जनगणना 2027: 25 जनवरी से 28 फरवरी तक गणना, संदर्भ तिथि 1 मार्च — पूरी जानकारी

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New Delhi, 30-10-2026 : भारत में 16 साल बाद फिर से पूरी जनगणना होने जा रही है — और इस बार ये सिर्फ़ काग़ज़-कलम की बात नहीं, बल्कि देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की, जिसमें साफ़ कहा गया कि जनसंख्या गणना 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच होगी।

लेकिन यहाँ एक ज़रूरी बात है — ये तारीख़ें हर राज्य और हर क्षेत्र के लिए एक जैसी नहीं हैं। कुछ जगहों पर बर्फ़बारी की वजह से, और कुछ जगहों पर चुनावों की वजह से, शेड्यूल अलग है।

संदर्भ तिथि क्या होती है और 1 मार्च क्यों?

जनगणना में “संदर्भ तिथि” यानी Reference Date वो ख़ास पल होता है, जिस समय की जनसंख्या को आधार मानकर सारे आँकड़े गिने जाते हैं। जनगणना 2027 के लिए ये तिथि 1 मार्च 2027, मध्यरात्रि 00:00 बजे तय की गई है — इसे “Census Moment” भी कहा जाता है।

यानी जो भी जन्म, मृत्यु, प्रवास या बदलाव 1 मार्च की रात 12 बजे के बाद होगा, वो इस गणना के आँकड़ों में नहीं गिना जाएगा। यही वजह है कि गणना के बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक एक “रिवीज़नल राउंड” भी रखा गया है, ताकि कोई चूक न रहे।

बर्फीले इलाक़ों में अलग शेड्यूल: सितंबर 2026 में ही गणना

लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ़बारी वाले इलाक़ों में सर्दियों में ज़मीन बर्फ़ से ढक जाती है, इसलिए वहाँ गणना सितंबर 2026 में ही कर ली गई। इन क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026, मध्यरात्रि रखी गई है।

यानी जब बाक़ी देश में जनवरी-फरवरी 2027 में गणना होगी, तब तक इन बर्फीले इलाक़ों का आँकड़ा पहले ही जुट चुका होगा।

चुनावी राज्यों में पहले ही गणना: दिसंबर 2026 से जनवरी 2027

गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के गैर-बर्फीले हिस्सों में विधानसभा चुनावों की वजह से गणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच करने का फ़ैसला हुआ है। वहाँ सेल्फ़-एन्युमरेशन की खिड़की 16 से 30 नवंबर 2026 तक रहेगी, और रिवीज़नल राउंड 5 से 9 जनवरी 2027 तक होगा।

इसका मक़सद साफ़ है — चुनावों के दौरान प्रशासनिक मशीनरी व्यस्त रहती है, इसलिए गणना को पहले निपटाना बेहतर समझा गया।

दो चरणों में होगी गणना: पहले घर, फिर लोग

जनगणना 2027 दो चरणों में होगी।

पहला चरण — गृह सूचीकरण एवं आवास जनगणना (Houselisting & Housing Census): अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच, हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ने अपनी 30-दिन की अवधि तय की। इसमें घरों की स्थिति, सुविधाएँ और संपत्ति का डेटा जुटाया गया।

दूसरा चरण — जनसंख्या गणना (Population Enumeration): यही वो चरण है जो जनवरी-फरवरी 2027 में होगा, जिसमें हर व्यक्ति की जनसांख्यिकीय, सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक, प्रवास और प्रजनन संबंधी जानकारी ली जाएगी।

इस बार दूसरे चरण में जाति संबंधी प्रश्न भी शामिल किया गया है — यानी जाति आधारित गणना भी होगी।

सेल्फ़-एन्युमरेशन: अब ख़ुद अपनी जानकारी भरने का मौक़ा

पहली बार, जनगणना में सेल्फ़-एन्युमरेशन का विकल्प भी दिया जा रहा है। यानी लोग अपने घर की जानकारी ख़ुद ऑनलाइन भर सकेंगे — बाक़ी देश के लिए ये खिड़की 10 से 24 जनवरी 2027 तक रहेगी, और चुनावी राज्यों में 16 से 30 नवंबर 2026 तक।

ये क़दम डिजिटल भारत की दिशा में एक बड़ा क़दम है, और गणना को ज़्यादा सटीक व तेज़ बनाने की कोशिश है।

जनगणना अधिनियम और गोपनीयता: आपका डेटा सुरक्षित है

जनगणना का संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत होता है। सरकार ने साफ़ किया है कि गणना के दौरान इकट्ठा किया गया कोई भी डेटा गोपनीय है और प्रेस या किसी अन्य एजेंसी को जारी नहीं किया जाएगा, जब तक ORGI से निर्देश न आए।

यानी आपकी जानकारी सिर्फ़ सांख्यिकीय मक़सद के लिए है, न कि किसी व्यक्तिगत पहचान के लिए।

आगे क्या होगा: 16वीं जनगणना, 8वीं स्वतंत्रता-उत्तर गणना

जनगणना 2027 भारत की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, और 2021 वाली गणना कोविड-19 महामारी की वजह से टल गई थी।

अब जब तारीख़ें तय हो चुकी हैं, तो अगले कुछ महीनों में देशभर में गणनाकारों (enumerators) की तैनाती, प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान तेज़ होगा।

संपादकीय नज़रिया: गिनती सिर्फ़ आँकड़े नहीं, नीति की नींव है

जनगणना सिर्फ़ “कितने लोग हैं” का हिसाब नहीं — ये स्कूल, अस्पताल, सड़क, राशन, पेंशन, और हर उस नीति की नींव है जो आपके इलाक़े तक पहुँचती है। 16 साल के अंतराल के बाद ये गणना और भी ज़्यादा अहम हो जाती है, क्योंकि इन 16 सालों में देश की आबादी, प्रवास, शहरीकरण और सामाजिक ढाँचे में बड़े बदलाव आए हैं।

इसलिए जब गणनाकार आपके दरवाज़े पर आए, तो सहयोग करें — क्योंकि ये सिर्फ़ सरकार का काम नहीं, बल्कि हम सबका साझा फ़र्ज़ है।

रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.

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