सीने की हड्डी काटे बिना उल्टे दिल का वाल्व बदला: सफदरजंग अस्पताल ने रचा दुनिया का इतिहास

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दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों ने एक ऐसी सर्जरी कर दिखाई है जो पहले कभी नहीं हुई थी। एक मरीज का दिल आम लोगों की तरह बाईं तरफ नहीं बल्कि दाईं तरफ था। उसके अलावा खून की नसें भी अपनी सही जगह पर नहीं थीं। ऐसे मुश्किल हालत में डॉक्टरों ने रोबोट की मदद से दिल का खराब वाल्व सफलतापूर्वक बदल दिया। यह काम सीने की हड्डी को बीच से काटे बिना छोटे-छोटे छेदों से किया गया। अस्पताल का दावा है कि रोबोट का इस्तेमाल करके बाईं तरफ से इस तरह की सर्जरी दुनिया में पहली बार हुई है।

मरीज की अनोखी बीमारी क्या थी

मरीज को जन्म से ही दो दुर्लभ हृदय विकार थे। एक तो डेक्सट्रोकार्डिया, जिसमें दिल सीने के दाईं तरफ होता है। दूसरा कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज यानी सीसीटीजीए। इस बीमारी में दिल के निचले हिस्से उल्टे होते हैं। नतीजा यह होता है कि कमजोर वाला हिस्सा पूरे शरीर को खून पंप करने का काम करता है। इससे उस हिस्से का वाल्व बहुत दबाव में आ जाता है और लीक करने लगता है।

मरीज की उम्र अड़तीस साल थी। वाल्व के लीक होने से दिल पर लगातार बोझ बढ़ रहा था। हालत बिगड़ती जा रही थी। सामान्य तरीकों से सर्जरी करना बहुत जोखिम भरा था क्योंकि दिल की बनावट पूरी तरह अलग थी।

कैसे हुई यह मुश्किल सर्जरी

यह जटिल ऑपरेशन कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉक्टर अनुभव गुप्ता और उनकी टीम ने किया। अस्पताल की निदेशक डॉक्टर कविता शर्मा के नेतृत्व में यह कामयाबी हासिल हुई।

आमतौर पर रोबोटिक माइट्रल वाल्व सर्जरी सीने के दाईं तरफ से की जाती है। लेकिन इस मरीज का दिल दाईं तरफ होने की वजह से डॉक्टरों ने बाईं तरफ से रोबोटिक तरीका अपनाया। उन्होंने सीने पर छोटे-छोटे छेद किए। फिर रोबोटिक हाथों और हाई डेफिनिशन थ्री डी कैमरे की मदद से अंदर का पूरा नक्शा साफ देखा। खराब वाल्व को बहुत सफाई से हटाकर नया वाल्व लगा दिया।

ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने मरीज के दिल का थ्री डी सीटी स्कैन कर पूरा नक्शा बनाया था। इससे उन्हें पता था कि अंदर कहां क्या है और कैसे काम करना है। इस तैयारी की वजह से सर्जरी सुरक्षित तरीके से पूरी हो गई।

रोबोटिक सर्जरी के फायदे

इस तरीके में सीने की हड्डी नहीं काटनी पड़ती। छोटे छेदों से काम होता है इसलिए खून बहुत कम बहता है। संक्रमण का खतरा भी न के बराबर रहता है। मरीज को दर्द कम होता है और वह जल्दी ठीक होकर घर जा सकता है। सामान्य ओपन हार्ट सर्जरी में रिकवरी में महीनों लग जाते हैं लेकिन यहां रिकवरी बहुत तेज होती है।

अस्पताल का कहना है कि यह सरकारी अस्पताल की बहुत बड़ी कामयाबी है। इससे साबित होता है कि सरकारी अस्पतालों में भी सबसे नई तकनीक से इलाज हो सकता है। आम आदमी को भी विश्व स्तर की सुविधा मिल सकती है।

भारत के लिए गर्व का पल

यह सर्जरी मेडिकल लिटरेचर में पहली बार दर्ज होने वाली है। डेक्सट्रोकार्डिया और सीसीटीजीए वाले मरीज में रोबोटिक सिस्टम से बाईं तरफ से सिस्टमिक एवी वाल्व बदलना पहले कभी नहीं हुआ था। डॉक्टर अनुभव गुप्ता की टीम ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया।

सफदरजंग अस्पताल पहले भी रोबोटिक सर्जरी में आगे रहा है। अब इस उपलब्धि से भारत की छवि वैश्विक चिकित्सा जगत में और मजबूत हुई है। सरकारी अस्पताल में इतनी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल होना देश के लिए खुशी की बात है।

मरीज अब ठीक होने की राह पर है। उसकी हालत पहले से काफी बेहतर हो गई है। डॉक्टरों की मेहनत और नई तकनीक ने एक मुश्किल जिंदगी को नई उम्मीद दी है।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि मेडिकल साइंस लगातार आगे बढ़ रही है। जो बीमारी कभी लाइलाज समझी जाती थी अब उसकी भी इलाज संभव है। सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने साबित कर दिया कि हिम्मत, तैयारी और सही तकनीक से नामुमकिन काम भी मुमकिन हो सकता है।

रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.

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