गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग और योगी का जवाब

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कुछ महीनों से कुछ मुस्लिम मौलवी और संगठनों ने मांग की कि गाय को हिंदुस्तान का राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और पूरे देश में गाय की हत्या पर एक समान पाबंदी लगाई जाए। इस मांग पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गाय पहले से गौमाता है, इस रिश्ते को किसी सरकारी घोषणा की जरूरत नहीं। उन्होंने इसे दोहरा रवैया बताया और मौलवियों से कहा कि अपनी बिरादरी में हत्या और तस्करी रोकने का उपदेश दें।

यह बयान जून दो हजार छब्बीस में बिजनौर के एक कार्यक्रम में और फिर अगस्त में भी सामने आया। योगी ने साफ कहा कि गाय को सिर्फ पशु कहना गलत है। मां और बेटे के बीच कोई घोषणा नहीं होती, वैसे ही गौमाता के साथ हमारा नाता जन्म-जन्मांतर का है। उन्होंने कहा कि गौमाता खुद-ब-खुद राष्ट्रमाता है।

मांग कहां से शुरू हुई

मई-जून दो हजार छब्बीस के आसपास कुछ मुस्लिम संगठनों और मौलवियों ने यह मांग उठाई। इसमें जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक गुट के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी से जुड़े बयान भी शामिल रहे। कुछ ने ईद-उल-अजहा के मौके पर भी गाय की हत्या न करने और उसे राष्ट्रीय पशु बनाने की बात कही। उनका कहना था कि इससे गाय की हत्या रुकेगी और उसका सम्मान बढ़ेगा। कुछ ने गौ-रक्षा के नाम पर हो रहे उत्पीड़न का भी जिक्र किया।

योगी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि एक तरफ हत्या का समर्थन या अनदेखी, दूसरी तरफ राष्ट्रीय पशु की मांग – यह दोहरा मापदंड है। उन्होंने मौलवियों से कहा कि हिंदुओं को गौमाता का सम्मान सिखाने की जरूरत नहीं, बल्कि अपनी बिरादरी में हत्या और तस्करी रोकें।

उत्तर प्रदेश का कानून क्या कहता है

उत्तर प्रदेश में उन्नीस सौ पचपन का गाय वध निषेध कानून है। योगी सरकार ने इसे और सख्त बनाया। गाय, बैल या बछड़े की हत्या पर तीन से दस साल की सजा और भारी जुर्माना का प्रावधान है। बार-बार अपराध पर सजा बढ़ सकती है। गाय को भूखा रखना या क्रूरता भी अपराध माना गया है। सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों में हजारों लोगों को इस तरह के मामलों में गिरफ्तार किया गया है।

दूसरी तरफ, कई रिपोर्टों में यह भी सामने आता है कि सख्त कानून के बावजूद तस्करी और अवैध हत्या के मामले पूरी तरह खत्म नहीं हुए। गौ-रक्षा के नाम पर कभी-कभी आम लोगों, खासकर पशु व्यापारियों के साथ उत्पीड़न की शिकायतें भी आती रही हैं। यह दोनों पक्ष की हकीकत है।

भैंस के मांस का निर्यात – एक बड़ी आर्थिक सच्चाई

गाय के मांस का निर्यात देश में प्रतिबंधित है। केंद्र की नीति साफ है कि गाय, बैल या बछड़े का मांस बाहर नहीं भेजा जा सकता। लेकिन भैंस का मांस (काराबीफ) कानूनी तौर पर निर्यात होता है। हिंदुस्तान दुनिया के बड़े भैंस मांस निर्यातक देशों में है। उत्तर प्रदेश इस व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह स्थिति एक तरह का संतुलन पैदा करती है। एक तरफ गाय की सांस्कृतिक और कानूनी सुरक्षा, दूसरी तरफ भैंस के मांस से विदेशी मुद्रा और रोजगार। कई किसान अनुत्पादक पशु बेचने की मजबूरी रखते हैं। गाय और भैंस में फर्क न कर पाने वाले तत्वों की वजह से कभी-कभी कानूनी व्यापार भी प्रभावित होता है। यह सिर्फ उत्तर प्रदेश की नहीं, पूरे देश की आर्थिक-सामाजिक हकीकत है।

केंद्र का रुख और राष्ट्रीय पशु

केंद्र सरकार पहले भी संसद में कह चुकी है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। जानवरों की रक्षा ज्यादातर राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आती है। देश का राष्ट्रीय पशु बंगाल टाइगर है। गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग समय-समय पर अलग-अलग लोगों और संगठनों ने की है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया गया।

दोनों तरफ की प्रतिक्रियाएं

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। कुछ लोग योगी के बयान को सनातन परंपरा और गौमाता के सम्मान की रक्षा के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि गाय का स्थान हमारी संस्कृति में पहले से ऊंचा है, घोषणा की जरूरत नहीं।

दूसरी तरफ कुछ लोग कहते हैं कि यह बयान सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला हो सकता है, खासकर स्वतंत्रता दिवस के आसपास। कुछ का मानना है कि मौलवियों की मांग भी राजनीतिक है और योगी का जवाब भी राजनीतिक। कई लोग यह भी कहते हैं कि असल मुद्दा किसानों की आर्थिक समस्या, आवारा पशु और कानून के समान लागू होने का है।

कुछ रिपोर्टों में यह भी आया कि कुछ मौलवियों ने गाय की हत्या न करने की अपील भी की थी। वहीं योगी सरकार गौशालाओं और गाय संरक्षण पर जोर देती रही है। दोनों तरफ के दावे और आरोप जारी हैं।

भारतीय नजरिए से देखने पर

भारत में गाय का विषय सिर्फ धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक, कानूनी, आर्थिक और सामाजिक भी है। कई राज्यों में अलग-अलग स्तर की पाबंदियां हैं। साथ ही भैंस के मांस का बड़ा निर्यात उद्योग भी चल रहा है। किसानों के लिए अनुत्पादक पशु का निपटारा एक व्यावहारिक समस्या है। गौ-रक्षा के नाम पर हिंसा की घटनाएं भी समय-समय पर चर्चा में आती रही हैं।

योगी आदित्यनाथ का बयान इन सबके बीच आया। उन्होंने मांग को दोहरा रवैया बताया और गौमाता के मौजूदा सम्मान पर जोर दिया। मौलवियों की मांग भी गाय की सुरक्षा और सम्मान बढ़ाने के नाम पर आई। दोनों पक्ष अपने तर्क रख रहे हैं।

रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.

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