औरंगाबाद में हत्या के मामले में दोषी को उम्रकैद, आर्म्स एक्ट में भी सजा

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औरंगाबाद (बिहार), 1 सितंबर 2026: व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद में मंगलवार को हत्या के एक मामले में अदालत ने दोषी अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई। जिला जज तृतीय अशोक कुमार गुप्ता ने दाउदनगर थाना कांड संख्या 132/2020 से जुड़े एस.टी.आर. 32/22 और 243/24 मामले में सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी परशुराम सिंह ने बताया कि दाउदनगर थाना क्षेत्र के अरई निवासी अजय पाण्डेय को भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दोषी को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अदालत ने आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत भी तीन वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही, अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा।

अदालत ने अजय पाण्डेय को इन धाराओं के तहत 24 अगस्त 2026 को दोषी करार दिया था। इसके बाद मंगलवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी होने के बाद अंतिम सजा सुनाई गई।

घरेलू विवाद के दौरान चली थी गोली

मामले की प्राथमिकी मृतक की पत्नी गुड्डी देवी, निवासी अरई, ने 13 मई 2020 को दाउदनगर थाने में दर्ज कराई थी। प्राथमिकी के अनुसार घटना के दिन घर में विवाद चल रहा था। गुड्डी देवी के मुताबिक उनके भसुर उन्हें डांट-फटकार रहे थे। उनके पति कुंज बिहारी पाण्डेय ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों के बीच मारपीट शुरू हो गई।

आरोप था कि इसी दौरान भसुर ने पूजा घर से देशी पिस्तौल निकाली और गोली चला दी। गोली कुंज बिहारी पाण्डेय की गर्दन में लगी। वह आंगन में गिरकर छटपटाने लगे। घटना के बाद परिवार के अन्य सदस्य मौके पर पहुंचे, जबकि आरोपी पिस्तौल लेकर वहां से फरार हो गया।

परिजन घायल कुंज बिहारी पाण्डेय को तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल, औरंगाबाद लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्राथमिकी में यह भी बताया गया था कि परिवार में पहले से घरेलू विवाद होता रहा था।

मामले में अभियुक्त अजय पाण्डेय ने 19 जून 2020 को अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी, दाउदनगर के न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था। करीब छह वर्ष तक चले मामले में दोष सिद्ध होने के बाद अब अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है।

रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.

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