20 लोगों को रौंदने वाले को थाने में AC रूम? मुंबई पुलिस के रवैये पर फूटा गुस्सा, मलाड़ हादसे में 2 की मौत

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20 लोगों को रौंदती बेकाबू कार, सड़क पर लाशें और चीख-पुकार… लेकिन ये खौफनाक मंजर यहीं खत्म नहीं हुआ. असली ड्रामा तो तब शुरू हुआ जब आरोपी को हथकड़ी लगाने के बजाय मुंबई के मालाड पुलिस स्टेशन के अफसर कथित तौर पर उसकी खातिरदारी में जुट गए.

आरोप है कि जहां पीड़ित परिवार सदमे में आंसू बहा रहा था, वहीं आरोपी को लॉकअप में चिल करने के लिए AC रूम, बैठने को आरामदायक कुर्सी और हाथ में स्मार्टफोन थमाकर 5-स्टार VIP ट्रीटमेंट परोसा जा रहा था. जब थाने की इस खास सर्विस की भनक बाहर खड़े लोगों को लगी तो पब्लिक का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा. लोग अब सीधे सवाल पूछ रहे हैं कि क्या कानून की नजर में सब बराबर हैं या फिर VIP का टैग लगते ही खाकी भी घुटनों पर आ जाती है?

इस भयानक एक्सीडेंट में 2 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि कई लोग जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं. हादसे के बाद पुलिस के रवैये को लेकर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. पुलिस स्टेशन के बाहर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है.

मामलतदार वाडी सिग्नल पर मचा कोहराम

यह खौफनाक वारदात 30 अगस्त 2026 की रात करीब 8:00 बजे एस.वी. रोड (S.V. Road), मामलतदार वाडी रोड सिग्नल के पास हुई. मालाड सबवे की तरफ से आ रही एक तेज रफ्तार कार (गाड़ी नंबर MH 02 GJ 2722) अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क पर मौजूद भीड़ को रौंदती चली गई.

हादसे का मंजर इतना भयानक था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई. इस एक्सीडेंट में मालाड वेस्ट की रहने वाली महिला वकील प्रियंका मयंक सत्रा के ऊपर से कार का पहिया गुजर गया, जिससे उनकी मौके पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई. वहीं एक अन्य व्यक्ति की भी जान चली गई और एक नागरिक के सिर पर 20 टांके आए हैं.

थाने में आरोपी को ‘5-स्टार’ सर्विस?

हादसे के बाद जब देर रात करीब 11:30 बजे मृतका के परिजन, दोस्त और स्थानीय नागरिक मालाड वेस्ट पुलिस स्टेशन FIR दर्ज कराने पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए. परिजनों का आरोप है कि पुलिस आरोपी पर सख्त एक्शन लेने के बजाय उसे VIP ट्रीटमेंट दे रही थी.

प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक:

आरोपी को लॉकअप के अंदर खुलेआम मोबाइल इस्तेमाल करने की छूट थी और बैठने के लिए बकायदा कुर्सी दी गई थी.

देर रात करीब 1:20 बजे वर्सोवा इलाके से एक 3-स्टार महिला पुलिस अधिकारी थाने पहुंचीं.

मेडिकल चेकअप का बहाना बनाकर आरोपी को लॉकअप से निकाला गया और थाने के पीछे बने एयर-कंडीशंड (AC) रूम में आराम से बैठाया गया.

जब परिजनों ने आरोपी के बारे में पूछा तो पुलिस अधिकारियों ने यह कहकर गुमराह किया कि उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया है.

पुलिस प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

चूंकि आरोपी वर्सोवा/अंधेरी इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है इसलिए अब मालाड पुलिस के रवैये पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या पुलिस किसी दबाव में आकर आरोपी को बचाने और केस को दबाने की कोशिश कर रही है?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जनता और पीड़ित परिवार ने शासन-प्रशासन से 3 प्रमुख मांगें रखी हैं:

आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज कर उसे कड़ी सजा दी जाए.

आरोपी को VIP वागणूक देने वाले और उसकी मदद करने वाले सभी पुलिसकर्मियों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें तुरंत सस्पेंड किया जाए.

उस रात के पुलिस स्टेशन के सभी CCTV फुटेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.

क्या कहती है पुलिस और कोर्ट की कार्रवाई?

पुलिस के मुताबिक, आरोपी कृष्णा शांताराम चामनकर (उम्र लगभग 65–71 वर्ष), एक रिटायर्ड कॉन्ट्रैक्टर/रियल एस्टेट डेवलपर है, जिसका नाम पहले महाराष्ट्र सदन मनी लॉन्ड्रिंग स्कैम में भी आ चुका है. उसके खिलाफ BNS की धारा 106(1) (लापरवाही से मौत कराना), धारा 281 (खतरनाक/तेज रफ्तार ड्राइविंग) और मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है.

हालांकि, 1 सितंबर को उसे बोरिवली मजिस्ट्रेट कोर्ट से 15,000 रुपये की जमानत मिल गई, जिसके बाद वह जेल से बाहर आ गया. वहीं, “VIP ट्रीटमेंट” वाले आरोपों पर मुंबई पुलिस का आधिकारिक जवाब अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है; कई रिपोर्ट्स में लिखा है कि आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है.

आखिर सवाल यही है: कानून सबके लिए बराबर है या नहीं?

एक तरफ एक परिवार अपनी बेटी/पत्नी को खोकर टूट चुका है, दूसरी तरफ आरोपी को थाने के अंदर AC रूम, कुर्सी और मोबाइल जैसी सुविधाएं मिलना आम आदमी के लिए न्याय के सिद्धांतों पर सीधा वार लगता है.

अगर CCTV फुटेज सार्वजनिक होते हैं और जांच में ये आरोप सच साबित होते हैं, तो सवाल उठेगा कि क्या खाकी वर्दी भी कुछ खास लोगों के आगे नतमस्तक हो जाती है? और अगर ये आरोप झूठे हैं, तो पुलिस को तुरंत सफाई देकर भरोसा जीतना होगा, वरना जनता का गुस्सा और भड़क सकता है.

आपकी क्या राय है? क्या पुलिस को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए या फिर ये सिर्फ अफवाहें हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं.

रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.

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