रसुवा बाढ़: एक त्रासदी की पूरी कहानी

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26 अगस्त 2026: वह काला दिन

सुबह करीब 8:37 बजे (स्थानीय समय), नेपाल-चीन सीमा के ऊँचे इलाक़े में अचानक एक विशाल हिमनद टूटा। USGS के मुताबिक, यह 5.2 मैग्निट्यूड का सिस्मिक इवेंट था, जो पहले 4.4 का भूकंप लगा था, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि यह ग्लेशियर कोलैप्स था। बर्फ, चट्टान और मिट्टी का यह मलबा तेज़ी से नीचे गिरा और ल्हेंदे खोला नदी में जा गिरा, जो भोटेकोशी और फिर त्रिशूली नदी का हिस्सा है।

बाढ़ का कहर: 44 mph की रफ़्तार, 250 फ़ीट ऊँची दीवार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बर्फ का एक 2,000 फ़ीट चौड़ा टुकड़ा करीब 4,000 फ़ीट नीचे गिरा, जिससे मलबे की 250 फ़ीट ऊँची दीवार बनी, जो 44 mph (लगभग 71 km/h) की रफ़्तार से बसी। इसने रास्ते में आते गाँव, पुल, सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को बहा लिया। नुवाकोट और रसुवा ज़िलों में घरों की दूसरी मंज़िल तक कीचड़ जमा दिखा, गाड़ियाँ दब गईं, और लोग स्तब्ध रह गए।

मौतें और लापता: 160+ मृत, 750+ लापता

नेपाल पुलिस ने कम से कम 157–162 मौतें दर्ज कीं, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में 3 मौतें और 558 लापता बताए गए। कुल मिलाकर 750 से ज़्यादा लोग लापता हैं, जिनमें 133–142 भारतीय, 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक शामिल हैं। कई भारतीय काईलाश मानसरोवर यात्रा पर थे।

बचाव कार्य: हेलीकॉप्टर, ज़मीनी टीम, लेकिन चुनौतियाँ

रगड़दार इलाक़े, टूटी सड़कें और ख़राब मौसम की वजह से बचाव कार्य मुश्किल हो गया। हेलीकॉप्टर और ज़मीनी टीमों का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन कई जगहों पर लैंडिंग नहीं हो पा रही। भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों ने मदद की पेशकश की है।

ग़लत वीडियो और अफ़वाहें

सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें बाढ़ में हाथी तैरते दिखे। लेकिन ये वीडियो पुराने या किसी अन्य घटना से जुड़े हैं, इस बाढ़ से नहीं। USGS और नेपाली अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि यह भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर कोलैप्स था।

क्यों हुआ यह हादसा? क्लाइमेट चेंज का साया

हिमालय का पिघलना: 2000 से दोगुनी रफ़्तार

काठमांडू स्थित ICIMOD (International Centre for Integrated Mountain Development) के मुताबिक, हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर 2000 से दोगुनी रफ़्तार से पिघल रहे हैं। ल्हेंदे खोला नदी पिछले 14 महीनों में दो बार बाढ़ आई है—पिछली बार अगस्त 2025 में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) से 9 लोग मारे गए थे।

बर्फ-चट्टान एवलांच: नदी रुकी, फिर अचानक छूटी

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लेशियर से बर्फ-चट्टान का एवलांच हुआ, जिसने नदी को अस्थायी रूप से रोक दिया, और फिर अचानक टूटने से बाढ़ का विशाल वेव downstream आया। त्रिशूली नदी का जलस्तर आधे घंटे में 9 मीटर (27 फ़ीट) तक बढ़ गया।

आगे क्या? चेतावनी, तैयारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

अर्ली वार्निंग सिस्टम की ज़रूरत

Saswata Sanyal (ICIMOD) जैसे विशेषज्ञ “वार्मिंग हिमालय” में अर्ली वार्निंग सिस्टम पर ज़ोर दे रहे हैं। सेटेलाइट इमेजरी, सीस्मिक स्टेशन और हाइड्रोलॉजिकल डेटा से ऐसे हादसों की पहले ही चेतावनी दी जा सकती है।

अंतरराष्ट्रीय मदद: भारत, चीन, UN और अन्य देश

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल को हर संभव मदद की पेशकश की। UN, रेड क्रॉस और कई देशों ने मानवीय सहायता के लिए कदम बढ़ाए हैं।

रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.

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