औरंगाबाद (बिहार): बिहार कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक नाराज़गी अब पटना से निकलकर दिल्ली तक पहुंच गई है। मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को बिहार के सभी 38 जिलों से पहुंचे सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन के सामने कांग्रेस कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं के हाथों में कांग्रेस के झंडे और विभिन्न मांगों से जुड़ी तख्तियां नजर आईं।
धरने का नेतृत्व छत्रपति यादव, पूर्व विधायक आनंद माधव, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य नागेंद्र वीकल, एआईसीसी सदस्य अनिल कुमार सिंह, पूर्व विधायक राजकुमार राजन, यमुना शुक्ला, विद्यु शेखर पाण्डेय और एहसान उल हक आरजू सहित अन्य नेताओं ने किया।
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं और नेताओं से बातचीत के दौरान संगठन के भीतर चल रही नाराज़गी की कई वजहें सामने आईं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई पुराने एवं समर्पित कांग्रेस नेताओं को नजरअंदाज किया गया।
कार्यकर्ताओं ने बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ राजेश राम और बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अलावरू पर भी गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दोनों नेताओं के नेतृत्व में संगठन में ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं, जिनका कांग्रेस से पुराना जुड़ाव नहीं रहा है।
संगठन में पदों को लेकर भी उठे सवाल
धरने में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सदस्यता शुल्क के नाम पर 50 रुपये लिए गए, जबकि प्रदेश संगठन में अलग-अलग पदों के लिए कथित तौर पर रकम तय किए जाने की बातें सामने आईं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि प्रदेश उपाध्यक्ष के पद के लिए 1.5 लाख रुपये और प्रदेश महासचिव के पद के लिए एक लाख रुपये तक लिए जाने की शिकायतें हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और कांग्रेस के संबंधित नेताओं की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी कर दूसरे दलों से आए लोगों को संगठन में महत्वपूर्ण पद दिए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने इसे पार्टी के संविधान और संगठनात्मक परंपराओं के विपरीत बताया।
पटना के बजाय दिल्ली में क्यों हुआ प्रदर्शन?
इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि बिहार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराज़गी जाहिर करने के लिए पटना के बजाय दिल्ली का रुख किया। बिहार के सभी 38 जिलों से कार्यकर्ताओं का दिल्ली पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि संगठन के भीतर असंतोष को लेकर प्रदर्शनकारी सीधे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं।
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ राजेश राम और बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अलावरू को उनके पदों से हटाने की मांग भी उठाई।
राजेश राम के गृह जिले औरंगाबाद से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे
प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ राजेश राम जिस औरंगाबाद जिले से आते हैं, वहां से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे।
प्रदर्शन में औरंगाबाद के कई पूर्व जिला अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है। इनमें शैलू दुबे, मृत्युंजय सिंह, धीरेंद्र सिंह, शाहनवाज आलम, सूर्यदेव यादव, नवीन शर्मा, उदय पासवान, अंबिका पासवान और बबलू सिंह समेत कई नाम शामिल हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्टी संगठन में कथित तौर पर बढ़ रही अनदेखी, टिकट वितरण और पदों के बंटवारे में पारदर्शिता की कमी के खिलाफ है।
गौरतलब है कि राजेश कुमार उर्फ राजेश राम कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से लगातार 10 वर्षों तक कांग्रेस विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। ऐसे में उनके अपने गृह जिले से जुड़े कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का दिल्ली पहुंचकर उन्हें पद से हटाने की मांग करना पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को और महत्वपूर्ण बना देता है।
फिलहाल प्रदर्शनकारी कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से मामले में हस्तक्षेप करने और बिहार संगठन में बदलाव की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इन आरोपों और कार्यकर्ताओं की नाराज़गी पर क्या रुख अपनाता है।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
