औरंगाबाद में भूमि सुधार उपसमाहर्ता न्यायालय ने तीन वर्षों में 5,941 मामलों का किया निष्पादन, लंबित वादों की संख्या में आई कमी

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औरंगाबाद (बिहार), 2 नवंबर 2026: औरंगाबाद के भूमि सुधार उपसमाहर्ता न्यायालय में पिछले करीब तीन वर्षों के दौरान वादों के निष्पादन में तेजी दर्ज की गई है। अधिवक्ता से मिली जानकारी के मुताबिक, भूमि सुधार उपसमाहर्ता श्वेतांक लाल के कार्यकाल में अब तक कुल 5,941 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है।

श्वेतांक लाल ने फरवरी 2024 में अपना कार्यभार संभाला था। उस समय न्यायालय में कुल 641 वाद दर्ज थे। उनके पदभार ग्रहण करने के बाद मामलों के दाखिले और सुनवाई के साथ-साथ उनके निष्पादन की प्रक्रिया में भी तेजी आई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवंबर 2024 में 142 और दिसंबर 2024 में 420 मामलों का निष्पादन किया गया। इस दौरान नए वादों के दाखिले में भी तेजी आई, जिसके चलते मार्च 2025 तक लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 2,247 हो गई थी।

इसके बाद लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया में और तेजी आई। दिसंबर 2025 में 457, जनवरी 2026 में 513, फरवरी 2026 में 427 और मार्च 2026 में 345 वादों का निष्पादन किया गया। मामलों के निपटारे का यह सिलसिला आगे भी जारी रहा।

इसका असर लंबित वादों की संख्या पर भी देखने को मिला। जानकारी के मुताबिक, मई 2026 तक लंबित मामलों की संख्या घटकर महज 720 रह गई थी।

अधिवक्ता के अनुसार, भूमि सुधार उपसमाहर्ता श्वेतांक लाल के कार्यकाल में अब तक कुल 5,941 वादों का निष्पादन हो चुका है। फिलहाल करीब 500 मामलों की सुनवाई दो अलग-अलग न्यायालयों में चल रही है। इनमें भूमि सुधार उपसमाहर्ता श्वेतांक लाल और भूमि सुधार उपसमाहर्ता बेबी प्रिया के न्यायालय शामिल हैं।

बताया गया है कि मामलों के तेजी से निष्पादन के कारण अब इस न्यायालय में नए वादों के दाखिले की प्रक्रिया में भी तेजी आ रही है। भूमि विवाद से जुड़े मामलों के समय पर निपटारे से संबंधित पक्षों को राहत मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.

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