-एल.एस. हरदेनिया.
पश्चिम बंगाल की एक महिला मंत्री कोलकाता शहर के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर रही थीं। एक जगह वह रुक गईं और उन्होंने देखा कि एक महिला फुटपाथ पर अपने छोटे बच्चों के साथ बैठी है और दूध गरम कर रही है। मंत्री रुकीं और उस महिला से पूछा कि तुम फुटपाथ पर क्यों बैठी हो? मंत्री के साथ जो पुलिसकर्मी थे उनसे मंत्री ने कहा कि इस तरह फुटपाथ पर लोगों को बैठने नहीं दिया जाए और यदि वे बैठें हैं तो उनको हटाया जाए। महिला ने पूछा कि मैं कहां रहूं। ना ही मेरा घर है और ना ही मेरे कोई रिश्तेदार हैं। पति ने मुझे छोड़ दिया है। मैं मजदूरी कर अपना पेट पाल रही हूं। मंत्री ने कहा कि कुछ भी हो तुम्हें फुटपाथ पर बैठने का अधिकार नहीं है। यदि लोग फुटपाथ पर बैठने लगेंगे तो पैदल चलने वाले लोगों के लिए जगह कहां बचेगी।
मंत्री महोदय भाजपा सरकार से हैं और महिलाओं और बच्चों से संबंधित विभाग की मंत्री हैं। उनके द्वारा फुटपाथ पर बैठे हुए लोगों और विशेषकर उस महिला के साथ किए गए व्यवहार का किसी ने वीडियो बना लिया और उसे अनेक लोगों ने देखा। मंत्री महोदय द्वारा की गई टिप्पणी की अनेक लोगों ने आलोचना की। जिन लोगों ने आलोचना की उनमें तृणमूल कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता शामिल थे। सभी आलोचकों ने कहा कि मंत्री महोदय शायद नहीं जानतीं कि आज भी हमारे देश में करोड़ों लोगों का घर नहीं है और वे बिना छत के रह रहे हैं। चाहे बरसात हो, ठंड हो या गर्मी हो। हम हमारे देशवासियों के लिए अभी तक न तो अच्छे खाने की व्यवस्था कर पाए हैं, न कपड़ों की व्यवस्था कर पाए हैं, न दवाइयों की व्यवस्था कर पाए हैं और छत तो उनके लिए स्वप्न के समान है।
सभी प्रवक्ताओं ने मंत्री महोदय से यह अपेक्षा की कि वे अफसोस जाहिर करें। इस तरह के लोगों से माफी मांगें। उनका यह रवैया इस बात का प्रतीक है कि वो देश की वास्तविक स्थिति से परिचित नहीं हैं और ऐसी पार्टी की सदस्य हैं जो असमान समाज की पीड़ा को नहीं समझती। वह महिला जिसे वे डांट रही थीं और इस तरह के लोगों को फुटपाथ से हटाया जाए ऐसा आदेश दे रही थीं, ऐसी महिला को जनप्रतिनिधि होने का अधिकार नहीं है और मंत्री होने का तो कतई नहीं।
ये मंत्री खुद एक महिला हैं और मां भी हैं। उन्हें उस महिला की दयनीय स्थिति देखकर आंसू बहाने थे। आंसुओं की जगह वह उसे फटकार रही थीं। शायद उन्हें पुलिस को यह आदेश देना था कि इस महिला को यहां से हटाओ और उसके लिए रहने की उचित व्यवस्था करो। यह दुख की बात है कि आज हमारे देश में ऐसे लोग मंत्री बन जाते हैं जो समाज में रहने वाले व्यक्तियों की वास्तविक स्थितियों से परिचित नहीं हैं। यह बहुत ही दुखद स्थिति है जिस पर हम सबको आंसू बहाना चाहिए।
यह गरीब हिन्दू महिला पंजाब की रहने वाली थी जिसके पति ने उसे छोड़ दिया था और वह कलकत्ते में फुटपाथ पर रहते हुए किसी तरह अपना और अपने बच्चों का पेट पाल रही थी।
