभावित व्यक्ति को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी।

संवाददाता ने उनसे यह भी पूछा कि SC/ST एक्ट के मामलों में कथित गलत आरोपों के कारण लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया झेलने वाले लोगों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

इस पर उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई से पहले मामलों की निष्पक्ष जांच पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जमीन विवाद जैसे मामलों में भी कभी-कभी कानून के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आती हैं।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ऐसे विवादों का असर सामाजिक संबंधों और रोजगार पर पड़ सकता है। उनका कहना था कि यदि किसी ने जानबूझकर गलत मुकदमा दर्ज कराया है, तो कानून के अनुसार उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

ध्यान देने वाली बात है कि किसी कानून के दुरुपयोग से जुड़ा दावा और किसी खास मामले में आरोप गलत साबित होना अलग-अलग बातें हैं। इस बातचीत में प्रवीण कुमार सिंह ने अपने विचार रखे हैं; उनके दावों के समर्थन में कोई अलग से सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया।

आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग

आरक्षण के मुद्दे पर भी प्रवीण कुमार सिंह ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए, ताकि इसका लाभ उन जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

उनका तर्क था कि किसी समाज के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी वर्ग के कुछ लोग लंबे समय से आरक्षण का लाभ प्राप्त कर रहे हैं, तो उसी वर्ग के वंचित लोगों तक अवसर पहुंचाने के लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए।

प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि आरक्षण से जुड़े मुद्दों को संबंधित समुदायों के लोगों को भी सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जरूरतमंद और वंचित लोग इस विषय पर अपनी मांग उठाते हैं, तो वह उनके पक्ष में खड़े होने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने गरीबी और सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त अनाज प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या का उल्लेख करते हुए भी आरक्षण के लाभ और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बीच संबंध पर सवाल उठाया।

हालांकि, आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था, उसके पात्रता मानदंड और अलग-अलग समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित कानूनों के आधार पर किया जाना चाहिए।

देव मेडिकल कॉलेज के PPP मॉडल पर क्यों है विरोध?

बातचीत का सबसे अहम हिस्सा देव प्रखंड में पातालगंगा मठ की जमीन पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को लेकर रहा।

प्रवीण कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि मेडिकल कॉलेज का निर्माण सरकारी व्यवस्था के तहत होता है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इसके विपरीत, यदि परियोजना को PPP मॉडल पर आगे बढ़ाया जाता है, तो वह इसका विरोध करेंगे।

उन्होंने कहा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान देव में पातालगंगा मठ की जमीन का निरीक्षण किया था और वहां सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। ऐसे में उनके अनुसार, परियोजना की प्रकृति और संचालन व्यवस्था को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

प्रवीण कुमार सिंह ने सवाल उठाया कि जब जमीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए उपलब्ध कराई गई है, तो निजी भागीदारी की जरूरत क्यों पड़ रही है। उनका कहना था कि मठ की जमीन पर बनने वाली स्वास्थ्य सुविधा का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को कम खर्च में इलाज उपलब्ध कराना होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि मठ की जमीन का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यदि अस्पताल सरकारी व्यवस्था के तहत बनाया जाता है, तो वह इसका स्वागत करेंगे।

PPP मॉडल में फीस और इलाज के खर्च को लेकर चिंता

प्रवीण कुमार सिंह ने PPP मॉडल को लेकर आशंका जताई कि निजी भागीदारी होने पर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई और अस्पताल में इलाज का खर्च बढ़ सकता है। उन्होंने निजी मेडिकल कॉलेजों में अधिक फीस और कथित तौर पर अतिरिक्त रकम वसूले जाने की शिकायतों का उल्लेख किया।

उनका कहना था कि यदि अस्पताल के संचालन में निजी संस्था की प्रमुख भूमिका होगी, तो मरीजों से इलाज के नाम पर मनमाना शुल्क वसूले जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों के परिवार पहले ही आर्थिक दबाव में रहते हैं। ऐसे में अस्पताल के खर्च का बोझ बढ़ना उनके लिए मुश्किल पैदा कर सकता है।

प्रवीण कुमार सिंह ने PPP मॉडल के तहत लंबे समय के समझौतों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका तर्क था कि सार्वजनिक जमीन और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल होने वाली परियोजना में जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

हालांकि, PPP मॉडल में फीस, संचालन, निजी भागीदार की जिम्मेदारियों और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति संबंधित समझौते और सरकार की शर्तों पर निर्भर करती है। इस परियोजना के लिए ऐसी शर्तों का पूरा विवरण बातचीत में सामने नहीं आया।

सरकारी अस्पताल की तरह इलाज उपलब्ध कराने की मांग

प्रवीण कुमार सिंह ने मांग की कि देव में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण सरकारी अस्पताल की तर्ज पर किया जाए। उन्होंने कहा कि मरीजों को कम खर्च में इलाज मिलना चाहिए और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ केवल आयुष्मान कार्डधारकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

उनका जोर इस बात पर था कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी बिना अनावश्यक परेशानी के इलाज मिल सके। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य आम जनता की जरूरतों को पूरा करना होना चाहिए, न कि मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि निजी भागीदारी के तहत अस्पताल का संचालन किया गया और फीस पर उचित नियंत्रण नहीं रहा, तो गरीब परिवारों को परेशानी हो सकती है।

प्रवीण कुमार सिंह ने कहा- विरोध का उद्देश्य जनता का हित

बातचीत के अंत में प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि देव में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है और वह इस परियोजना के विरोध में नहीं हैं। उनका विरोध केवल PPP मॉडल को लेकर है।

उन्होंने दोहराया कि यदि मेडिकल कॉलेज सरकारी व्यवस्था के तहत बनता है, तो वह इसका स्वागत करेंगे। उनके मुताबिक, पातालगंगा मठ की जमीन पर बनने वाली स्वास्थ्य सुविधा का लाभ आम लोगों को मिलना चाहिए और इलाज की दरें ऐसी होनी चाहिए कि गरीब मरीज भी अपना उपचार करा सकें।

उन्होंने इस मुद्दे को लेकर अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में इस परियोजना पर उनके विरोध और समर्थन के रुख को भी याद रखा जाएगा।

अब सरकार की व्यवस्था पर टिकी निगाहें

देव में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के लिए पातालगंगा की जमीन से जुड़ी प्रक्रियाओं को मंजूरी मिलने के बाद अब परियोजना के निर्माण और संचालन की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज है।

एक ओर प्रवीण कुमार सिंह PPP मॉडल के विरोध में सरकारी अस्पताल की तर्ज पर इलाज की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर इस परियोजना को लेकर अंतिम संचालन व्यवस्था और मरीजों की फीस से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।

फिलहाल, प्रवीण कुमार सिंह ने अपनी राय सार्वजनिक कर दी है। अब यह देखना अहम होगा कि बिहार सरकार और संबंधित विभाग मेडिकल कॉलेज के निर्माण, संचालन, फीस तथा गरीब मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को लेकर क्या व्यवस्था तय करते हैं।

रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.

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