रफीगंज नगर पंचायत में चुंगी वसूली और विकास कार्यों को लेकर विवाद, विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने मैमून निशा का किया समर्थन

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रफीगंज/औरंगाबाद, 17 अक्टूबर 2026: बिहार के औरंगाबाद जिले की रफीगंज नगर पंचायत में वाहन प्रवेश शुल्क, चुंगी वसूली और विकास कार्यों को लेकर विवाद सामने आया है। नगर पंचायत की चेयरमैन मिरिख दरखशां के प्रतिनिधि डॉ. गुलाम शाहिद ने कार्यपालक पदाधिकारी मैमून निशा की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, रफीगंज विधानसभा क्षेत्र संख्या 224 के जदयू विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने कार्यपालक पदाधिकारी का समर्थन करते हुए उन्हें ईमानदार महिला बताया और कहा कि उनके अनुसार वह नियमों के विपरीत कोई काम नहीं कर रही हैं।

नगर पंचायत में चल रहे इस विवाद के बीच विधायक का बयान सामने आने के बाद चुंगी वसूली, टेंडर प्रक्रिया और विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

वाहन प्रवेश शुल्क और चुंगी वसूली पर उठाए सवाल

चेयरमैन मिरिख दरखशां के प्रतिनिधि डॉ. गुलाम शाहिद ने नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा की ओर से जारी दो पत्रों का हवाला देते हुए वाहन प्रवेश शुल्क और चुंगी वसूली पर सवाल उठाए हैं।

उनके मुताबिक, विभाग के पत्र संख्या 2339, दिनांक 23 जून 2026 और पत्र संख्या 2811, दिनांक 7 अगस्त 2026 में नगर निकायों में वाहनों से प्रवेश शुल्क या चुंगी की वसूली नहीं करने का निर्देश दिया गया है। डॉ. गुलाम शाहिद का कहना है कि यदि इसके बावजूद किसी वाहन, ट्रक, बस, टेंपो, 407 वाहन या पिकअप से इस तरह का शुल्क वसूला जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को इसका भुगतान नहीं करना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि संबंधित नियमावली नहीं बनने के कारण इस वसूली पर तत्काल रोक लगाई गई है और निर्देशों के उल्लंघन की स्थिति में विधिसम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, इन पत्रों के वास्तविक प्रावधानों और रफीगंज में उनके अनुपालन की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

जिला परिषद की जमीन पर भी वसूली का आरोप

डॉ. गुलाम शाहिद ने यह आरोप भी लगाया कि रफीगंज नगर पंचायत क्षेत्र में जिला परिषद की जमीन पर भी वाहनों से प्रवेश शुल्क और चुंगी की वसूली की जा रही है। उनके अनुसार, यदि यह वसूली संबंधित प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र से बाहर की जा रही है, तो इसकी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने इस मामले में संबंधित अधिकारियों से नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की। इस आरोप पर संबंधित विभाग या जिम्मेदार पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

कार्यपालक पदाधिकारी की कार्यशैली पर भी लगाए आरोप

चेयरमैन के प्रतिनिधि डॉ. गुलाम शाहिद ने 2 अक्टूबर 2026 की रात दिए गए अपने वीडियो बयान में कार्यपालक पदाधिकारी मैमून निशा की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे।

उन्होंने आरोप लगाया था कि नगर पंचायत में मनमाने तरीके से काम किया जा रहा है और विभागीय योजनाओं के टेंडर अपने पसंदीदा व्यक्तियों को देने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा था कि नगर पंचायत में अधिकतर काम टेंडर के माध्यम से निकाले जा रहे हैं, जबकि उनके अनुसार विभागीय स्तर पर जूनियर इंजीनियर (जेई) की देखरेख में होने वाले कार्यों और ठेकेदारों के माध्यम से कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता में अंतर हो सकता है।

डॉ. गुलाम शाहिद ने बाबूगंज में भारतीय स्टेट बैंक के सामने बने एक सार्वजनिक शौचालय की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य संतोषजनक नहीं हुआ है और इसके बावजूद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

ये सभी आरोप डॉ. गुलाम शाहिद की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि के लिए संबंधित निर्माण कार्यों, टेंडर दस्तावेजों और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच जरूरी है।

विधायक प्रमोद कुमार सिंह से पूछा गया विवाद पर सवाल

नगर पंचायत में चेयरमैन के प्रतिनिधि और कार्यपालक पदाधिकारी के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के संबंध में संवाददाता ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को जिला मुख्यालय स्थित अपने आवास पर रफीगंज विधानसभा क्षेत्र संख्या 224 के जदयू विधायक एवं समाजसेवी प्रमोद कुमार सिंह से मुलाकात की।

इस दौरान विधायक से पूछा गया कि नगर पंचायत में दोनों पक्षों के बीच विवाद के कारण विकास कार्य प्रभावित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में इस पूरे मामले पर उनका क्या कहना है?

सवाल के जवाब में विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने कार्यपालक पदाधिकारी मैमून निशा का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मैमून निशा एक ईमानदार महिला हैं और उनके अनुसार वह नियमों के विपरीत कोई काम नहीं कर रही हैं। विधायक ने यह भी कहा कि वह इस मामले को देख रहे हैं।

विधायक के इस बयान के बाद नगर पंचायत में जारी विवाद को लेकर उनका पक्ष सामने आया है। दूसरी ओर, चेयरमैन के प्रतिनिधि द्वारा लगाए गए आरोपों और उन पर संबंधित अधिकारियों के जवाब का इंतजार है।

जांच और पारदर्शिता से दूर हो सकता है विवाद

रफीगंज नगर पंचायत में वाहन शुल्क की वसूली, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित सरकारी पत्रों, वसूली के रिकॉर्ड, टेंडर दस्तावेजों और निर्माण कार्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

नगर पंचायत के विकास कार्यों से जुड़े विवाद का समाधान पारदर्शी प्रक्रिया, तथ्यों के आधार पर जांच और सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने से ही संभव है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि नियमों का पालन सुनिश्चित हो और विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न किया जाए।

रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.

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