नयी दिल्ली, 4 अगस्त, 2026 : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को लेकर सवाल उठाए हैं, जिसमें उन्होंने ‘गुमराह युवाओं को माफ करने’ की बात कही थी। राहुल गांधी ने मंगलवार को निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री को ‘‘भारत के भविष्य’’ यानी छात्रों को माफ करने का अधिकार किसने दिया है।
राहुल गांधी ने यह बात एमडीएमके नेता वाइको की पुस्तक ‘वाइको इन पार्लियामेंट’ के विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए कही। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सोच पर भी सवाल उठाए।
राहुल गांधी का कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस की विचारधारा भारत की अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और इतिहास को कमजोर करने वाली है। उन्होंने कहा कि देश की यही विविधता भारत की असली पहचान है और इसे बचाने के लिए छात्र सड़कों पर उतर रहे हैं।
उन्होंने छात्रों के विरोध को ‘‘भारत की अवधारणा’’ यानी आइडिया ऑफ इंडिया की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि युवा देश की विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपने बयान में यह सवाल भी खड़ा किया कि जिन छात्रों को देश का भविष्य माना जाता है, उनके बारे में फैसला लेने या उन्हें माफ करने का अधिकार किसी एक व्यक्ति के पास कैसे हो सकता है। उन्होंने इस मुद्दे को भारत की सोच, संस्कृति और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़कर पेश किया।
वाइको की किताब के विमोचन कार्यक्रम में राहुल गांधी ने देश की बहुलता और अलग-अलग पहचान को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत कई भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों से मिलकर बना हुआ देश है और इसकी विविधता को बनाए रखना जरूरी है।
इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और आरएसएस की विचारधारा की आलोचना करते हुए कहा कि देश की अलग-अलग आवाजों और पहचान को दबाने की कोशिश का विरोध किया जा रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, छात्रों का आंदोलन इसी सोच के खिलाफ है और वे भारत की मूल भावना की रक्षा के लिए आगे आ रहे हैं।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
