गया में आईजी पद समाप्त करने के फैसले के खिलाफ महाधरना, कांग्रेस और मगधवासियों ने सरकार से की बहाली की मांग

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6 अगस्त 2026, बिहार: बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) द्वारा 29 जुलाई 2026 को जारी आदेश के बाद मगध क्षेत्र में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। आदेश के तहत करीब सात साल पहले मगध प्रक्षेत्र के लिए बनाए गए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के पद को समाप्त कर फिर से पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) का पद कर दिया गया है। इस फैसले को लेकर मगधवासियों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है।

इसी के विरोध में कांग्रेस पार्टी और मगध क्षेत्र के लोगों ने गया के गांधी मैदान स्थित गेट नंबर-7 के पास विशाल महाधरना आयोजित किया और राज्य सरकार से आईजी का पद दोबारा बहाल करने की मांग की।

आईजी पद बहाल करने की उठी मांग

धरना कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने कहा कि बिहार के विभाजन के बाद राजधानी पटना के बाद गया, मगध प्रमंडल का सबसे महत्वपूर्ण मुख्यालय है। लंबे समय से गया को पूर्व के एकीकृत बिहार की दूसरी राजधानी रहे रांची की तर्ज पर बिहार की दूसरी राजधानी बनाने की मांग भी उठती रही है।

नेताओं का कहना था कि ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से आईजी का पद हटाकर दोबारा डीआईजी का पद कर देना मगध क्षेत्र का विकास नहीं, बल्कि उसका दर्जा कम करने जैसा है। इस फैसले से पूरे इलाके में असंतोष का माहौल है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण आईजी पद जरूरी

नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था का दिया हवाला

धरने में मौजूद नेताओं ने कहा कि मगध प्रक्षेत्र भौगोलिक रूप से पहाड़ी और जंगलों वाला इलाका है। इसके साथ ही यह क्षेत्र लंबे समय से नक्सल प्रभावित भी रहा है। ऐसे में यहां पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) का पद होना बेहद जरूरी है, ताकि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

विकास वैभव के काम की सराहना

नेताओं ने कहा कि कुछ महीने पहले चर्चित आईपीएस अधिकारी विकास वैभव के मगध प्रक्षेत्र के आईजी बनने के बाद पुलिस से जुड़े मामलों के समाधान में तेजी आई थी। आम लोगों, खासकर छात्रों और युवाओं को भी पुलिस व्यवस्था पहले से बेहतर महसूस होने लगी थी।

लेकिन अचानक आईजी का पद समाप्त करने का आदेश जारी होने के बाद लोगों में मायूसी फैल गई है। उनका कहना है कि इससे बेहतर काम करने वाले अधिकारियों को हटाने का संदेश जा रहा है।

पुराने फैसले का भी किया जिक्र

अरविंद पांडेय का उदाहरण सामने रखा

धरना दे रहे नेताओं ने कहा कि इससे पहले भी जब मगध के तत्कालीन डीआईजी अरविंद पांडेय अपने बेहतर कार्यों के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय थे, तब उनके प्रमोशन का आदेश जारी होने के बाद उन्हें यहां से हटा दिया गया था।

अब विकास वैभव के कार्यों की भी लोग सराहना कर रहे हैं। ऐसे समय में आईजी का पद ही समाप्त कर देने की बात से लोग हैरान और निराश हैं। उनका कहना है कि आखिर बेहतर काम करने वाले अधिकारियों को इस तरह क्यों हटाया जाता है।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन

धरना में शामिल नेताओं ने महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। इसके लिए उन्होंने ज्ञापन भी भेजा और कहा कि मगध प्रक्षेत्र में आईजी का पद पहले की तरह बहाल किया जाए।

इस महाधरना में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष युगल किशोर सिंह, बाबूलाल प्रसाद सिंह, राम प्रमोद सिंह, टिंकू गिरी, विद्या शर्मा, दामोदर गोस्वामी, शिव कुमार चौरसिया, सुनील कुमार पासवान, अर्जुन प्रसाद, इंदल पासवान, मुन्ना मांझी, रंजीत सिंह, खिजीर हायात सहित कई अन्य नेता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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