छात्रवृत्ति राशि से जुड़े पुराने मामले को लेकर जिला कल्याण पदाधिकारी से सवाल

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औरंगाबाद (बिहार): शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को अपराह्न करीब 3:15 बजे संवाददाता ने समाहरणालय परिसर स्थित जिला कल्याण पदाधिकारी अभिषेक कुमार के कार्यालय पहुंचकर उनसे मुलाकात की। बातचीत के दौरान संवाददाता ने उनके विभाग से जुड़े एक पुराने मामले को लेकर सवाल किया।

मामला पंजाब नेशनल बैंक, रिसियप शाखा में मध्य विद्यालय परता के नाम से खोले गए एक बैंक खाते से जुड़ा बताया गया। संवाददाता ने सवाल करते हुए कहा कि उक्त खाते में छात्रवृत्ति के नाम पर कल्याण विभाग के कार्यालय से 16 लाख 24 हजार 800 रुपये की राशि भेजी गई थी। इसके बाद इस राशि को बैंक खाते से निकाल भी लिया गया।

विद्यालय के नाम पर खाते को लेकर उठाया गया सवाल

संवाददाता ने जिला कल्याण पदाधिकारी से पूछा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि पंजाब नेशनल बैंक, रिसियप में मध्य विद्यालय परता के नाम से खाता तो खोला गया, जबकि जिस प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर और मुहर के आधार पर यह खाता खोला गया था, उस नाम का कोई प्रधानाध्यापक उस विद्यालय में था ही नहीं।

ऐसे में सवाल यह उठाया गया कि जब खाते को लेकर ऐसी स्थिति थी, तो कल्याण विभाग के कार्यालय से छात्रवृत्ति के नाम पर उक्त बैंक खाते में राशि कैसे भेज दी गई और बाद में उस राशि की निकासी भी कैसे कर ली गई?

जांच के बाद राशि जमा कराने का दिया गया था निर्देश

बातचीत के दौरान संवाददाता ने यह भी सवाल उठाया कि छात्रवृत्ति घोटाले का मामला सामने आने के बाद आर्थिक इकाई विभाग, पटना की ओर से जांच की गई थी। जांच के बाद कार्यालय से पत्रांक और दिनांक जारी करते हुए आदेश भी निर्गत किया गया था।

इसके बाद जिला कल्याण कार्यालय की ओर से भी एक पत्र जारी किया गया था। उसमें कहा गया था कि संबंधित राशि पत्र प्राप्त होने के 24 घंटे के अंदर जिला कल्याण कार्यालय, औरंगाबाद में चेक अथवा ड्राफ्ट के माध्यम से जमा कराई जाए। ऐसा नहीं करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नीलाम पत्र वाद दायर किए जाने की बात कही गई थी।

संवाददाता ने सवाल किया कि इसके बावजूद अभी तक उक्त छात्रवृत्ति राशि बैंक खाते में जमा नहीं कराई गई है। साथ ही, किसी विभाग या माननीय न्यायालय की ओर से भी कोई स्टे ऑर्डर जारी नहीं हुआ है। ऐसे में राशि अब तक क्यों जमा नहीं कराई गई और दोषी व्यक्ति के विरुद्ध अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

जिला कल्याण पदाधिकारी ने कहा- मामला काफी पुराना है

इन सवालों के जवाब में जिला कल्याण पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने कहा कि यह मामला काफी पुराना है और उस समय वह औरंगाबाद कार्यालय में कार्यरत भी नहीं थे। उन्होंने बताया कि उन्हें औरंगाबाद कार्यालय में आए हुए भी ज्यादा समय नहीं हुआ है।

उन्होंने छात्रवृत्ति घोटाले के मामले के संबंध में कहा कि सन् 2016 से छात्रवृत्ति का पैसा कल्याण विभाग से नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग से हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पुराने मामले में लोग जेल भी गए हैं और सलैया थाना में प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी।

नीलाम पत्र और सर्टिफिकेट केस चलने की जानकारी

जिला कल्याण पदाधिकारी ने कहा कि ऐसे मामले में नीलाम पत्र भी दायर हुआ है और सर्टिफिकेट केस चल रहा है।

उन्होंने कहा कि जहां तक मध्य विद्यालय परता के नाम पर पंजाब नेशनल बैंक, रिसियप में फर्जी खाता खोलकर राशि की निकासी किए जाने की बात है, उस मामले का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाएगा।

पूरा विवरण उपलब्ध कराने की बात

अभिषेक कुमार ने कहा कि इसके लिए उन्हें कुछ दिनों का समय दिया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले से जुड़ा पूरा विवरण उपलब्ध करा दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस मामले में जिला कल्याण कार्यालय की ओर से पत्र जारी किया गया था और उसके बावजूद 24 घंटे के अंदर राशि जमा नहीं कराई गई, तो निश्चित रूप से नीलाम पत्र दायर हुआ ही होगा। उन्होंने कहा कि नियमानुसार विभागीय कार्रवाई भी निश्चित रूप से होगी।

इस तरह मध्य विद्यालय परता के नाम से पंजाब नेशनल बैंक, रिसियप में खोले गए कथित फर्जी खाते, उसमें भेजी गई 16 लाख 24 हजार 800 रुपये की छात्रवृत्ति राशि और उसकी निकासी से जुड़े पुराने मामले को लेकर जिला कल्याण पदाधिकारी ने मामले का पूरा विवरण उपलब्ध कराने के लिए कुछ समय मांगा है।

रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.

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