मोबाइल नहीं, अभिभावकों के संस्कार बनाएंगे बच्चों का उज्ज्वल भविष्य : महताब अंसारी

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महताब अंसारी.

आज के दौर में मोबाइल और इंटरनेट हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इनसे शिक्षा, जानकारी और संवाद के नए रास्ते खुले हैं, लेकिन इनका बढ़ता और अनियंत्रित इस्तेमाल बच्चों और युवाओं के व्यवहार पर भी असर डाल रहा है। ऐसे समय में पत्रकार महताब अंसारी का मानना है कि बच्चों का उज्ज्वल भविष्य सिर्फ़ मोबाइल से नहीं, बल्कि अभिभावकों के अच्छे संस्कारों से तय होता है।

महताब अंसारी ने रखी अपनी बात

मीडिया से विशेष बातचीत के दौरान पत्रकार महताब अंसारी ने कहा कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल ज़रूरी है, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी बच्चों को सही संस्कार देना है। उन्होंने कहा कि अगर माता-पिता बच्चों को अनुशासन, ज़िम्मेदारी और अच्छे संस्कार सिखाएंगे, तो वही बच्चे आगे चलकर अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन करेंगे।

परिवार के साथ घटता संवाद चिंता का विषय

महताब अंसारी ने कहा कि एक समय था, जब बच्चे अपने माता-पिता और घर के बुज़ुर्गों के साथ बैठकर जीवन के संस्कार सीखते थे। आज हालात बदल गए हैं। अधिकतर बच्चे घंटों मोबाइल की स्क्रीन में व्यस्त रहते हैं। परिवार के साथ बातचीत कम होती जा रही है और कई बच्चे अपने माता-पिता की सलाह को भी नज़रअंदाज़ करने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि यह किसी एक परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।

मोबाइल का संतुलित इस्तेमाल क्यों ज़रूरी है?

महताब अंसारी के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में नाबालिग लड़के-लड़कियों के घर छोड़ने, गलत संगत में पड़ने और परिवार से दूर होने जैसी घटनाएं लगातार सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि हर घटना के लिए केवल मोबाइल को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन मोबाइल और सोशल मीडिया का अनियंत्रित इस्तेमाल कई मामलों में एक अहम वजह बनकर सामने आया है।

इसी कारण उन्होंने परिवार और समाज दोनों से समय रहते सजग रहने की अपील की।

अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम

उन्होंने कहा कि माता-पिता केवल बच्चों के हाथ में मोबाइल देकर अपनी ज़िम्मेदारी पूरी न समझें। उन्हें बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, उनकी बातों को ध्यान से सुनना चाहिए, उनकी परेशानियों को समझना चाहिए और उनके दोस्त की तरह उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। साथ ही उन्हें अच्छे और बुरे के बीच का फ़र्क भी समझाना चाहिए।

बच्चों को भी समझनी होगी अपनी ज़िम्मेदारी

महताब अंसारी ने कहा कि बच्चों को यह समझना चाहिए कि इस दुनिया में माता-पिता से बड़ा शुभचिंतक कोई नहीं होता। उनका सम्मान करना, उनकी बातों को ध्यान से सुनना और परिवार से मिले संस्कारों को अपनाना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

समाज और विद्यालय भी निभाएं अपनी भूमिका

उन्होंने कहा कि विद्यालयों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों को भी समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। ऐसे अभियानों के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों को डिजिटल संतुलन, नैतिक शिक्षा और पारिवारिक मूल्यों के महत्व के बारे में लगातार जागरूक किया जाना चाहिए।

संस्कार ही बच्चों के बेहतर भविष्य की असली पहचान

महताब अंसारी ने अपने संदेश में कहा कि यदि आज हम अपने बच्चों को संस्कार, अनुशासन और ज़िम्मेदारी की सीख देंगे, तो आने वाला कल उन्हीं बच्चों की वजह से परिवार, समाज और देश के लिए गर्व का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल ज़रूरी है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी इंसानियत, अच्छे संस्कार और पारिवारिक रिश्तों की मज़बूती है। यही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी नींव है।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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