औरंगाबाद, बिहार। जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर के औरंगाबाद दौरे के दौरान आयोजित अभिनंदन समारोह के बाद संवाददाताओं ने पार्टी के औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र प्रभारी और रफीगंज विधानसभा क्षेत्र संख्या-224 के पूर्व प्रत्याशी विकास कुमार सिंह उर्फ बबलू सिंह से मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर बातचीत की।
गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम के बाद उनसे देश में UGC, SC/ST एक्ट और आरक्षण को लेकर चल रही बहस के बारे में सवाल किया गया। संवाददाता ने पूछा कि इन मुद्दों को लेकर देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज है और अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से इसे उठा रहे हैं। इसी संदर्भ में विकास कुमार सिंह से उनकी राय जानने की कोशिश की गई।
सवाल के जवाब में विकास कुमार सिंह ने कहा कि जब उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की ओर से इस तरह के मामलों पर टिप्पणियां सामने आ रही हैं, तो सरकार को भी इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की टिप्पणियां सरकार के लिए एक तरह से आईना दिखाने का काम कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार अपनी दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने मौजूदा राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की राजनीति 85-15 प्रतिशत, अगड़ा-पिछड़ा और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक, इस तरह की राजनीति से देश की स्थिति बेहतर होने के बजाय और कठिन होती जा रही है।
‘UGC में संशोधन के नाम पर छात्रों को जाति में बांटना ठीक नहीं’
विकास कुमार सिंह ने UGC से जुड़े विवाद पर कहा कि यह कोई नया संस्थान या नया विषय नहीं है। उनके मुताबिक, UGC पहले से ही अस्तित्व में है, लेकिन इसमें किए जा रहे संशोधनों को लेकर छात्रों के बीच असंतोष पैदा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि छात्रों को जाति के आधार पर बांटना उचित नहीं है। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में मेधावी छात्रों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए और किसी भी ऐसे बदलाव से बचना चाहिए जिससे छात्रों में भेदभाव की भावना पैदा हो।
जब संवाददाता ने उनसे सवाल किया कि यदि नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं तो इसे केवल पुरानी व्यवस्था का हिस्सा कैसे माना जा सकता है, इस पर उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव या उन्हें अपने तरीके से लागू करने को लेकर ही छात्रों और युवाओं में नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि UGC की व्यवस्था पहले से चली आ रही है और यह आज की बनाई हुई व्यवस्था नहीं है। उनके मुताबिक, इसमें बदलाव के नाम पर अगर मेधावी छात्रों के सामने मुश्किलें पैदा की जाती हैं, तो यह उचित नहीं है।
विकास कुमार सिंह ने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में छात्रों के साथ किसी भी तरह का जातिगत विभाजन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि UGC में सुधार की जरूरत हो सकती है, लेकिन ऐसे बदलाव नहीं होने चाहिए जिनसे छात्रों के बीच असंतोष बढ़े या मेधावी विद्यार्थियों के हित प्रभावित हों।
गौरतलब है कि UGC, आरक्षण और SC/ST एक्ट जैसे मुद्दे लंबे समय से देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा रहे हैं। इन विषयों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की राय एक-दूसरे से काफी अलग रही है।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
